ईरान-अमेरिका जंग में भारत क्यों नहीं दिखा सका दम, पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने बता दी चूक, पाकिस्तान ऐसे मार गया बाजी
ईरान-इजराइल तनाव में भारत की भूमिका पर सवाल. यशवंत सिन्हा ने विदेश नीति को लेकर बड़ी चूक बताई, पाकिस्तान की मध्यस्थता पर बहस तेज.
मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और कथित सीजफायर के बीच अब भारत की विदेश नीति को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है. आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में भारत सक्रिय भूमिका निभाने के बजाय केवल 'दर्शक' बना रहा, जबकि पाकिस्तान ने मध्यस्थ बनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली. पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा के बयान के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि क्या भारत ने एक बड़ा कूटनीतिक अवसर गंवा दिया?
ईरान में 40 दिन के तनाव के बाद सीजफायर का दावा
अमेरिका और इजराइल पर ईरान में हमले के आरोपों के बीच तनाव बढ़ा. करीब 40 दिन बाद एक 'हल्का-फुल्का' सीजफायर होने की बात सामने आई. इस सीजफायर को पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना जा रहा. उन्होंने आगे कहा कि दावा है कि इस सीजफायर में पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई. पाकिस्तान की विदेश नीति को 'संतुलित और रणनीतिक' बताया जा रहा है. अमेरिका के साथ उसके मजबूत संबंधों का भी जिक्र किया जा रहा है. पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने पाकिस्तान को अमेरिका का करीबी बताया और कहा कि वहां के आर्मी चीफ को ट्रंप बुलाकर लंच करवाते हैं.
भारत की विदेश नीति पर सवाल क्यों उठे?
आरोप है कि भारत ने केवल 'शांति की अपील' तक खुद को सीमित रखा. विदेश मंत्रालय का बयान 'युद्ध समाप्त होना चाहिए, डायलॉग और डिप्लोमेसी होनी चाहिए' आलोचना यह कि भारत ने सक्रिय कूटनीतिक दबाव नहीं बनाया.
भारत क्यों नहीं दिखा सका दम?
दावा किया गया कि भारत तीनों देशों का मित्र होने के बावजूद निर्णायक भूमिका नहीं निभा सका. आरोप है कि भारत ने मौके पर ठोस पहल नहीं की इसे 'निष्क्रिय विदेश नीति' के रूप में देखा गया.पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि हम दम इसलिए नहीं दिखा सके कि जंग से ठीक दो दिन पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल दौरे पर गए और वहां के पीएम को गले लगाया और दुनिया को दिखा दिया है कि भारत के इजराइल के साथ खड़ा है मतलब अमेरिका के साथ खड़ा है.
इसके आगे उन्होंने कहा कि जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया तो हम अपने मालिकों को कैसे निराश कर सकते हैं यानी तंज कसते हुए कहा कि हम अपने वो हमारे मालिक हैं न! इसलिए हम खामोश रहे हैं कुछ नहीं कर सके.