क्या ईरान-अमेरिका सीज़फायर का गारंटर बना चीन? इस्लामाबाद वार्ता के पीछे बीजिंग का बड़ा गेम!
ईरान-अमेरिका सीज़फायर के पीछे चीन की भूमिका को लेकर बड़े सवाल उठ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, बीजिंग की कूटनीति और इस्लामाबाद वार्ता ने इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभाई.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक खेल सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनियों और ईरान के जवाबी रुख के बीच अचानक सीज़फायर की घोषणा ने दुनिया को चौंका दिया है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या इस पूरे घटनाक्रम के पीछे चीन की कोई बड़ी रणनीति काम कर रही थी?
खुफिया सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी इस पूरे मामले को और भी दिलचस्प बना रही है. कहा जा रहा है कि चीन ने पर्दे के पीछे रहकर ईरान को सीज़फायर के लिए तैयार किया और अमेरिका को भी बातचीत की टेबल पर आने के लिए राजी कराया. इस पूरी डील में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को केंद्र बनाया गया है.
क्या चीन ने ईरान को सीज़फायर के लिए मनाया?
सूत्रों के मुताबिक, चीन ने सीधे ईरान से बातचीत कर उसे युद्धविराम के लिए तैयार किया. बताया गया कि चीन की गारंटी पर ही अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए बीजिंग को अपनी सहमति का संदेश भेजा यानी इस सीज़फायर के पीछे चीन की कूटनीति बड़ी भूमिका में रही.
इस्लामाबाद में ही क्यों हो रही हैं शांति वार्ताएं?
सूत्र बताते हैं कि चीन चाहता था कि शुरुआती बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो. इसके पीछे रणनीतिक कारण भी हैं, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले 15 दिनों में चीन दौरे पर जाने वाले हैं, जहां आगे की बातचीत को अंतिम रूप दिया जा सकता है.
क्या ट्रंप को 'फेस सेविंग' का मौका दे रहा है चीन?
सूत्रों का कहना है कि 'ट्रंप की धमकियों और ईरान के जवाबी रुख के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी छवि बचाने के लिए एक सम्मानजनक रास्ते की जरूरत थी. ऐसे में बीजिंग की कूटनीति ने दखल दिया यानी ट्रंप की सख्त चेतावनियों के बाद उन्हें एक सम्मानजनक रास्ता चाहिए था, जिसे चीन की कूटनीति ने संभव बनाया.
ईरान क्यों चीन पर ज्यादा भरोसा कर रहा है?
सूत्रों के अनुसार, 'ईरानी ट्रंप की विश्वसनीयता पर भरोसा नहीं करते और ऐसे उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलनों में वे गारंटी के लिए चीन की ओर रुख करते है यानी ईरान को ट्रंप पर भरोसा नहीं है और ऐसे में वह चीन को एक भरोसेमंद गारंटर मान रहा है.
चीन को इस युद्ध से क्या नुकसान हो रहा था?
सूत्रों ने बताया कि, 'ईरान युद्ध के कारण चीन को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है, खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में. इसका सीधा असर उसके निर्यात-आधारित विकास मॉडल पर पड़ रहा है.' युद्ध की वजह से चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा था.
CPEC और ग्वादर पोर्ट पर क्यों बढ़ा खतरा?
सूत्रों के मुताबिक, 'अमेरिका-ईरान युद्ध का कोई भी असर- चाहे वह उग्रवाद (मिलिटेंसी) के रूप में हो, शरणार्थियों की बढ़ती संख्या हो या फिर चीनी नागरिकों और ग्वादर पोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले. यह सब पूरे कॉरिडोर की व्यवहार्यता (viability) के लिए गंभीर खतरा बन सकता है यानी अगर युद्ध बढ़ता तो चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) और ग्वादर पोर्ट की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा सकता था.
क्या पाकिस्तान पर पूरी तरह निर्भर है चीन?
सूत्रों ने साफ कहा कि चीन, तेहरान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह इस्लामाबाद पर निर्भर है ताकि CPEC का पूरा इकोसिस्टम सुरक्षित रह सके. पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस्लामाबाद में सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि 'सीज़फायर के बाद इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता की मेजबानी करना पाकिस्तान के लिए सम्मान की बात है.' इसके साथ ही उन्होंने सभी सुरक्षा और मेहमाननवाजी इंतजाम पुख्ता करने के निर्देश दिए.




