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Share Marker Crash: सेंसेक्स 2500 अंक टूटा, निफ्टी भी लुढ़का; तेल 110 डॉलर पार, आखिर क्यों धराशायी हुआ बाजार?
आज शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स 2500 अंक से ज्यादा टूट गया. महंगा तेल, अमेरिका के फेड का सख्त रुख और HDFC Bank में गिरावट इसकी बड़ी वजह रहे. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से भी बाजार पर दबाव बना हुआ है.
शेयर बाजार में मचा हाहाकार
( Image Source:
Sora_ AI )
Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली, जहां BSE Sensex और Nifty 50 दोनों ही बड़े नुकसान के साथ बंद हुए. सेंसेक्स करीब 2,500 अंकों से ज्यादा टूटकर 74,207.24 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 776 अंक गिरकर 23,002.15 के स्तर पर आ गया.
बाजार में यह गिरावट कई बड़े ग्लोबल और घरेलू कारणों के चलते आई. सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve के सख्त रुख का रहा.
शेयर मार्केट क्यों हुआ क्रैश?
- कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. Strait of Hormuz बंद होने और कतर के गैस हब पर हमलों से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है, जिससे बाजार में घबराहट बढ़ी.
- फेड के फैसले से बाजार में डर: अमेरिका के फेड चेयरमैन Jerome Powell ने ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं की और महंगाई को लेकर चिंता जताई. इससे निवेशकों को संकेत मिला कि आने वाले समय में पैसा महंगा बना रहेगा, जिसका असर शेयर बाजार पर पड़ा.
- HDFC Bank के शेयरों में भारी गिरावट: बाजार पर एक बड़ा दबाव HDFC Bank के शेयरों से भी आया, जो करीब 8% तक टूट गए. बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ी, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर असर पड़ा.
- ग्लोबल मार्केट्स का निगेटिव संकेत: अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली. S&P 500, नैस्डैक और डाउ जोन्स सभी गिरावट के साथ बंद हुए. एशिया में जापान और हांगकांग के बाजार भी लाल निशान में रहे.
- विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार 14 दिनों से भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं. बुधवार को ही उन्होंने 2,700 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच दिए, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया.
- रुपये पर भी दबाव: भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 92.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया. बढ़ते आयात बिल और महंगे तेल के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है.
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट तनाव, महंगा कच्चा तेल, फेड की सख्ती और घरेलू कारणों ने मिलकर बाजार में बड़ी गिरावट ला दी. इसके साथ ही रुपया भी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हो गया है.




