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अगर साथ आए NCP के दोनों धड़े तो क्या NDA से कंधे से कंधा मिलाएंगे शरद पवार! इन चार नामों में किसे मिलेगी Full Power?

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक ही सवाल गूंज रहा है. अगर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों धड़े फिर से एक हो जाते हैं, तो क्या शरद पवार एनडीए के साथ कंधे से कंधा मिलाते नजर आएंगे? अजीत पवार के खेमे के जरिए एनडीए से जुड़ी राजनीति और शरद पवार की पारंपरिक विपक्षी भूमिका के बीच अब पार्टी किस दिशा में जाएगी, यही सबसे बड़ा सवाल बन चुका है.

अगर साथ आए NCP के दोनों धड़े तो क्या NDA से कंधे से कंधा मिलाएंगे शरद पवार! इन चार नामों में किसे मिलेगी Full Power?
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( Image Source:  ANI )

एनसीपी (NCP) के संभावित एकीकरण ने महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है. अगर दोनों धड़े साथ आते हैं, तो पार्टी का एनडीए की ओर झुकाव तय माना जा रहा है या फिर शरद पवार अपनी रणनीतिक चतुराई से अलग राह चुनेंगे? इसी के साथ सबसे अहम मुद्दा है, पार्टी में ‘फुल पावर’ किसे मिलेगी. क्या संगठन की कमान सुनेत्रा पवार संभालेंगी, क्या सुप्रिया सुले को विरासत का फायदा मिलेगा, या फिर अनुभव के दम पर प्रफुल्ल पटेल सबसे मजबूत दावेदार बनेंगे? इन चार नामों के इर्द-गिर्द घूमती यह सियासी शतरंज महाराष्ट्र की राजनीति की अगली चाल तय करेगी.

दरअसल, प्लेन क्रैश में अजित पवार ने एनसीपी के दोनों गुट के विलय का प्लान तैयार किया था. यही वजह है कि पूर्व डिप्टी सीएम अजित की मौत के बाद कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट का फिर से एक होने के आसार हैं. दिसंबर और जनवरी में चाचा शरद पवार के साथ कई बैठकें की थीं. दोनों नेताओं को स्थानीय निकाय चुनावों के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विलय की औपचारिक घोषणा करनी थी. दोनों गुटों के नेताओं के अगले सप्ताह विलय को अंतिम रूप देने के लिए मिलने की उम्मीद है.

किसकी भूमिका अहम

सूत्रों के मुताबिक NCP (अजीत पवार) गुट के कुछ नेता तुरंत विलय नहीं चाहते हैं, क्योंकि उनका मानना ​​है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है. जबकि शरद पवार गुट के लोग तुरंत विलय चाहते हैं. बताया जा रहा है कि विलय प्रक्रिया में सुनेत्रा पवार यानी अजित पवार की पत्नी अहम भूमिका निभाएंगी.

दरअसल, महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर करवट लेती दिख रही है. अब विलय की चर्चा के बीच पार्टी की सबसे बड़ी कुर्सी यानी अध्यक्ष पद को लेकर नई जंग भी शुरू हो चुकी है. शरद पवार की विरासत, अजीत पवार की राजनीतिक छाया और संगठन पर पकड़ रखने वाले नेताओं के बीच अब सवाल यही है कि एनसीपी की गद्दी किसके हाथ जाएगी? शरद पवार, सुनेत्रा पवार, सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल समेत चार नामों की चर्चा ने इस सियासी घटनाक्रम को और भी दिलचस्प बना दिया है.

एनसीपी के दोनों गुट में कैसे पिघली बर्फ

दोनों गुट के बीच एकीकरण की राह स्वयं अजित पवार तैयार कर गए हैं. अब इसकी फरवरी के दूसरे सप्ताह में इसकी औपचारिक घोषणा होने की उम्मीद है. शरद पवार और अजीत पवार के बीच लगातार बैठकों के बाद पार्टी के विलय की जमीन तैयार हुई. स्थानीय निकाय चुनावों के बाद संयुक्त घोषणा की योजना थी, लेकिन अजित पवार की प्लेन क्रैश में निधन से इसकी गति तेज कर दी है.

