US-Iran War: चौधरी पाकिस्तान फुस! युद्धविराम को लेकर पर्दे के पीछे से चीन ने कैसे खेला पूरा खेल?

मिडिल ईस्ट में अब 2 हफ्तों के लिए सीजफायर का एलान हो चुका है. लगभग 1 महीने से ज्यादा दिन तक चलने वाली इस लड़ाई पर मंगलवार को दुनियाभर की नजरें टिकी थी, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी.

US Iran war ceasefire China role

(Image Source:  X/ @MarioNawfal, @hamzitron )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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US Iran War Ceasefire: मिडिल ईस्ट में अब 2 हफ्तों के लिए सीजफायर का एलान हो चुका है. लगभग 1 महीने से ज्यादा दिन तक चलने वाली इस लड़ाई पर मंगलवार को दुनियाभर की नजरें टिकी थी, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि वे एक रात के अंदर सब खत्म कर सकते हैं. दूसरी तरफ पाकिस्तान कई दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहा था.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को युद्धविराम के लिए अपनी शर्तों वाला प्रस्ताव भेजा. अब दोनों पक्षों के बीच इस्लामाबाद में 10 अप्रैल को बातचीत होगी. अब यहां सवाल ये उठ रहा है कि क्या सच में पाकिस्तान ने ये सीजफायर कराया है या फिर पर्दे के पीछे किसी दूसरे देश की रणनीति है?

क्या चीन ने निभाई अहम भूमिका?

रिपोर्ट के मुताबिक The New York Times ने तीन ईरानी अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश जरूर की, लेकिन असली भूमिका पर्दे के पीछे से चीन ने निभाई. बताया गया कि पाकिस्तान कई हफ्तों से दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन न तो ईरान और न ही इजरायल इसके लिए तैयार थे. आखिर में चीन के हस्तक्षेप के बाद ही ईरान युद्धविराम के लिए राजी हुआ.

चीन ने क्यों निभाई भूमिका?

रिपोर्ट्स की माने तो इस पूरे घटनाक्रम में चीन की दिलचस्पी सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक भी थी. चीन की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा ईरान से आने वाले तेल पर निर्भर करता है. युद्ध की स्थिति में यह आपूर्ति बाधित हो रही थी, जिससे चीन की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा था. ईरान के खार्ग आइलैंड पर संभावित अमेरिकी हमले और शिपिंग लागत में वृद्धि ने चीन के लिए संकट की स्थिति पैदा कर दी थी. इससे न सिर्फ उत्पादन प्रभावित हो रहा था, बल्कि वैश्विक व्यापार भी प्रभावित होने लगा था.

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. यदि यह मार्ग बंद होता, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर गंभीर असर पड़ता. इसी खतरे को देखते हुए चीन ने तेजी से हस्तक्षेप किया. युद्धविराम समझौते के तहत ईरान ने यह आश्वासन दिया है कि अगले दो हफ्तों तक वह इस मार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा.

क्या ईरान की हुई जीत?

ईरान ने इस युद्धविराम को एक शर्त के साथ स्वीकार किया है. उसने कहा कि “अगर ईरान के खिलाफ हमले रोक दिए गए हैं, तो हमारी ताकतवर आर्म्ड फोर्सेज अपने डिफेंसिव ऑपरेशन बंद कर देगी.” ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए इसे अपनी कूटनीतिक जीत बताया है.

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