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रमजान के महीने में अफगान और पाक दोनों ही खून के प्यासे! कितना पहुंचा मौत का आंकड़ा? ये हैं जंग के पांच कारण

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई और ड्रोन हमले का दावा किया है. ड्यूरंड लाइन पर बढ़ते तनाव के बीच पाक रक्षा मंत्री ने ‘खुली जंग’ की चेतावनी दी है. दोनों देश के जंग के मामले में अब तक 300 लोगों की मौत बताई जा रही है.

रमजान के महीने में अफगान और पाक दोनों ही खून के प्यासे!  कितना पहुंचा मौत का आंकड़ा? ये हैं जंग के पांच कारण
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अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर जवाबी हवाई और ड्रोन हमले किए हैं. काबुल के रक्षा मंत्रालय के अनुसार निशाने पर इस्लामाबाद के पास फैजाबाद, रावलपिंडी ठिकानों के निकट क्षेत्र, नौशेरा, जमरूद और एबटाबाद जैसे सैन्य ठिकाने थे. हालांकि पाकिस्तान ने अपने क्षेत्र के भीतर किसी हवाई बमबारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

यह दावा ऐसे समय आया है जब विवादित ड्यूरंड लाइन पर दोनों देशों के बीच तीव्र गोलीबारी और हवाई कार्रवाई की खबरें हैं. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने हालात को 'खुली जंग' की स्थिति बताया, जबकि तालिबान ने इसे काबुल, कंधार और पक्तिया में पाकिस्तानी 'घुसपैठ' का जवाब करार दिया.

क्या तालिबान वायुसेना ने पाकिस्तान में अंदर तक हमला किया?

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बयान की शुरुआत धार्मिक उद्घोषणा से करते हुए कहा कि 'अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान और रहमत करने वाला है. हमारे सैनिक विजयी होंगे.'

मंत्रालय ने दावा किया कि 'रक्षा मंत्रालय की वायुसेना ने आज लगभग सुबह 11 बजे इस्लामाबाद के फैजाबाद के पास एक सैन्य शिविर, नौशेरा के आर्मी कैंटोनमेंट, जमरूद की सैन्य कॉलोनी और एबटाबाद में हवाई हमले किए.'

फैजाबाद इस्लामाबाद के पूर्वी हिस्से का प्रमुख जंक्शन है, जो रावलपिंडी की सीमा से सटा है. रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय स्थित है. काबुल स्थित मीडिया आउटलेट टोलो न्यूज ने भी सुरक्षा सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि खैबर पख्तूनख्वा के नोशेर इलाके में एक ड्रोन ने सैन्य शिविर को निशाना बनाया. हालांकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सीमित है.

ड्यूरंड लाइन पर आखिर हुआ क्या?

काबुल का दावा है कि पाकिस्तान ने नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमले किए, जिनमें दर्जनों नागरिकों की मौत हुई. तालिबान के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने कहा, "कथित ड्यूरंड लाइन के साथ दुश्मन के खिलाफ भारी जवाबी आक्रामक अभियान शुरू कर दिए गए हैं.'

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, काबुल में रात के समय आसमान में जेट विमानों की आवाज और विस्फोट सुनाई दिए. एक स्थानीय ड्राइवर तमीम ने बताया कि 'हम नींद से जागे ही थे कि एक विमान आया और उसने दो बम गिराए, फिर वह दोबारा उड़कर चला गया. उसके बाद हमें धमाकों की आवाजें सुनाई दीं.' इस्लामाबाद में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि, 'हमारे सब्र का बांध टूट चुका है. अब हमारे और आपके (अफगानिस्तान) बीच खुली जंग है.'

पाकिस्तान-तालिबान टकराव की जड़ क्या है?

1) टीटीपी का सवाल

पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को अफगानिस्तान की धरती पर पनाह मिलती है और वहीं से हमले संचालित होते हैं. तालिबान इस आरोप से इनकार करते हुए इसे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा समस्या बताते हैं.

2) ड्यूरंड लाइन विवाद

2,600 किलोमीटर लंबी सीमा दशकों से विवादित रही है. पाकिस्तान के हालिया हमले, जो कथित तौर पर काबुल और कंधार तक पहुंचे, संप्रभुता के सवाल को और संवेदनशील बना रहे हैं.

3) घरेलू राजनीति और शक्ति प्रदर्शन

दोनों सरकारें आंतरिक दबाव में हैं. पाकिस्तान बढ़ती आतंकी घटनाओं से जूझ रहा है, जबकि तालिबान अंतरराष्ट्रीय मान्यता और आर्थिक संकट के बीच अपनी ताकत दिखाना चाहता है.

4) भारत फैक्टर

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि तालिबान ने अफगानिस्तान को “भारत की कॉलोनी” बना दिया है. यह बयान क्षेत्रीय समीकरणों को और जटिल बनाता है.

5) शरणार्थी और व्यापार

सीमा पर बंदिशें, शरणार्थियों की वापसी और व्यापार मार्गों पर नियंत्रण दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ाने वाले कारक हैं.

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण पैमाने पर पारंपरिक युद्ध की संभावना कम है, क्योंकि पाकिस्तान की सैन्य क्षमता कहीं अधिक मजबूत है. लेकिन सीमित हवाई हमले, ड्रोन कार्रवाई और सीमा पार संघर्षों का सिलसिला लंबा खिंच सकता है.

पंजाब न्‍यूज
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