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क्या AAP की वजह से पंजाब-गुजरात-गोवा और हरियाणा हारी कांग्रेस? आंकड़ों पर कितना खरा उतरता है खरगे का बयान

खरगे ने AAP पर गुजरात और गोवा में कांग्रेस के वोट काटने का आरोप लगाया. जानिए पंजाब, हरियाणा समेत चार राज्यों के चुनावी आंकड़े इस दावे के बारे में क्या बताते हैं.

क्या AAP की वजह से पंजाब-गुजरात-गोवा और हरियाणा हारी कांग्रेस? आंकड़ों पर कितना खरा उतरता है खरगे का बयान
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जब भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव होता है तो उसका परिणाम आने के बाद अक्सर सवाल उठता है कि विपक्षी वोट बंटने से किसे फायदा हुआ? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर कुछ ऐसा ही आरोप लगाया है. उनका आरोप है कि AAP उन राज्यों में चुनाव लड़ती है, जहां कांग्रेस जीतने की स्थिति में होती है. इससे कांग्रेस के वोट बंटते हैं और बीजेपी को फायदा पहुंचता है.

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुजरात और गोवा का उदाहरण भी दिया. लेकिन पंजाब और हरियाणा के चुनावी नतीजे इस दावे से अलग कहानी कहते हैं. कहीं AAP कांग्रेस को पीछे छोड़कर सत्ता में पहुंची, तो कहीं उसके वोट कांग्रेस की हार के अंतर से ज्यादा रहे. ऐसे में चारों राज्यों के आंकड़ों से समझते हैं कि खरगे के आरोप में कितना दम है.

कब और कहां खरगे ने AAP को बताया हार की वजह?

मल्लिकार्जुन खरगे ने 4 नवंबर 2026 को पंजाब के संगरूर में कांग्रेस की इंसाफ रैली के दौरान AAP पर निशाना साधा. उन्होंने आम आदमी पार्टी को बीजेपी की बी टीम बताते हुए कहा, "जहां कांग्रेस जीतती है, वहीं जाकर ये ठहरते हैं. गुजरात हम जीत रहे थे, वहां टांग मार दी. उसी तरह गोवा हम जीत रहे थे, वहां आए टांग मारे."

खरगे का आरोप था कि AAP के चुनाव लड़ने से कांग्रेस के वोट बंटते हैं और बीजेपी को फायदा होता है. यह बयान पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आया है.

गुजरात में AAP के 12.9% वोट, कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका?

गुजरात में 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 41.44 प्रतिशत वोट और 77 सीटें मिली थीं. बीजेपी ने 49.05 प्रतिशत वोट के साथ 99 सीटें जीती थीं. उस चुनाव में AAP को महज 0.10 प्रतिशत वोट मिले थे. लेकिन 2022 में AAP का वोट प्रतिशत बढ़कर 12.94 हो गया और पार्टी ने पांच सीटें जीत लीं. दूसरी तरफ कांग्रेस का वोट प्रतिशत घटकर 27.33 रह गया और उसकी सीटें 17 हो गईं. यानी कांग्रेस के वोट शेयर में करीब 14.1 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई.

यानी AAP के कारण कांग्रेस के वोट बंटने की बात सामने आई. गुजरात की करीब 30 सीटों पर AAP दूसरे स्थान पर रही. कई सीटों पर कांग्रेस और AAP के संयुक्त वोट बीजेपी के वोटों से ज्यादा थे. ऐसे में गुजरात के आंकड़े खरगे के आरोप को आधार जरूर देते हैं, लेकिन यह साबित नहीं करते कि AAP के सभी वोट कांग्रेस को मिलते तो नतीजे बदल जाते.

गोवा में AAP के वोट बढ़े, लेकिन TMC और क्षेत्रीय दल भी थे मैदान में

गोवा में 2017 के चुनाव में कांग्रेस को 28.4 प्रतिशत वोट और 17 सीटें मिली थीं. बीजेपी को 32.5 प्रतिशत वोट और 13 सीटें मिलीं. वहीं AAP को 6.3 प्रतिशत वोट मिले, लेकिन वह कोई सीट नहीं जीत सकी. 2022 में कांग्रेस का वोट प्रतिशत घटकर 23.5 रह गया और सीटें 11 हो गईं. AAP का वोट प्रतिशत बढ़कर 6.8 हो गया और पार्टी ने दो सीटें जीतीं.

