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विलय से पहले कुर्सी पक्की : NCP ने सुनेत्रा पवार को पहले डिप्टी CM के लिए क्यों चुना, क्या यही है पार्टी की नई रणनीति?

एनसीपी में एका की चर्चाओं के बीच सुनेत्रा पवार ने पहले डिप्टी CM बनना क्यों चुना? क्या यह पार्टी की नई रणनीति है और एनसीपी के दोनों गुटों में विलय की संभावना बची है?

एनसीपी सुनेत्रा पवार
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( Image Source:  sunetra pawar facebook )

महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को एनसीपी ने विधायक दल का नेता चुन लिया. आज शाम में वह उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकती हैं. इस बात के भी संकेत मिले हैं कि अब महायुति की घटक दल एनसीपी आज अपने नए अध्यक्ष का भी चुनाव भी कर सकती है. वहीं, एनसीपी में एका की अटकलों के बीच सुनेत्रा पवार का अचानक डिप्टी मुख्यमंत्री बनने का फैसला महज एक औपचारिकता नहीं माना जा रहा. जिस वक्त पार्टी के दोनों धड़ों के बीच संवाद, सुलह और संभावित विलय की चर्चा तेज थी, उसी वक्त सत्ता के एक अहम संवैधानिक पद पर सुनेत्रा पवार की ताजपोशी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है. क्या यह फैसला एनसीपी की नई रणनीति का हिस्सा है, जिसमें पहले सत्ता और बाद में संगठनात्मक एका की राह चुनी गई?

दरअसल, सुनेत्रा पवार का डिप्टी CM बनना केवल व्यक्तिगत या पारिवारिक उत्तराधिकार का मामला नहीं, बल्कि एनसीपी की बदलती रणनीति का संकेत है. यह कदम या तो विलय से पहले शक्ति-संतुलन साधने की कोशिश है, या फिर एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत. जहां एका की शर्तें सत्ता के आधार पर तय होंगी. महाराष्ट्र के सियासी हल्के में भी इस बात की भी चर्चा है कि बीजेपी और सीएम देवेंद्र फडणवीस सरकार की स्थिरता के लिहाज से भी यही सबसे बेहतर विकल्प है.

देवेंद्र ने क्या कहा था?

एक दिन पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में पत्रकारों से कहा था कि सत्तारूढ़ गठबंधन 'महायुति' का नेतृत्व करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) दिवंगत अजित पवार के परिवार और पार्टी द्वारा लिए गए किसी भी फैसले का समर्थन करेगी.

अचानक डिप्टी CM बनने का फैसला क्यों?

एनसीपी में एका की बातचीत एक लंबी और अनिश्चित प्रक्रिया मानी जा रही है. ऐसे में सुनेत्रा पवार का पहले सरकार में शीर्ष पद स्वीकार करना सत्ता में पार्टी की मौजूदगी को तुरंत सुरक्षित करने का कदम माना जा रहा है.

सत्ता के जरिए विलय की जमीन तैयार करने की कोशिश तो नहीं!

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि डिप्टी CM पद पर रहते हुए सुनेत्रा पवार संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर संवाद की भूमिका निभा सकती हैं, जिससे विलय की बातचीत को व्यावहारिक दिशा मिल सके.

अजित पवार के बाद खाली जगह को भरना

अजित पवार के बाद एनसीपी के सत्ता-केंद्र में एक स्पष्ट नेतृत्व चेहरे की जरूरत थी. सुनेत्रा पवार का आगे आना इस खालीपन को भरने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

क्या विलय की संभावना अब भी बची है?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डिप्टी CM बनने के बावजूद विलय का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. हालांकि, अब इसकी शर्तें और टाइमिंग बदल सकती हैं, क्योंकि सत्ता में मजबूत स्थिति किसी भी बातचीत में पार्टी की सौदेबाजी ताकत बढ़ाती है.

NCP की नई रणनीति: पहले सरकार, फिर संगठन?

एनसीपी की मौजूदा चाल को पहले सत्ता, फिर संगठन के फॉर्मूले के तौर पर देखा जा रहा है. यानी पहले सरकार में निर्णायक भूमिका, फिर पार्टी की संरचना और एका पर फैसला.

शरद पवार का बयान, अजित की इच्छा को बनाए रखने जैसा

सुनेत्रा पवार को आज डिप्टी सीएम पद पर शपथ लेने की चर्चा को लेकर शरद पवार ने कहा कि उन्हें सुनेत्रा पवार के यह अहम पद संभालने के बारे में जानकारी नहीं थी, और उन्होंने कहा कि वह इस पर हुई चर्चा का हिस्सा नहीं थे. जैसा कि पार्टी सूत्रों ने कहा कि सुनेत्रा पवार को दिन में बाद में शपथ लेने से पहले NCP विधायक दल का नेता चुने जाने की संभावना है, अजीत के चाचा शरद ने कहा कि उन्हें सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री नियुक्त करने की कथित योजना के बारे में जानकारी नहीं है.

शरद पवार ने शनिवार सुबह दावा किया था कि अजीत पवार दोनों NCP गुटों के विलय के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे थे और उन्होंने तो 12 फरवरी को फिर से एक होने की संभावित तारीख के रूप में भी प्रस्तावित किया था.

सुनेत्रा पवार का कोई विरोध नहीं - प्रफुल्ल पटेल

वरिष्ठ NCP नेता प्रफुल्ल पटेल ने शुक्रवार को कहा कि NCP विधायक दल के नेता के तौरकोई विरोध नहीं है. उन्होंने कहा कि अजित पवार के निधन से एनसीपी में तीन पद खाली हुए. आज एनसीपी संसदीय दल की बैठक में सुनेता पवार को विधायक दल का नेता और डिप्टी सीएम चुनी जाएंगे. पार्टी का अध्यक्ष पद फिलहाल कोई बड़ा मुद्दा नहीं है.

गठबंधन में संतुलन की कवायद

एनसीपी का यह कदम गठबंधन में संतुलन और पार्टी की सत्ता स्थिति को मजबूत रखने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है. ताकि किसी और गुट की अप्रत्याशित बढ़त न हो. सुनेत्रा पवार को NCP और गठबंधन सरकार में इस भूमिका में लाने का मुख्य कारण अचानक सत्ता रिक्तता, पार्टी में एकजुटता दिखाना और सरकार की स्थिरता को बनाना है.

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