'बाबा को कुछ... सियासी गुरु न बनें', धीरेंद्र शास्त्री पर क्यों भड़के अखिलेश के करीबी उदयवीर सिंह?
राम-कृष्ण पर बयान को लेकर धीरेंद्र शास्त्री विवादों में हैं. उदयवीर सिंह ने उन पर बीजेपी के इशारे पर सियासत करने का आरोप लगाया. अखिलेश ने कार्यक्रमों पर रोक की मांग की.
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण को लेकर दिया गया बयान अब धार्मिक विवाद पर सियासी बहस थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस मामले में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी और पार्टी नेता उदयवीर सिंह ने अब धीरेंद्र शास्त्री पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने बाबा पर बीजेपी के इशारे पर हिंदू-मुस्लिम राजनीति करने का आरोप लगाया है. उदयवीर ने बिहार और पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए कहा कि अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यहां पर भी हिंदुओं को एकजुट करने के लिए इसी तरह की कोशिश की जा रही है.
सपा नेता उदयवीर सिंहस ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को राजनीतिक गुरु नहीं बनना चाहिए. आखिर उदयवीर सिंह ने बाबा पर और क्या आरोप लगाए और इस पूरे विवाद में अखिलेश यादव का क्या रुख है?
क्या बोले उदयवीर सिंह?
उदयवीर सिंह ने धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधते हुए कहा कि बाबा को कुछ आता-जाता नहीं है और जो मन में आता है, वही बोल देते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री बीजेपी के इशारे पर हिंदू-मुस्लिम राजनीति कर रहे हैं.
उदयवीर के मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री ने बिहार चुनाव में भी यही काम किया था और पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह की गतिविधियां देखने को मिलीं. अब उत्तर प्रदेश में हिंदुओं को एक तरफ लामबंद करने के लिए ऐसा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बाबा बीजेपी के इशारे पर राजनीतिक गुरु बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.
दो समाजों को बांटने का आरोप?
उदयवीर सिंह ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान दो समाजों के लोगों को बांटने की कोशिश हैं. उनका कहना था कि किसी भी धार्मिक संत या कथावाचक को ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हों.
उन्होंने साफ किया कि इस पूरे मामले में उनका रुख वही है, जो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का है. यानी पार्टी इस बयान को सामाजिक सौहार्द से जुड़ा मुद्दा मान रही है.
धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा?
विवाद की शुरुआत 29 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित रामकथा के दौरान हुई थी. वायरल वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के खड़े होने के स्वरूप की तुलना करते सुनाई दिए.
उन्होंने कहा था कि भगवान श्रीकृष्ण तीन जगह से मुड़े हुए दिखाई देते हैं, जबकि भगवान श्रीराम सीधे खड़े होते हैं. इसी दौरान उन्होंने कहा, "हमारे वाले भगवान खड़े भी होते हैं तो एकदम सीधे होते हैं, धाम भी सीधा है, अयोध्या. तुम्हारे वालों का नाम भी टेढ़ा है, चलते भी टेढ़े हैं और खड़े भी टेढ़े होते हैं."
इस टिप्पणी पर ब्रज क्षेत्र के कुछ संतों और यादव समाज के लोगों ने आपत्ति जताई. उनका कहना था कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों पूजनीय हैं. उनके स्वरूप की तुलना इस तरह करना उचित नहीं है.
बाबा ने माफी क्यों मांगी?
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर सफाई दी. उन्होंने कहा कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया है. वह खुद भगवान श्रीकृष्ण के भक्त हैं और उनका उद्देश्य राम और कृष्ण में भेद करना नहीं था.
उन्होंने अपनी बात को एक धार्मिक प्रसंग की व्याख्या बताते हुए कहा कि अगर किसी की भावना आहत हुई है तो वह इसके लिए क्षमा मांगते हैं. हालांकि, उनकी इस सफाई के बाद भी विवाद थमा नहीं.
अखिलेश की क्या मांग है?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले में धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने उनकी माफी को पर्याप्त नहीं माना और उनके कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग उठाई.
अखिलेश ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन से नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित धीरेंद्र शास्त्री के सार्वजनिक आयोजनों को अनुमति नहीं देने की अपील की है. इनमें अंबेडकरनगर, कुंडा, गोंडा, झांसी, लखनऊ और आगरा के कार्यक्रम शामिल हैं. कुंडा में राजा भैया की ओर से प्रस्तावित रामकथा को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है.
यूपी की राजनीति से कैसे जुड़ा?
उत्तर प्रदेश में यादव समाज को समाजवादी पार्टी का अहम समर्थक वर्ग माना जाता है. भगवान श्रीकृष्ण को यादव समाज का आराध्य माना जाता है. ऐसे में इस बयान पर अखिलेश यादव और उदयवीर सिंह की प्रतिक्रिया को सामाजिक और राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है.
उदयवीर ने जहां धीरेंद्र शास्त्री पर बीजेपी के इशारे पर राजनीति करने का आरोप लगाया है, वहीं अखिलेश यादव ने उनके कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की है. दूसरी ओर, धीरेंद्र शास्त्री अपनी टिप्पणी पर सफाई और माफी दे चुके हैं. फिलहाल धार्मिक बयान से शुरू हुआ यह विवाद अब संतों, यादव समाज, राजनीतिक दलों और उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित धार्मिक आयोजनों तक पहुंच गया है.




