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तेल-गैस-बाजार-सोना सब खाक! माथा पकड़ें या कोई जुगत लगाएं, ईरान जंग की मार कहां तक?
ईरान के हमलों और खाड़ी में बढ़ते तनाव से तेल-गैस सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है, जिससे शेयर बाजार में भारी गिरावट आई. हालांकि मजबूत डॉलर और ब्याज दरों के दबाव में सोना-चांदी भी गिर गए, जिससे बाजार में असमंजस की स्थिति बन गई है.
Iran War Impact on Oil Gas Share Market
( Image Source:
Sora_ AI )
Iran vs Israel War Impact on India Share Market and Oil Gas: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच 28 फरवरी से जंग जारी है. कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं है. 19 मार्च को जंग और तेज हो गई, जब ईरान ने कतर की रिफाइनरी (Ras Laffan) और अन्य खाड़ी देशों के तेल ठिकानों पर हमले किए. इस कारण शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है.
हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. ईरान-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल है. तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं.
Iran vs Israel US War का असर किन-किन क्षेत्रों पर पड़ रहा है?
1. तेल और गैस: सबसे बड़ी मार
- कीमतों में उछाल: खाड़ी के ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड $119 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है.
- आपूर्ति संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बाधा आने से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा खतरे में है.
- गैस की कीमतें: यूरोप में गैस की कीमतों में 35% तक की वृद्धि देखी गई है.
- अनुमान: कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा चला, तो तेल $200 प्रति बैरल तक भी जा सकता है.
2. शेयर बाजार: निवेशकों का डर
- भारी गिरावट: युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक बाजारों में करीब 5.5% की गिरावट आई है.
- भारतीय बाजार पर असर: भारतीय निवेशकों ने युद्ध की शुरुआत से अब तक करीब ₹34 लाख करोड़ की संपत्ति गंवाई है. निफ्टी और सेंसेक्स में भारी बिकवाली देखी गई है.
- सेक्टर पर प्रभाव: एविएशन, लॉजिस्टिक्स और पेंट जैसे तेल पर निर्भर उद्योगों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है, जबकि रक्षा (Defense) और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में तेजी है.
3. सोना: सुरक्षित ठिकाना या झांसा?
- रिकॉर्ड ऊंचाई: युद्ध की शुरुआत में सोना $5,300 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया था.
- मौजूदा स्थिति: वर्तमान में मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों के ऊंचे रहने की आशंका के कारण वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में कुछ ठहराव या गिरावट देखी जा रही है.
- भारत में भाव: डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी के कारण भारत में सोने की कीमतें ₹1,47,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई हैं.
क्या करें? (जुगत और बचाव के उपाय)
- घबराएं नहीं (Don't Panic): विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व (Fundamentals) मजबूत हैं.
- विविधीकरण (Diversification): अपने पोर्टफोलियो को केवल एक सेक्टर में न रखें. कैश और हाई-क्वालिटी बॉन्ड्स में लिक्विडिटी बनाए रखें.
- 'बाय द डिप' (Buy the Dip): रक्षा, ऊर्जा और आईटी जैसे क्षेत्रों में गिरावट के समय खरीदारी के अवसर तलाशें, लेकिन केवल अच्छी कंपनियों में.
- धैर्य रखें: ऐतिहासिक रूप से बाजार युद्ध जैसी घटनाओं के बाद 12-18 महीनों में उबर जाते हैं. घबराहट में पूरी होल्डिंग बेचना नुकसानदेह हो सकता है.
आज शेयर मार्केट, तेल और सोना-चांदी की कीमतों पर क्या असर हुआ?
1. शेयर बाजार में हाहाकार
- सेंसेक्स और निफ्टी: सेंसेक्स 2,497 अंक (3.26%) गिरकर 74,207 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 776 अंक टूटकर 23,002 के स्तर पर आ गया.
- निवेशकों का नुकसान: आज की गिरावट से निवेशकों के करीब ₹12 लाख करोड़ डूब गए हैं.
- कारण: कतर के गैस हब पर हमले से कच्चे तेल की कीमतें $119 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है।.
2. सोने-चांदी की कीमतों पर असर (क्रैश)
आमतौर पर युद्ध के समय सोना महंगा होता है, लेकिन आज कीमतों में भारी गिरावट देखी गई:
- सोना (Gold): MCX पर सोने की कीमतें 4-9% तक गिरकर ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गईं.
- चांदी (Silver): चांदी में ₹16,500 प्रति किलोग्राम से ज्यादा की भारी गिरावट आई, जिससे यह ₹2.31 लाख के स्तर पर आ गई.
- गिरावट की वजह: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने के संकेत और डॉलर की मजबूती ने सोने की चमक कम कर दी है. निवेशक नकदी (Cash) बचाने के लिए कीमती धातुओं में बिकवाली कर रहे हैं.
3. कतर रिफाइनरी पर हमला
- नुकसान: ईरान के मिसाइल हमले में कतर के Ras Laffan गैस प्लांट को 'व्यापक क्षति' पहुंची है, जिसे ठीक करने में 3 से 5 साल लग सकते हैं.
- वैश्विक प्रभाव: इससे कतर के कुल LNG निर्यात का 17% हिस्सा प्रभावित हुआ है, जिससे यूरोप में गैस की कीमतें 35% तक बढ़ गई हैं.




