यहां खुले में रखी जाती हैं लाशें, फिर भी नहीं आती बदबू! न जलाया-न दफनाया जाता शव
ट्रुंयान गांव दुनिया की उन चुनिंदा जगहों में से एक है, जहां अंतिम संस्कार की परंपरा पूरी तरह अलग है. यहां न तो शवों को जलाया जाता है और न ही जमीन में दफनाया जाता है, बल्कि खुले में रखा जाता है. यहां के लोग मौत को डरावनी चीज नहीं मानते हैं.
यहां लाशों को नहीं जाता जलाया और दफनाया
(Image Source: youtube- Evan J )दुनिया में अंतिम संस्कार के कई तरीके हैं. कहीं शव को जलाया जाता है, तो कहीं जमीन में दफनाया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी जगह के बारे में सुना है, जहां न तो शव जलाया जाता है और न ही दफनाया? Trunyan Village एक ऐसी ही अनोखी जगह है, जो अपनी अलग परंपराओं के कारण दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है.
यह गांव बाली के उत्तर-पूर्वी हिस्से में लेक बटूर के किनारे बसा है. यहां शव को खुले में रखा जाता है. हैरानी कि बात यह है कि इसके बावजूद वहां किसी तरह की बदबू महसूस नहीं होती है.
कहां है यह अनोखी जगह और कैसे पहुंचें?
ट्रुंयान गांव मुख्य शहरों से काफी दूर बै. यहां के कब्रिस्तान तक पहुंचने के लिए लगभग 15 मिनट की नाव यात्रा करनी पड़ती है, जो लेक बटूर के पानी से होकर गुजरती है. चारों ओर पहाड़, जंगल और सन्नाटा यह सफर अपने आप में ही एक रहस्यमयी एहसास देता है.
यहां क्यों नहीं जलाते या दफनाते शव?
इस गांव की परंपरा को Mepasah कहा जाता है. इस परंपरा के तहत शव को न तो जलाया जाता है और न ही जमीन में दफनाया जाता है. गांव वालों का मानना है कि शरीर सिर्फ एक खोल है, और आत्मा के जाने के बाद इसका कोई खास महत्व नहीं रह जाता. इसलिए वे शव को प्रकृति के हवाले कर देते हैं, ताकि वह धीरे-धीरे प्राकृतिक तरीके से खत्म हो जाए. यह सोच पुनर्जन्म की मान्यता से जुड़ी है, जहां मौत को अंत नहीं बल्कि एक नई शुरुआत माना जाता है.
लाश के साथ क्या किया जाता है?
यहां शव के साथ एक खास प्रक्रिया अपनाई जाती है:
- सबसे पहले शरीर को साफ किया जाता है.
- फिर उसे सफेद कपड़े में लपेटा जाता है.
- चेहरा खुला रखा जाता है.
- इसके बाद शव को बांस से बने पिंजरे में रखा जाता है.
- साथ में मृतक की कुछ निजी चीजें भी रखी जाती हैं.
- यहां सिर्फ उन लोगों के शव रखे जाते हैं, जो शादीशुदा हों और जिनकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई हो. बाकी लोगों के लिए अलग स्थान होते हैं.
बदबू क्यों नहीं आती?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि खुले में शव रखने के बावजूद यहां बदबू नहीं आती. इसकी वजह है एक खास पेड़ Taru Menyan है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस पेड़ से एक खास खुशबू निकलती है, जो शव से आने वाली बदबू को खत्म कर देती है.
परंपरा के पीछे की सोच
ट्रुंयान गांव के लोग मौत को डरावनी चीज नहीं मानते हैं. उनके लिए यह जीवन का एक प्राकृतिक हिस्सा है. वे मानते हैं कि आत्मा शरीर छोड़ देती है और शरीर केवल एक खाली वस्तु रह जाता है. इसलिए उसे प्रकृति में लौटाना ही सबसे सही तरीका है. हालांकि, यहां कुछ परंपराएं सख्त भी हैं, जैसे कुछ खास रिवाजों में महिलाओं का शामिल न होना.