यहां AAP के अलावा तृणमूल कांग्रेस और रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी जैसे दल भी चुनाव मैदान में थे. इसलिए विपक्षी वोटों का बंटना कांग्रेस के लिए चुनौती जरूर बना, लेकिन पूरे नुकसान का जिम्मेदार अकेले AAP को नहीं माना जा सकता.

पंजाब में AAP ने वोट नहीं काटे, कांग्रेस का विकल्प बनकर उभरी

पंजाब में 2017 में कांग्रेस ने 38.5 प्रतिशत वोट के साथ 77 सीटें जीती थीं. AAP को 23.72 प्रतिशत वोट और 20 सीटें मिली थीं. 2022 में AAP का वोट प्रतिशत बढ़कर 42.01 हो गया और उसने 92 सीटें जीत लीं. कांग्रेस 22.98 प्रतिशत वोट के साथ सिर्फ 18 सीटों पर सिमट गई.

पंजाब में AAP को सिर्फ वोट काटने वाली पार्टी कहना सही नहीं होगा. उसने मजबूत जनाधार बनाया और कांग्रेस की सत्ता को सीधे चुनौती दी. कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और तत्कालीन सरकार के खिलाफ नाराजगी भी चुनावी नतीजों के विश्लेषण में महत्वपूर्ण पहलू हैं. पंजाब में AAP की भूमिका गुजरात जैसी नहीं थी.

हरियाणा में AAP के 1.79% वोट, क्या इतने से बदल सकता था नतीजा?

हरियाणा में 2017 और 2022 में विधानसभा चुनाव नहीं हुए थे. 2024 के चुनाव में बीजेपी को 39.94 प्रतिशत, कांग्रेस को 39.09 प्रतिशत और AAP को 1.79 प्रतिशत वोट मिले. AAP को कुल 2.48 लाख से ज्यादा वोट मिले, लेकिन एक भी सीट नहीं मिली.

कुछ सीटों पर AAP के वोट कांग्रेस की हार के अंतर से ज्यादा थे. पुंडरी में कांग्रेस 2,197 वोटों से हारी, जबकि AAP को 2,571 वोट मिले. असंध में हार का अंतर 2,306 और AAP के वोट 4,290 थे. उचाना कलां में कांग्रेस महज 32 वोटों से हारी, जबकि AAP को 2,495 वोट मिले. ऐसे में AAP की मौजूदगी को पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं कहा जा सकता. लेकिन कांग्रेस के वोट बंटने के अलावा निर्दलीय उम्मीदवारों और दूसरे दलों की भूमिका भी देखनी होगी.

चार राज्यों के नतीजे खरगे के दावे के बारे में क्या बताते हैं?

गुजरात में AAP की बढ़ी मौजूदगी के साथ कांग्रेस का वोट प्रतिशत तेजी से गिरा. गोवा में भी विपक्षी वोटों का बंटवारा हुआ, लेकिन वहां कई दूसरी पार्टियां भी थीं. पंजाब में AAP खुद एक बड़ी चुनावी ताकत बनकर उभरी और हरियाणा में कुछ सीटों पर उसके वोट जीत के अंतर से ज्यादा रहे.

खरगे के बयान को चारों राज्यों पर एक जैसा लागू नहीं किया जा सकता. चुनावी आंकड़े गुजरात और हरियाणा की कुछ सीटों पर उनके आरोप को आधार देते हैं, लेकिन पंजाब और गोवा की पूरी राजनीतिक तस्वीर इससे कहीं ज्यादा व्यापक है. सबसे अहम बात यह है कि AAP को मिले वोटों को सीधे कांग्रेस के खाते में जोड़कर चुनावी नतीजों का अनुमान नहीं लगाया जा सकता. मतदाता किसे वोट देता, यह केवल चुनावी आंकड़ों से तय नहीं किया जा सकता.

स्टेट मिरर स्पेशलराहुल गांधी
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