Deputy CM : संविधान में पद का जिक्र नहीं, फिर क्यों इतनी ताकतवर है यह कुर्सी?
डिप्टी सीएम पद का संविधान में नाम न होने के बावजूद डिप्टी सीएम की कुर्सी ताकतवर इसलिए है, क्योंकि भारतीय राजनीति में सत्ता सिर्फ कानून से नहीं, संतुलन और संख्या से चलती है. डिप्टी सीएम दरअसल संविधान से बाहर की, लेकिन सत्ता के भीतर की कुर्सी है.
संविधान की किताब में जिस कुर्सी का नाम तक नहीं लिखा, वही कुर्सी भारतीय राजनीति में सबसे ज्यादा वजनदार क्यों मानी जाती है? डिप्टी सीएम (Deputy CM) पद के लिए संविधान में न कोई अनुच्छेद, न कोई संवैधानिक अधिकार, फिर भी सत्ता के केंद्र में. कई राज्यों में तो यह पद मुख्यमंत्री से कम और सत्ता संतुलन की चाबी ज्यादा लगता है. गठबंधन सरकारों के दौर में यह कुर्सी कभी भरोसे की गांठ बनती है, तो कभी राजनीतिक दबाव का हथियार. सवाल यही है. ऐसे में सवाल यह है कि जब संविधान में डिप्टी सीएम नाम की कोई व्यवस्था ही नहीं, तो यह पद इतना ताकतवर कैसे हो गया? सुनेत्रा पवार को क्यों बनाया गया डिप्टी सीएम?
संविधान में उप मुख्यमंत्री पद का जिक्र है?
भारत के संविधान में ‘उप मुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister)’ पद का कहीं भी उल्लेख नहीं है. ना किसी अनुच्छेद, ना अनुसूची, ना किसी संवैधानिक परिभाषा में. भारत का संविधान केवल इन पदों को मान्यता देता है. प्रदेश में राज्यपाल की नियुक्ति अनुच्छेद 153, मुख्यमंत्री 164 ओर मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) अनुच्छेद 163-164 का उल्लेख है. Deputy Chief Minister नाम का कोई पद संविधान में मौजूद नहीं है.
फिर उप मुख्यमंत्री बनते कैसे हैं?
यह पूरी तरह से राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था का नतीजा है, न कि संवैधानिक प्रावधान. उप मुख्यमंत्री असल में कैबिनेट मंत्री ही होता है. मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल उसे मंत्री बनाते हैं (अनुच्छेद 164). मुख्यमंत्री चाहें तो किसी मंत्री को 'डिप्टी सीएम' का दर्जा दे देते हैं. यानी यह पद कानून से नहीं, राजनीति से पैदा हुआ है. उसी के तहत देवेंद्र फडणवीस ने सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम नियुक्त किया है. इससे पहले सुनेत्रा के पति अजित पवार को फडणवीस ने डिप्टी सीएम बनाया था. प्लेन क्रैश में निधन के बाद सुनेत्रा पवार को यह जिम्मेदारी सीएम ने सौपी गई है.
डिप्टी सीएम के लिए किस अनुच्छेद का दिया जाता है गलत उदारहण
अक्सर लोग कहते हैं अनुच्छेद 164 में डिप्टी सीएम का जिक्र है. पर ऐसा है नहीं. अनुच्छेद 164 सिर्फ यह कहता है कि मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री होंगे. उन्हें राज्यपाल नियुक्त करेगा. मंत्री सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति जिम्मेदार होंगे.
उप मुख्यमंत्री को कोई विशेष अधिकार मिलते हैं?
संवैधानिक तौर किसी भी राज्य के उप मुख्यमंत्री को कोई विशेष अधिकार नहीं मिलते हैं. उप मुख्यमंत्री के अधिकार वहीं होते हैं जो उसके विभाग से जुड़े हों. मुख्यमंत्री अनुपस्थित हो तो भी डिप्टी सीएम अपने-आप सीएम नहीं बन जाता. सब कुछ मुख्यमंत्री के आदेश और राजनीतिक सहमति पर निर्भर करता है.
फिर, भारत में डिप्टी सीएम की परंपरा क्यों?
यह शुद्ध देसी राजनीति का नतीजा है. जैसे गठबंधन में लड्डू बांटना जैसा, यानी प्रभावी गुट के प्रमुख को संतुष्ट करना. इसके पीछे वजह गठबंधन सहयोगी को संतुलित करना, बड़े जातीय/क्षेत्रीय नेता को संतुष्ट करना, सत्ता साझेदारी का संकेत देना है. इसलिए, यह देखने को मिलता है कि महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्यों में एक से ज्यादा डिप्टी सीएम तक बने हैं.
सुप्रीम कोर्ट का नजरिया क्या है?
सुप्रीम कोर्ट भी साफ कह चुका है कि Deputy Chief Minister एक संवैधानिक पद नहीं है, केवल राजनीतिक पदनाम है.
भारत के किस राज्य में सबसे पहले डिप्टी CM बनाए गए
भारत में सबसे पहले डिप्टी सीएम (उपमुख्यमंत्री) बिहार में बनाए गए थे. स्वतंत्रता के बाद, बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में अनुग्रह नारायण सिन्हा को भारत का पहला डिप्टी सीएम बनाया गया था. डिप्टी सीएम के पद का जिक्र संविधान में नहीं है, लेकिन बिहार से ही इस परंपरा की शुरुआत हुई थी. 1967 के बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में यह पद अपनाए गए.





