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MQ-4C Triton: आसमान के साइलेंट किलर को Iran ने गिराया! अचानक गायब हुआ 200 मिलियन डॉलर का अमेरिकी ड्रोन कितना खास?

अमेरिका के MQ-4C Triton के गायब होने से उसे बड़ा झटका लगा है. ये ड्रोन बेहद खास था और इसकी कीमत 200 मिलियन डॉलर थी. अंदेशा लगाया जा रहा है कि इसे ईरान ने गिराया है.

MQ-4C Triton: आसमान के साइलेंट किलर को Iran ने गिराया! अचानक गायब हुआ 200 मिलियन डॉलर का अमेरिकी ड्रोन कितना खास?
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( Image Source:  X- @Dhanjivpandey )
समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी5 Mins Read

Updated on: 11 April 2026 11:53 AM IST

US Drone Shot Down by Iran: अमेरिका की नौसेना का MQ-4C ट्राइटन निगरानी ड्रोन, जिसकी कीमत 200 मिलियन डॉलर से ज्यादा बताई जाती है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के ऊपर उड़ान के दौरान इमरजेंसी घोषित करने के बाद ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो गया. इस घटना ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इसके भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. माना जा रहा है कि इसे ईरान ने गिरा दिया है

फ्लाइटराडार24 के डेटा के मुताबिक, यह ड्रोन फारस की खाड़ी के ऊपर करीब तीन घंटे तक निगरानी मिशन पूरा करने के बाद इटली के नेवल एयर स्टेशन सिगोनेला स्थित अपने बेस की ओर लौट रहा था. इसी दौरान इसने अचानक अपना रास्ता बदल लिया.

कैसे गायब हुआ ये ड्रोन?

फ्लाइट ट्रैकिंग के अनुसार, ड्रोन ने थोड़ा ईरान की ओर रुख किया और फिर 7700 कोड प्रसारित किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इमरजेंसी सिग्नल माना जाता है. इसके बाद यह अपने करीब 50,000 फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे गिरते हुए 10,000 फीट से भी कम पर आ गया और फिर ट्रैकिंग से गायब हो गया. अब तक इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि ड्रोन क्रैश हुआ या उसे मार गिराया गया.

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोलने से जुड़े एक नाजुक संघर्ष विराम पर सहमति जताई थी. यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है.

MQ-4C ट्राइटन क्या है?

MQ-4C ट्राइटन अमेरिकी नौसेना के सबसे एडवांस और महंगे मानव रहित निगरानी विमानों में से एक है. इसे नॉर्थरोप ग्रुम्मन ने विकसित किया है और इसे लंबी दूरी तक लगातार समुद्री निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और टोही मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है.

ब्रॉड एरिया मैरिटाइम सर्विलांस प्रोग्राम के तहत बनाए गए इस ड्रोन की खासियत यह है कि यह 50,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर 24 घंटे से अधिक समय तक लगातार उड़ान भर सकता है.

इसकी रेंज लगभग 7,400 नॉटिकल मील है, जिससे यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी के लिए बेहद उपयोगी है. यह ड्रोन बोइंग P-8 पोसाइडन जैसे विमानों के साथ मिलकर काम करता है और बड़े इलाकों में रियल टाइम खुफिया जानकारी उपलब्ध कराता है.

क्या है इसकी खासियत?

ट्राइटन में अत्याधुनिक सेंसर लगे होते हैं, जिनमें एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन किए जाने वाले रडार शामिल हैं. यह रडार बड़े समुद्री क्षेत्रों पर नजर रख सकता है और जहाजों की गति, स्थिति और प्रकार के आधार पर उनकी पहचान कर सकता है.

यह ड्रोन खराब मौसम में भी काम करने के लिए तैयार किया गया है. इसकी संरचना मजबूत है और इसमें डी-आइसिंग सिस्टम तथा बिजली से सुरक्षा जैसी सुविधाएं दी गई हैं, जिससे यह बादलों के बीच से नीचे उतरकर भी लक्ष्य का करीब से निरीक्षण कर सकता है.

इसके अलावा इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर लगे होते हैं, जो हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें और लाइव वीडियो भेज सकते हैं. साथ ही इसमें इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्टम भी होता है, जो जहाजों और अन्य प्लेटफॉर्म से निकलने वाले रडार सिग्नल की पहचान कर सकता है.

यह विमान काफी हद तक खुद से काम करने में सक्षम है और मिशन तय होने के बाद इसे बहुत कम मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत होती है. यह एक कम्युनिकेशन रिले के तौर पर भी काम करता है, जो अलग-अलग सैन्य संसाधनों को आपस में जोड़कर पूरी स्थिति की जानकारी देता है.

इस ड्रोन को कहां किया गया था तैनात?

MQ-4C ट्राइटन को 2018 में अमेरिकी नौसेना में शामिल किया गया था. इसे इंडो-पैसिफिक और मिडिल ईस्ट जैसे अहम क्षेत्रों में तैनात किया गया है. यह ड्रोन अमेरिका की समुद्री निगरानी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, खासकर खाड़ी जैसे संवेदनशील इलाकों में.

लंबे समय तक हवा में बने रहने और बड़े क्षेत्र की लगातार निगरानी करने की क्षमता के कारण ट्राइटन नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखने, सर्च एंड रेस्क्यू मिशनों में मदद करने और सैन्य अभियानों के लिए स्थिति की बेहतर समझ देने में अहम भूमिका निभाता है.

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