बंटवारे के 16 साल बाद Pakistan की राजधानी बना Islamabad, क्यों हुई इसकी जरूरत और कैसे इसे बनाया गया
इस्लामाबाद टूरिस्ट्स के लिए नेचर और मॉडर्निटी का बेहतरीन मिश्रण है. फैसल मस्जिद, मारगल्ला हिल्स, रावल लेक और पाकिस्तान मॉन्यूमेंट जैसी जगहें इसकी खूबसूरती बढ़ाती हैं. यहां ट्रैकिंग, पिकनिक और कल्चर का शानदार अनुभव मिलता है.
1947 में भारत के बंटवारे के बाद पाकिस्तान की राजधानी कराची बनाई गई थी, लेकिन कुछ ही वर्षों में यह साफ हो गया कि यह शहर स्थायी प्रशासनिक केंद्र के लिए सुरक्षित सिटी नहीं है. भीड़, राजनीतिक दबाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच एक नई राजधानी की जरूरत महसूस हुई. इसी सोच के साथ 1959 में अयूब खान ने नया शहर बसाने का फैसला लिया, जो आगे चलकर इस्लामाबाद (Islamabad) बना. सरकार के इस फैसले ने इस्लामाबाद को एक प्लांड सिटी तब्दील कर दिया,जिसने पाकिस्तान की राजनीतिक दिशा और प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह बदल दिया.
कराची के बदले नई राजधानी की जरूरत क्यों?
1947 में पाकिस्तान की राजधानी कराची बनाई गई थी. शुरुआत में यह फैसला सही लगा, लेकिन 1950–60 के दशक तक कराची की सीमाएं साफ दिखने लगीं. यह एक व्यावसायिक हब था, जहां तेजी से आबादी बढ़ रही थी और प्रशासनिक दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा था. राजनीतिक अस्थिरता, भीड़भाड़ और सुरक्षा चिंताओं ने इसे एक आदर्श राजधानी के रूप में असुरक्षित सिटी बना दिया. खासतौर पर समुद्र के किनारे होने के कारण इसे बाहरी खतरों के लिहाज से भी असुरक्षित माना जाने लगा. नतीजा यह हुआ कि सरकार ने पाकिस्तान की नई राजधानी के लिए एक आयोग का गठन किया. ताकि नई, शांत और सुरक्षित राजधानी पाकिस्तान के लोगों को मिल सके.
किस आयोग ने की थी नाम की सिफारिश?
1959 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने राजधानी बदलने का बड़ा फैसला लिया. इसके लिए उन्होंने एक विशेष आयोग गठित किया, जिसे कैपिटल लोकेशन कमिशन कहा गया. इस आयोग का काम था, नई राजधानी के लिए उपयुक्त स्थान की पहचान करना. विशेषज्ञों और योजनाकारों की इस टीम ने डिटेल अध्ययन के बाद सिफारिश की कि राजधानी को कराची से हटाकर देश के अंदरूनी हिस्से में बसाया जाए, जहां सुरक्षा, संतुलन और प्रशासनिक सुविधा बेहतर हो.
नई राजधानी इस्लामाबाद ही क्यों?
आयोग की सिफारिश के बाद रावलपिंडी के पास, मरगल्ला हिल्स (Margalla Hills) के नीचे का इलाका चुना गया. यह स्थान कई मायनों में आदर्श था. यह न केवल प्राकृतिक रूप से सुरक्षित था, बल्कि पाकिस्तान सेना के हेडक्वार्टर के करीब भी था, जिससे सत्ता और सैन्य समन्वय आसान हो सके. इसके अलावा, यह देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों के करीब था, जिससे भौगोलिक संतुलन भी बेहतर हुआ. इस तरह इस्लामाबाद का स्थान सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि रणनीतिक सोच का परिणाम था.
कैसे बसाया गया पूरा इस्लामाबाद शहर?
इस्लामाबाद को एक पूरी तरह योजनाबद्ध शहर के रूप में विकसित किया गया. इसके डिजाइन का जिम्मा ग्रीक आर्किटेक्ट Constantinos Apostolou Doxiadis को सौंपा गया. उन्होंने शहर को सेक्टर सिस्टम में बांटा, जहां हर सेक्टर में आवास, बाजार, स्कूल और पार्क की व्यवस्था की गई. चौड़ी सड़कें, हरियाली और व्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर इस शहर की पहचान बने. 1960 के दशक में निर्माण शुरू हुआ और धीरे-धीरे सरकारी दफ्तर, संसद और दूतावास यहां शिफ्ट होने लगे. जब तक यह पूरी तरह तैयार नहीं हुआ, तब तक रावलपिंडी को अस्थायी राजधानी बनाया गया.
1967 में औपचारिक रूप से राजधानी को रावलपिंडी से इस्लामाबाद स्थानांतरित कर दिया गया. यह सिर्फ राजधानी बदलने का फैसला नहीं था, बल्कि पाकिस्तान के प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से गढ़ने की भी कोशिश थी. व्यापारिक प्रभावों से दूर एक नियंत्रित और सत्ता व्यवस्थित केंद्र.
क्या बांग्लादेश बनने के बाद भी यह फैसला सही?
1971 के बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के बाद जब बांग्लादेश अस्तित्व में आया, तब पाकिस्तान का भूगोल पूरी तरह बदल गया. इसके बावजूद इस्लामाबाद को राजधानी बनाने का फैसला गलत नहीं बल्कि और ज्यादा प्रासंगिक साबित हुआ. अब देश का प्रशासनिक और सैन्य केंद्र पश्चिमी हिस्से में केंद्रित हो गया, जहां इस्लामाबाद की स्थिति और भी सही माना जाने लगा.
क्या यह फैसला दूरदर्शी था?
इस्लामाबाद को राजधानी बनाना सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं था, बल्कि यह पाकिस्तान की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा था. इसने देश को एक सुरक्षित, योजनाबद्ध और संतुलित सत्ता केंद्र दिया. आज भी इस्लामाबाद अपनी प्लानिंग, हरियाली और प्रशासनिक महत्व के कारण खास पहचान रखता है, जो साबित करता है कि यह फैसला समय के हिसाब से काफी हद तक सही और दूरदर्शी था.




