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जनवरी में खुलेगा IPOs का पिटारा, Tata Capital–LG Electronics जैसी कंपनियों के निवेशकों के लिए क्यों बजी खतरे की घंटी?

जनवरी 2026 में IPO लॉक-इन खत्म होने से शेयर बाजार में बड़ी मात्रा में स्टॉक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगे. नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 106 कंपनियों के शेयर लॉक-इन से बाहर आएंगे, जिनकी वैल्यू 24–26 अरब डॉलर है. Tata Capital, LG Electronics और HDB जैसी कंपनियों पर खास नजर रखने की जरूरत है. अचानक सप्लाई बढ़ने से कुछ स्टॉक्स पर दबाव बन सकता है.

जनवरी में खुलेगा IPOs का पिटारा, Tata Capital–LG Electronics जैसी कंपनियों के निवेशकों के लिए क्यों बजी खतरे की घंटी?
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( Image Source:  Sora_ AI )

IPOs lock-in expiry January 2026 Tata Capital: 2026 की शुरुआत भले ही नए IPOs की हलचल के साथ हो रही हो, लेकिन शेयर बाजार में पहले से लिस्टेड कंपनियों में निवेश करने वालों के लिए जनवरी महीना बेहद अहम साबित हो सकता है. वजह है - IPO लॉक-इन पीरियड का खत्म होना, जिससे बाजार में बड़ी मात्रा में शेयर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे. Nuvama Alternative & Quantitative Research की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 106 कंपनियों में प्री-लिस्टिंग शेयरहोल्डर्स का लॉक-इन खत्म होगा. इन शेयरों की कुल अनुमानित वैल्यू 24–26 अरब डॉलर के बीच है.

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अकेले जनवरी 2026 में ही बड़ी संख्या में कंपनियों के शेयर लॉक-इन से बाहर आएंगे, जिनमें Tata Capital, LG Electronics India, HDB Financial Services जैसी हाई-प्रोफाइल कंपनियां शामिल हैं. हालांकि, नुवामा का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि सारे शेयर बाजार में बिकने ही आ जाएंगे. इन शेयरों का बड़ा हिस्सा प्रमोटर्स और प्रमोटर ग्रुप्स के पास है, जो आमतौर पर लंबी अवधि के लिए अपनी हिस्सेदारी बनाए रखते हैं. फिर भी, इतनी बड़ी सप्लाई की संभावित एंट्री शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकती है.

नुवामा की रिसर्च से 3 अहम संकेत

1- सप्लाई शॉक का खतरा

कुछ कंपनियों में कुल इक्विटी का बड़ा हिस्सा एक साथ ट्रेडिंग के लिए खुलेगा. जैसे,

  • Anthem Biosciences – 69%
  • Travel Food Services – 66%
  • Crizac – 60%
  • ऐसी कंपनियों में अचानक बिकवाली का दबाव बन सकता है.

2- प्रमोटर कुशन फैक्टर

कुल वैल्यू भले ही बड़ी हो, लेकिन प्रमोटर शेयर आमतौर पर बाजार में नहीं आते. इससे पूरी सप्लाई एक साथ बिकने की आशंका कम होती है.

3- प्राइस परफॉर्मेंस ट्रैकिंग

नुवामा यह भी देखता है कि स्टॉक IPO प्राइस के मुकाबले मुनाफे में है या घाटे में. मुनाफे में बैठे निवेशक से प्रॉफिट बुकिंग की संभावना रहती है. वहीं, घाटे में बैठे निवेशक से होल्ड करने की संभावना रहती है.

एंकर निवेशकों का रोल

IPO में एंकर निवेशकों (Mutual Funds, FIIs) पर आमतौर पर 30 या 90 दिन का लॉक-इन होता है. जैसे ही यह खत्म होता है, शेयरों का 'ओवरहैंग' हटता है, लेकिन अगर संस्थागत निवेशक मुनाफा निकालते हैं, तो स्टॉक पर दबाव आ सकता है. नुवामा की यह स्टडी 2025 के अंत तक लिस्ट हुई सभी कंपनियों को कवर करती है और इसमें प्रमोटर व नॉन-प्रमोटर, दोनों तरह के शेयरहोल्डर्स को शामिल किया गया है, ताकि निवेशकों को संभावित सप्लाई की पूरी तस्वीर मिल सके.

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