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सिगरेट पर सेस का धुआं बाजार तक पहुंचा: ITC समेत तंबाकू कंपनियों के शेयर लुढ़के, स्मोकर्स की जेब अब और होगी ढीली

भारत में सिगरेट पर लगे सेस में बदलाव के बाद ITC समेत तंबाकू कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई. एक अनुमान के मुताबिक देश में सिगरेट पीने वाले करोड़ों लोगों के लिए सिगरेट महंगी हो जाएगी. इसका सीधा असर अब सिगरेट पीने वालों की जेब पर पड़ेगा. जानिए सिगरेट की कीमतें कितनी बढ़ी.

सिगरेट पर सेस का धुआं बाजार तक पहुंचा: ITC समेत तंबाकू कंपनियों के शेयर लुढ़के, स्मोकर्स की जेब अब और होगी ढीली
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( Image Source:  India & The World @IndianInfoGuid )

सिगरेट पीने वालों और तंबाकू सेक्टर में निवेश करने वालों दोनों के लिए झटका देने वाली खबर है. भारत में सिगरेट पर सेस (Cess) में बढ़ाने का एलान केंद्र सरकार ने बीती रात कर दिया. कीमतों में बढ़ोतरी का एलान होते ही आईटीसी (ITC) सहित कई तंबाकू कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई. सरकार के इस कदम का मकसद जहां राजस्व बढ़ाना और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना बताया जा रहा है, वहीं बाजार इसे कंपनियों की मार्जिन पर सीधा प्रहार मान रहा है. सवाल यह है कि अब कश मारने वालों को हर पैकेट पर कितना ज्यादा खर्च करना पड़ेगा?


40 फीसदी है सिगरेट पर GST

केंद्र सरकार द्वारा 40% GST के अलावा सिगरेट पर टैक्स लगाने के बाद भारत की सबसे बड़ी सिगरेट बनाने वाली कंपनियों ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयर 8% तक गिर गए. सरकार ने 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगाई है, जिससे दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में अनुमानित 10 करोड़ धूम्रपान करने वालों के लिए सिगरेट महंगी हो जाएगी.

1000 स्टिक पर 2050-8500 की रुपये ड्यूटी

31 दिसंबर की देर रात वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू, जरदा सुगंधित तंबाकू और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह) नियम 2026 को अधिसूचित किया. इसके तहत 1 फरवरी से सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1000 स्टिक पर ₹2,050-8,500 की एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है.

सरकार द्वारा 40% GST के अलावा सिगरेट पर टैक्स लगाने के बाद भारत की सबसे बड़ी सिगरेट बनाने वाली कंपनियों ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयर 8% तक गिर गए. गोल्ड फ्लेक और क्लासिक सिगरेट बनाने वाली और मार्केट लीडर ITC के शेयर 2% गिरे, जबकि भारत में मार्लबोरो सिगरेट की डिस्ट्रीब्यूटर गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयर 4.1% गिरे. ITC निफ्टी 50 इंडेक्स में सबसे बड़ा लूजर था और FMCG इंडेक्स में गिरावट का भी नेतृत्व किया, जो 0.6% नीचे कारोबार कर रहा था.

सरकार ने क्यों बढ़ाए टैक्स

पान मसाला और सिगरेट सहित तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी 40% GST दर के अलावा है. यह कंपनसेशन सेस की जगह लेगा, जिसे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स को तर्कसंगत बनाने के व्यापक कदम के हिस्से के रूप में खत्म कर दिया गया है.

1 फरवरी से बढ़ोतरी होगा लागू

1 फरवरी से, तंबाकू उत्पादों जिसमें पान मसाला और सिगरेट शामिल हैं, पर 40% GST लगेगा, लेकिन बीड़ी (रोल्ड तंबाकू के पत्ते) पर 18% GST लगेगा. इसके अलावा, पान मसाला पर हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस लगाया जाएगा. जबकि तंबाकू और संबंधित उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगेगी.

संसद ने दिसंबर में दो बिलों को मंजूरी दी थी, जिसमें पान मसाला निर्माण पर नए हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस और तंबाकू पर एक्साइज ड्यूटी लगाने की अनुमति दी गई थी. बुधवार को सरकार ने इन लेवी के लागू होने की तारीख 1 फरवरी 2026 को अधिसूचित किया. मौजूदा GST कंपनसेशन सेस, जो वर्तमान में अलग-अलग दरों पर लगाया जाता है, उस दिन से खत्म हो जाएगा.

सिगरेट पर सेस क्या होता है?

सेस, जीएसटी के ऊपर लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर है, जो स्वास्थ्य से जुड़े खर्च, सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है. सिगरेट पर पहले से ही एक्साइज, जीएसटी और सेस का भारी बोझ होता है.

अब सिगरेट कितनी महंगी हो सकती है?

अनुमान के मुताबिक प्रति सिगरेट 1 से 3 रुपये तक की बढ़ोतरी होगी. एक पैकेट पर रुपये 20 से 40 तक अतिरिक्त खर्च हो सकता है. यानी नियमित स्मोकर्स की मासिक जेब पर सीधा असर पड़ेगा.

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