47 साल बाद शांति पर आमने-सामने ईरान और अमेरिका! इस्लामाबाद की बैठक में कितना दम? जानिए किन मुद्दों पर अटक सकती है बातचीत

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता हो रही है. ईरान ने लेबनान पर इजरायली हमले रोकने की मांग की है. इस हाई-लेवल मीटिंग का नेतृत्व JD Vance और Mohammad Bagher Ghalibaf कर रहे हैं.

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हो रही बैठक(Image Source:  Sora_ AI )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 11 April 2026 11:00 PM IST

Iran US Ceasefire Talks Islamabad:  पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर वार्ता का दूसरा दौर शुरू हो गया है. पहला दौर करीब दो घंटे तक चला था, जिसमें ईरान ने लेबनान पर इजराइली हमलों को तुरंत रोकने की मांग उठाई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बातचीत अगले दिन भी जारी रह सकती है. खास बात यह है कि Iranian Revolution के बाद पहली बार दोनों देशों के नेता इतने बड़े स्तर पर आमने-सामने बातचीत कर रहे हैं. इस उच्चस्तरीय बैठक में सुरक्षा, राजनीति, सैन्य, आर्थिक और कानूनी मामलों से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हैं.

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance कर रहे हैं, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf बातचीत की अगुवाई कर रहे हैं. वेंस के साथ Donald Trump के दामाद Jared Kushner और मिडिल ईस्ट दूत Steve Witkoff भी मौजूद हैं. वहीं, ईरान प्रतिनिधिमंडल में संसद की अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उप विदेश मंत्री मजीद तख्त रवांची शामिल हैं.

विशेषज्ञ स्तर पर पहुंची बातचीत

ईरानी सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि वार्ता अब 'एक्सपर्ट लेवल' पर पहुंच गई है. आर्थिक, सैन्य, कानूनी और परमाणु मामलों की तकनीकी समितियां भी बातचीत में शामिल हो गई हैं.

ईरान ने क्या चेतावनी दी?

ईरान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अगर बातचीत विफल होती है तो केवल इजराइल को दोष नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इजराइल और अमेरिका के फैसले आपस में जुड़े हुए हैं. ऐसे में वार्ता फेल होने पर जिम्मेदारी अमेरिका पर भी आएगी.

ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने क्या कहा?

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पाकिस्तान में मौजूद अपने प्रतिनिधिमंडल की सराहना की. उन्होंने कहा कि ईरानी टीम देश के हितों की रक्षा के लिए मजबूती और बेखौफ होकर बातचीत कर रही है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बातचीत का नतीजा चाहे जो भी हो, सरकार हर हाल में जनता के साथ खड़ी रहेगी.

लेबनान प्रधानमंत्री ने रद्द किया अमेरिका दौरा

इस बीच लेबनान के प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने अपना प्रस्तावित अमेरिकी दौरा रद्द कर दिया. वे अगले सप्ताह Washington DC जाने वाले थे, जहां उनकी मुलाकात अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से होनी थी. नवाफ सलाम ने कहा कि मौजूदा हालात में उनका लेबनान में रहना जरूरी है, ताकि देश की सुरक्षा और एकता बनाए रखी जा सके.

आसिम मुनीर का अलग अंदाज

ईरान और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir अलग-अलग अंदाज में नजर आए. ईरानी प्रतिनिधिमंडल को रिसीव करते समय वे आर्मी यूनिफॉर्म में थे, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान उन्होंने औपचारिक सूट पहना. विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिर्फ प्रोटोकॉल नहीं बल्कि कूटनीतिक संदेश देने की कोशिश भी थी.

होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा तनाव

ईरान ने दावा किया कि Strait of Hormuz से कोई अमेरिकी जहाज नहीं गुजरा. ईरानी सरकारी टीवी IRIB के मुताबिक एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत को चेतावनी दी गई थी कि आगे बढ़ने पर 30 मिनट के भीतर हमला किया जाएगा, जिसके बाद जहाज वापस लौट गया.

व्हाइट हाउस ने क्या कहा?

White House ने पुष्टि की है कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच इस्लामाबाद में आमने-सामने बातचीत हुई है. यह हाई-लेवल बैठक इस्लामाबाद के Serena Hotel Islamabad में हो रही है, जिसे शहर के सबसे सुरक्षित इलाकों में माना जाता है. करीब 6 हेक्टेयर में फैले इस होटल में 400 से ज्यादा कमरे और बड़े कॉन्फ्रेंस हॉल मौजूद हैं. यहां बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के कारण बड़ी और संवेदनशील बैठकों के लिए इसे प्राथमिकता दी जाती है.

F-16 फाइटर जेट्स ने किया एस्कॉर्ट

जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद पहुंचे, तो उनके विमान को पाकिस्तान के F-16 Fighting Falcon लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया. पांच फाइटर जेट्स ने उनके विमान को सुरक्षित तरीके से पाकिस्तान में लैंड कराया. इस बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में अहम हो सकती है, लेकिन लेबनान, खाड़ी क्षेत्र और परमाणु मुद्दों पर मतभेद अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं.

युद्धविराम के बीच हो रही बातचीत

ये बातचीत अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष में दो हफ्ते के युद्धविराम के दौरान हो रही है. यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे. इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच Shehbaz Sharif की मध्यस्थता में 8 अप्रैल को अस्थायी युद्धविराम हुआ, जिसके बाद अब बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई है.

पीएम शहबाज की अलग-अलग बैठकें

वार्ता से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों से अलग-अलग मुलाकात की. ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान पाकिस्तान की ओर से उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar, सेना प्रमुख Asim Munir और गृह मंत्री Mohsin Raza Naqvi भी मौजूद रहे. इसके बाद शहबाज शरीफ ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की और उम्मीद जताई कि यह वार्ता क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.

इस्लामाबाद पहुंचे दोनों प्रतिनिधिमंडल

शनिवार सुबह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का विमान Nur Khan Airbase पर उतरा, जहां उनका स्वागत पाकिस्तानी अधिकारियों ने किया. ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी शनिवार सुबह इस्लामाबाद पहुंचा. हालांकि इससे पहले इजरायल के लेबनान पर हमलों को लेकर बातचीत रुकने की स्थिति बन गई थी.

ईरान ने कौन-सी शर्तें रखीं?

ईरान ने वार्ता से पहले दो प्रमुख शर्तें रखीं - लेबनान में इजरायली हमले बंद हों और विदेशों में फ्रीज 7 अरब डॉलर की ईरानी संपत्ति जारी की जाए. ईरान का कहना है कि युद्धविराम सभी मोर्चों पर लागू होना चाहिए, जिसमें Hezbollah भी शामिल है.

अमेरिका और ईरान के बीच क्यों है मतभेद?

अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक, यूरेनियम संवर्धन सीमित करने और परमाणु सामग्री हटाने की मांग कर रहा है. वहीं ईरान की मांगें हैं- सभी प्रतिबंध हटाए जाएं, परमाणु अधिकारों को मान्यता मिले, Strait of Hormuz में नौवहन सुरक्षा और फ्रीज संपत्तियों तक पहुंच.

ट्रंप ने क्या चेतावनी दी?

डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर बातचीत विफल होती है तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि दो दिन की शुरुआती बातचीत में बड़ा समझौता मुश्किल है, लेकिन इससे आगे की वार्ता का रास्ता खुल सकता है. हालांकि, लेबनान में जारी तनाव, खाड़ी क्षेत्र में जहाजरानी संकट और अमेरिका-ईरान के बीच गहरे अविश्वास के कारण बातचीत पर दबाव बना हुआ है.

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