Budget 2026: 25 लाख कमाने वाला भी अब अमीर नहीं! क्या बजट में मिडिल क्लास को मिल सकता है सबसे बड़ा तोहफा?
Budget 2026 से पहले इनकम टैक्स स्लैब को लेकर बहस तेज हो गई है. बढ़ती महंगाई और खर्चों के बीच ₹25–30 लाख की इनकम को अब ‘हाई इनकम’ मानना मुश्किल होता जा रहा है. टैक्स एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री चाहती है कि 30% टैक्स की सीमा और ऊपर ले जाई जाए. अगर ऐसा होता है, तो करोड़ों सैलरीड और प्रोफेशनल टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिल सकती है और इकोनॉमी को भी रफ्तार मिलेगी.
देश का सैलरीड क्लास अब सिर्फ महीने के खर्च नहीं गिन रहा, बल्कि आने वाले बजट से उम्मीदें भी जोड़ चुका है. 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला यूनियन बजट इस बार सिर्फ सरकारी आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि करोड़ों टैक्सपेयर्स की जेब से जुड़ा बड़ा फैसला साबित हो सकता है. वजह है - इनकम टैक्स का वो 30% स्लैब, जो अब सवालों के घेरे में है.
पिछले कुछ सालों में महंगाई, EMI, हेल्थ इंश्योरेंस और बच्चों की पढ़ाई ने जिस तरह आम परिवार का बजट बिगाड़ा है, उसने एक नई बहस छेड़ दी है - क्या ₹25–30 लाख कमाने वाला व्यक्ति सच में “अमीर” है?
टैक्स सिस्टम बदल चुका है, सोच भी बदलनी पड़ेगी
सरकार पहले ही न्यू टैक्स रिजीम को सरल और आकर्षक बना चुकी है. अब बिना ढेर सारी छूट और जटिल कैलकुलेशन के टैक्स भरने का रास्ता खुल चुका है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में नौकरीपेशा और प्रोफेशनल्स पुराने सिस्टम को छोड़कर नए ढांचे में आ गए हैं. लेकिन जैसे-जैसे इनकम लेवल बढ़ा है, वैसे-वैसे 30% टैक्स स्लैब की सीमा पर सवाल उठने लगे हैं.
क्यों खटक रहा है 30% टैक्स स्लैब?
फिलहाल 24 लाख रुपये सालाना से ज्यादा कमाने पर सबसे ऊंचा टैक्स लगाया जाता है. इंडस्ट्री और टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सीमा आज के समय के हिसाब से कम है. बड़े शहरों में घर खरीदना अब 1–2 करोड़ का सपना बन चुका है. बच्चों की पढ़ाई सालाना लाखों में जा रही है. हेल्थ इमरजेंसी किसी भी परिवार की बचत खत्म कर सकती है. ऐसे में 25 लाख की इनकम अब “लक्ज़री” नहीं, बल्कि जरूरत बनती जा रही है.
अगर 30% स्लैब ऊपर गया, तो किसे मिलेगा सीधा फायदा?
- ₹25–30 लाख कमाने वाले : अगर 30% टैक्स की सीमा बढ़ती है, तो इस वर्ग की बड़ी इनकम 25% या उससे कम टैक्स में आ सकती है. नतीजा, हर साल हजारों नहीं, बल्कि लाख रुपये तक की बचत.
- ₹40–50 लाख वाले प्रोफेशनल्स : यह वर्ग फिलहाल सबसे ज्यादा टैक्स दबाव में है. स्लैब शिफ्ट होने से इनकी टैक्स देनदारी में बड़ा फर्क पड़ सकता है.
सरकार के लिए भी फायदेमंद क्यों है टैक्स में राहत?
यह सिर्फ “टैक्स कटौती” का मामला नहीं है, बल्कि पूरी इकोनॉमी से जुड़ा मुद्दा है. लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा जिससे खर्च बढ़ेगा और बाजार में मांग लौटेगी. ऑटो, रियल एस्टेट और रिटेल सेक्टर को रफ्तार मिलेगी साथ ही GST कलेक्शन मजबूत होगा. यानी टैक्सपेयर्स खुश, और सरकार को भी अप्रत्यक्ष रूप से फायदा.
मिडिल क्लास की डिमांड क्या है?
बजट से पहले सबसे ज्यादा आवाज इन्हीं मांगों की सुनाई दे रही है:
- 30% टैक्स स्लैब को और ऊपर ले जाया जाए
- बीच के स्लैब में टैक्स दर थोड़ी नरम हो
- स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाया जाए
- न्यू टैक्स रिजीम में कुछ बेसिक राहत वापस मिले
क्या Budget 2026 कोई नया सरप्राइज देगा?
पिछले बजट ने जिस तरह टैक्स सिस्टम को नया रूप दिया था, उससे यह साफ है कि सरकार बड़े बदलाव करने से नहीं डरती. अब देखना यह है कि क्या 2026 का बजट “फाइन ट्यूनिंग” का साल बनेगा या सरकार टैक्स स्ट्रक्चर को स्थिर रखने का रास्ता चुनेगी.





