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Pak-Afg War: कहीं मुनीर के कंधे पर बंदूक रखकर तो नहीं चला रहे ट्रंप, अफ़ग़ानिस्तान में आख़िर चल क्या रहा है?

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब क्षेत्रीय सीमा विवाद से आगे निकलकर ग्लोबल पॉलिटिक्स का हिस्सा बनता दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पाकिस्तान के प्रति खुली सराहना और बगराम एयरबेस पर पुराने बयानों ने नई बहस छेड़ दी है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ आतंकवाद विरोधी कार्रवाई है या दक्षिण एशिया में कुछ और बड़ा होने वाला है.

Pak-Afg War: कहीं मुनीर के कंधे पर बंदूक रखकर तो नहीं चला रहे ट्रंप, अफ़ग़ानिस्तान में आख़िर चल क्या रहा है?
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( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- SORA and @TeamAsimMunir )

Pak-Afg War: अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान की के बीच जंग जैसे हालात बने हुए हैं. एक ओर जहां पाकिस्‍तान अपने पड़ोसी देश में हवाई हमले कर रहा है तो दूसरी ओर अफगानिस्तान भी बदले की कार्रवाई में सीमा पर लगातार हमले कर रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने शुक्रवार को पाकिस्तान की खुलकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि उनके पाकिस्तान से "बहुत-बहुत अच्छे रिश्ते” हैं और वहां के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को “महान नेता” बताया, जिनका वह बेहद सम्मान करते हैं.

अब ऐसे में जब पाकिस्‍तान लगातार आतंकियों को निशाना बनाने के नाम पर अफगानिस्‍तान पर हमले कर रहा है और ट्रंप एक तरह से उसका समर्थन करते दिख रहे हैं, तो कई सवाल खड़े हो रहे हैं. क्‍या पाकिस्‍तान ट्रंप की लड़ाई लड़ रहा है? यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि क्‍योंकि ट्रंप पहले भी बगराम एयरबेस को वापस अपने कंट्रोल में लेने की बात कह चुके हैं और तालिबान सरकार इससे इनकार कर चुकी है. तो कहीं उसी एयरबोस को अमेरिका के हवाले करने के लिए तो पाकिस्‍तान हमले नहीं कर रहा?

क्या पाकिस्तान ट्रंप की ‘प्रॉक्सी वॉर’ लड़ रहा है?

पाकिस्तान–अफगान सीमा पर हाल के हफ्तों में गोलाबारी, हवाई हमले और चौकियों पर कब्जे की खबरों ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है. इस्लामाबाद का कहना है कि वह आतंकी ठिकानों को निशाना बना रहा है, जबकि काबुल इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है. सोशल मीडिया पर यह नैरेटिव तेजी से फैल रहा है कि क्या पाकिस्तान अमेरिकी हितों के लिए जमीन तैयार कर रहा है? क्या यह सिर्फ आतंकवाद विरोधी कार्रवाई है या फिर ट्रंप की वापसी के बाद अमेरिका की क्षेत्रीय पकड़ मजबूत करने की रणनीति?

बगराम एयर बेस क्या इस पूरे खेल की असली चाबी है?

बगराम एयर बेस 2021 में अमेरिकी सेना के हटने के बाद खाली हुआ था. ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि अमेरिका को बगराम नहीं छोड़ना चाहिए था. उनके मुताबिक यह मध्य एशिया में रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए बेहद अहम ठिकाना था. अब अटकलें हैं कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान में बढ़ते तनाव के बीच खुद को अमेरिका के लिए “फैसिलिटेटर” के रूप में पेश करना चाहता है - ताकि बगराम जैसे ठिकाने पर दोबारा अमेरिकी मौजूदगी की जमीन तैयार हो सके. हालांकि इस दावे का कोई आधिकारिक सबूत नहीं है, लेकिन टाइमिंग ने सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं.

क्या चीन-रूस की बढ़ती मौजूदगी से चिंतित है वॉशिंगटन?

अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद चीन और रूस ने वहां कूटनीतिक और आर्थिक सक्रियता बढ़ाई है. चीन की नजर खनिज संसाधनों और बेल्ट एंड रोड नेटवर्क पर है, जबकि रूस क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है. अगर अमेरिका बगराम जैसे ठिकाने के जरिए वापसी करता है, तो यह चीन–रूस के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश मानी जाएगी. ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका निर्णायक हो सकती है.

क्या आसिम मुनीर घरेलू संकट से ध्यान हटाने के लिए आक्रामक रुख अपना रहे हैं?

पाकिस्तान इस समय आर्थिक दबाव, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकी हमलों से जूझ रहा है. ऐसे में सीमा पार सख्त सैन्य कार्रवाई घरेलू मोर्चे पर “मजबूत नेतृत्व” का संदेश दे सकती है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि आक्रामक रुख से पाकिस्तान सेना अपनी रणनीतिक अहमियत फिर से स्थापित करना चाहती है - खासकर तब जब अमेरिका के साथ रिश्तों में नई गर्माहट दिख रही है.

क्या तालिबान दोबारा विदेशी सेना को बर्दाश्त करेगा?

अफगान तालिबान पहले ही किसी भी विदेशी सैन्य उपस्थिति के खिलाफ सख्त रुख दिखा चुका है. अगर पाकिस्तान पर यह धारणा बनती है कि वह अमेरिका की वापसी का रास्ता खोल रहा है, तो यह काबुल-इस्लामाबाद रिश्तों में स्थायी दरार डाल सकता है. सीमा पर जारी झड़पें कूनर, नंगरहार और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में फैल चुकी हैं, जिससे मानवीय और सुरक्षा संकट गहरा सकता है.

आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन है या बड़ी वापसी की तैयारी?

पाकिस्तान का आधिकारिक स्टैंड साफ है - वह आतंकी सुरक्षित ठिकानों को खत्म कर रहा है. लेकिन ट्रंप की खुली तारीफ, बगराम पर पुराने बयान और मौजूदा सैन्य आक्रामकता ने शंका को जन्म दिया है कि कहीं यह बड़े रणनीतिक सौदे का हिस्सा तो नहीं. फिलहाल बगराम कनेक्शन का कोई सबूत नहीं है. लेकिन अगर यह सच निकला, तो दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन फिर से बदल सकता है.

सीमा विवाद या जियोपॉलिटिकल शतरंज?

अफगानिस्तान–पाकिस्तान तनाव सिर्फ दो पड़ोसियों की लड़ाई नहीं रह गया है. इसमें अमेरिका की रणनीतिक वापसी, चीन–रूस की प्रतिस्पर्धा और पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति - सभी शामिल हैं. अब असली सवाल यही है कि क्या यह मुनीर की अपनी रणनीति है, या ट्रंप की बड़ी चाल का हिस्सा? जवाब आने वाले हफ्तों में मिलेगा, लेकिन इतना तय है कि यह टकराव दक्षिण एशिया की स्थिरता और वैश्विक शक्ति संतुलन पर गहरा असर डाल सकता है.

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