कौन हैं Mohammad Ghalibaf? 'ग्रेट सैटन' अमेरिका से डील करने उतरा ईरान का सख्त चेहरा, क्या बदल जाएगा मिडिल ईस्ट का खेल?
ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf पाकिस्तान पहुंचे हैं. वह ईरान के डेलिगेशन को लीड कर रहे हैं. यह बातचीत पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हो रही है.
Iran News: ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf इन दिनों एक अहम राजनीतिक चेहरे के तौर पर उभरे हैं. उन्हें अमेरिका के साथ शांति वार्ता करने की जिम्मेदारी मिली है, जो काफी जोखिम भरा काम माना जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के लिए अमेरिका से बातचीत करना आसान नहीं है, क्योंकि दशकों से उसे 'ग्रेट सैटन' कहा जाता रहा है और हाल के संघर्ष में अमेरिका ने ईरान को सैन्य नुकसान भी पहुंचाया है.
इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता का माहौल भी काफी नाजुक है. ईरान का एक डेलीगेशन जिसका नेतृत्व Bagher Ghalibaf वह पाकिस्तान पहुंच चुका है, ताकि पीस टॉक हो सके. पिछले 48 घंटों में लेबनान पर इजरायली हमलों को लेकर तनाव बना हुआ है, बातचीत के तरीके को लेकर अलग-अलग संकेत मिल रहे हैं और आखिरी समय तक ईरान की भागीदारी को लेकर भी अनिश्चितता बनी रही.
अमेरिका की तरफ से कौन आ रहा है?
अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance इस वार्ता के लिए आ रहे हैं. अगर यह बातचीत होती है, तो यह अपने आप में एक बड़ा कदम माना जाएगा. कहा जा रहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने वेंस को भेजकर यह संकेत दिया है कि वॉशिंगटन इस वार्ता को लेकर गंभीर है.
कौन हैं गालिबाफ?
1961 में मशहद के पास जन्मे गालिबाफ ने युवा उम्र में ही ईरान-इराक युद्ध के दौरान IRGC जॉइन किया और धीरे-धीरे ऊंचे पदों तक पहुंचे. उनकी यही सैन्य पृष्ठभूमि उनकी राजनीतिक ताकत की नींव है.
इसके अलावा, 2005 से 2017 तक तेहरान के मेयर रहने के दौरान उन्होंने शहर में मेट्रो का विस्तार, एक्सप्रेसवे और टनल निर्माण जैसे बड़े प्रोजेक्ट पूरे कराए, जिससे उनकी छवि एक सक्षम प्रशासक के रूप में बनी. हालांकि, उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे और 1999 के छात्र विरोध प्रदर्शन को दबाने में उनकी भूमिका को लेकर आलोचना भी हुई. उन्होंने कई बार ईरान के राष्ट्रपति बनने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
कैसे बने अमेरिका के साथ बातचीत का चेहरा?
फरवरी 2026 के बाद तेहरान की राजनीति में जो बदलाव आए हैं, उसमें गालिबाफ की भूमिका और मजबूत हुई है. स्पीकर होने के नाते उनके पास पहले से ही ताकत थी, और अब वे अमेरिका के लिए एक संभावित बातचीत करने वाले नेता के रूप में भी उभरे हैं.
कुछ लोग उनकी तुलना Reza Shah Pahlavi से भी करते हैं, जिन्होंने 1920 के दशक में सत्ता संभालकर ईरान को आधुनिक बनाने की कोशिश की थी. गालिबाफ को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो सख्ती के साथ आधुनिकीकरण की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं.
अमेरिका के लिए भी गालिबाफ एक भरोसेमंद वार्ताकार के रूप में दिखते हैं. हालांकि, यह बात ईरान के अंदर उनके लिए मुश्किल भी पैदा कर सकती है, क्योंकि वहां अमेरिका के साथ नजदीकी को लेकर हमेशा संदेह बना रहता है.
गालिबाफ को अब एक संतुलन बनाना होगा. उन्हें देश के अंदर मजबूत रुख दिखाना है, ताकि जनता का समर्थन बना रहे, और साथ ही अमेरिका के साथ व्यावहारिक समझौता भी करना है, जिससे ईरान के लंबे समय के हित पूरे हो सकें.
गालिबाफ के बातचीत में होने के क्या हैं मतलब?
गालिबाफ की इस वार्ता में मौजूदगी को एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. एक घायल इस्लामिक रिपब्लिक ने अपने एक सैनिक-प्रशासक को अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी से बातचीत के लिए आगे किया है. उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है- विचारधारा और व्यवहारिकता, टकराव और समझौता, और प्रतिरोध व पुनर्निर्माण के बीच संतुलन बनाना. गालिबाफ इन विरोधाभासों को कैसे संभालते हैं, इससे न सिर्फ ईरान का भविष्य तय होगा, बल्कि खाड़ी क्षेत्र और पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति पर भी इसका असर पड़ेगा.