अजीत की पहल: विलय की राह में क्यों मानी जा रही अहम

एनसीपी सूत्रों के अनुसार अजीत पवार ने दिसंबर-जनवरी में हाई-लेवल बैठकों के जरिए एनसीपी को फिर एक करने पर जोर दिया था.

सुनेत्रा पवार की भूमिका क्यों मानी जा रही निर्णायक

एनसीपी के एक वर्ग में मांग उठी है कि सुनेत्रा पवार को पार्टी अध्यक्ष और विधायक दल नेता बनाया जाए, जिससे संगठन को स्थिरता मिले. सूत्रों के मुताबिक NCP (अजीत पवार) गुट के कुछ नेता तुरंत विलय नहीं चाहते हैं, क्योंकि उनका मानना ​​है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है. जबकि शरद पवार गुट के लोग तुरंत विलय चाहते हैं. बताया जा रहा है कि विलय प्रक्रिया में सुनेत्रा पवार यानी अजित पवार की पत्नी अहम भूमिका निभाएंगी.

सुप्रिया सुले बनाम प्रफुल्ल पटेल: संगठन और अनुभव की जंग

जहां सुप्रिया सुले को पारिवारिक विरासत का चेहरा माना जा रहा है, वहीं प्रफुल्ल पटेल को संगठनात्मक अनुभव का मजबूत दावेदार कहा जा रहा है.

एनसीपी गठन और टूट की कहानी: 1999 से 2023 तक

मराठा क्षत्रप शरद पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होने के बाद NCP की स्थापना की थी. उनके भतीजे, अजीत पवार ने जुलाई 2023 में पार्टी के खिलाफ विद्रोह किया और उनका गुट सत्तारूढ़ महायुति में शामिल हो गया. शरद पवार के कई करीबी सहयोगी, जैसे प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और दिलीप वलसे-पाटिल भी अजीत पवार के खेमे में शामिल हो गए थे.

28 जनवरी 2026 को अजीत पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई. जब पुणे जिले के बारामती एयरपोर्ट पर एक टेबलटॉप रनवे के किनारे से लगभग 100 मीटर दूर उनका विमान क्रैश हो गया. अधिकारियों के अनुसार, खराब विजिबिलिटी के बीच दूसरी लैंडिंग की कोशिश के दौरान विमान में आग लग गई. पवार के अलावा, विमान में सवार जिन लोगों की मौत हुई, उनमें दो पायलट - सुमित कपूर और शाम्भवी पाठक, पवार के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर विदीप जाधव और एक फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली शामिल थे.

अजित की थी अंतिम इच्छा - अनिल देशमुख

एनसीपी-एससीपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा, "अजित पवार एनसीपी के दोनों गुटों का विलय चाहते थे. जयंत पाटिल ने भी बैठकें कीं. नगर निगम चुनाव के बाद हम फैसला लेंगे. अजीत दादा की इच्छा के अनुसार एनसीपी के दोनों गुटों को एक साथ आना होगा. यह उनकी अंतिम इच्छा थी, इसलिए उसी के अनुसार कदम उठाए जाने चाहिए।"

उनकी मौत पर दुख जताते हुए, NCP नेता अंकुश काकडे ने याद किया कि अजीत पवार पिछले महीने अपने चाचा शरद पवार को उनके जन्मदिन (12 दिसंबर) पर 'गिफ्ट' के तौर पर दोनों गुटों को मिलाना चाहते थे, लेकिन उस समय यह विलय नहीं हो पाया. सीनियर NCP (SP) नेता जयंत पाटिल ने भी मीडिया से बातचीत में बताया था कि अजीत पवार ने फिर से एक होने पर जोर दिया था. इसी के लिए 16 और 17 जनवरी को हाई-लेवल मीटिंग्स की थीं.

महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या होगा असर?

एनसीपी का एकीकरण से महायुति और विपक्षी खेमे में सियासी समीकरण बदल सकता है. खासकर आगामी चुनावों से पहले.

कब होगी औपचारिक घोषणा

सूत्रों के अनुसार फरवरी के दूसरे सप्ताह में दोनों गुटों की संयुक्त बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए विलय का ऐलान संभव है.

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