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राजनीति से दूरी, अब डिप्टी सीएम की कुर्सी: सुनेत्रा फैक्टर से बदल रही NCP की पावर जियोमेट्री, 'अग्निपरीक्षा' बाकी

एनसीपी नेतृत्व ने दिवंगत अजित पवार के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को आगे बढ़ाया है. सामाजिक कार्यों से राजनीति तक का उनका सफर अब उन्हें महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने की दहलीज पर ले आया है. सीमित राजनीतिक अनुभव, पार्टी के अंदरूनी समीकरण और पवार परिवार की विरासत, इन सबके बीच सुनेत्रा पवार के सामने खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है.

Sunetra Pawar Set to Carry Forward Ajit Pawar’s Political Legacy in Maharashtra
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अजित पवार की विरासत संभालेंगी सुनेत्रा पवार, महाराष्ट्र को मिलेगी पहली महिला डिप्टी सीएम

( Image Source:  ANI )

Sunetra Pawar Profile, Maharashtra’s First Woman Deputy CM: महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है. एनसीपी नेतृत्व ने अजित पवार के निधन के बाद पैदा हुए राजनीतिक शून्य को भरने के लिए उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार पर भरोसा जताया है. 63 वर्षीय राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार शनिवार को महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने जा रही हैं. चार दशक से अधिक समय से पवार परिवार का हिस्सा रहीं सुनेत्रा अब तक सक्रिय राजनीति से दूर रही थीं, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें सत्ता के केंद्र में ला खड़ा किया है.

सुनेत्रा पवार का जन्म 1963 में उस्मानाबाद (अब धाराशिव) जिले में एक मराठा राजनीतिक परिवार में हुआ. उनके पिता बाजीराव पाटिल स्थानीय राजनीति में जाना-पहचाना नाम थे, जबकि उनके भाई पद्मसिंह बाजीराव पाटिल 1980 के दशक में जिले के प्रभावशाली नेता बने. इस तरह राजनीति से उनका जुड़ाव विवाह से पहले ही बन चुका था. उन्होंने 1983 में औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) के एस.बी. आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की. दिसंबर 1985 में उनका विवाह अजित पवार से हुआ, जो उसी साल की शुरुआत में पहली बार मिले थे.


लंबे समय तक राजनीति से बनाई दूरी

राजनीति से दूरी बनाए रखते हुए सुनेत्रा पवार ने लंबे समय तक सामाजिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया. बारामती के पास पवार परिवार के पैतृक गांव कठेवाड़ी में उन्होंने स्वच्छता अभियान की अगुवाई की. खुले में शौच और गंदगी की समस्या को देखकर उन्होंने खुद गांव में सफाई अभियानों में हिस्सा लिया और घर-घर शौचालय बनवाने के लिए लोगों को प्रेरित किया.


कठेवाड़ी को 2006 में मिला ‘निर्मल ग्राम’ का दर्जा

2006 में कठेवाड़ी को केंद्र सरकार से ‘निर्मल ग्राम’ का दर्जा मिला. इसके बाद कठेवाड़ी एक मॉडल इको-विलेज के रूप में विकसित हुआ, जहां सोलर स्ट्रीटलाइट, बायोगैस प्लांट, कचरा प्रबंधन और जैविक खेती को बढ़ावा दिया गया. गांव को संत गाडगेबाबा स्वच्छता अभियान समेत कई पुरस्कार मिले. भूमि रिकॉर्ड में पिता के साथ मां का नाम जोड़ना और महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन देना भी इसी पहल का हिस्सा रहा. साल 2008 में सुनेत्रा पवार बारामती हाई-टेक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना से भी जुड़ी रहीं. 65 एकड़ में फैला यह प्रोजेक्ट, केंद्र सरकार की स्कीम के तहत मंजूर हुआ और आज इसमें 15,000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है.वह इस परियोजना की चेयरपर्सन रहीं.


राजनीति में कैसे हुई सुनेत्रा पवार की एंट्री?

सुनेत्रा पवार ने सक्रिय राजनीति में कदम 2024 के लोकसभा चुनाव से रखा, जब अजित पवार ने उन्हें बारामती से एनसीपी (अजित गुट) की उम्मीदवार बनाया. उन्हें बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन मिला. मुकाबला था उनकी ननद और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले से... यह चुनाव पवार परिवार और एनसीपी के भीतर गहरे विभाजन का प्रतीक बन गया. हालांकि, सुनेत्रा को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद कुछ ही महीनों बाद उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया, जिसे बारामती की हार के बाद अजित पवार द्वारा उन्हें औपचारिक राजनीतिक भूमिका देने की कोशिश माना गया. जून 2024 में शपथ लेने के बाद से उनकी राज्यसभा उपस्थिति लगभग 69% रही है. उन्होंने चार बहसों में हिस्सा लिया है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है.


सुनेत्रा पवार से जुड़े विवाद

विवादों की बात करें तो 2009 में सुनेत्रा पवार के भाई पद्मसिंह पाटिल का नाम 2006 में कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर की हत्या मामले में सामने आया था. यह मामला अब भी अदालत में लंबित है. सुनेत्रा का नाम महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक मामले की शुरुआती जांचों में भी सामने आया था, क्योंकि कुछ चीनी मिलों से जुड़ी कंपनियों से उनके संबंध बताए गए थे. 2021 में ईडी ने अजित और सुनेत्रा पवार से जुड़ी कंपनियों की कुछ संपत्तियां अटैच की थीं, हालांकि एजेंसी की चार्जशीट में दोनों का नाम आरोपी के रूप में नहीं था. अप्रैल 2024 में मुंबई पुलिस की ईओडब्ल्यू ने उन्हें क्लीन चिट दे दी.


सुनेत्रा की होगी 'अग्निपरीक्षा'

सुनेत्रा पवार का स्वभाव सौम्य है और उनका राजनीतिक अनुभव सीमित रहा है. उपमुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं के साथ काम करना होगा, जो वर्षों से संगठन और सरकार में प्रभावशाली भूमिका निभाते आए हैं. अगर एनसीपी के दोनों गुटों में सुलह होती है, तो शरद पवार की भूमिका मार्गदर्शक की हो सकती है. अन्यथा, उन्हें अपने बेटों पार्थ पवार और जय पवार के साथ-साथ पार्टी के उन नेताओं को भी साधना होगा, जिन्होंने अब तक सत्ता में बने रहने के लिए अलग-अलग राजनीतिक पाले बदले हैं. सुनेत्रा पवार के सामने चुनौती सिर्फ पद संभालने की नहीं, बल्कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की भी होगी.



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