Lebanon Crisis : कितना मजबूत है Hezbollah, जिसे लेबनान में निशाना बना रहा है इजराइल?
हिजबुल्लाह की ताकत, उसके घातक हथियार और इजरायल से टकराव को समझें. जानें ईरान से इसका कनेक्शन और क्यों लेबनान इस संघर्ष में सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है.
मिडिल ईस्ट की उलझी राजनीति में हिजबुल्लाह एक ऐसा नाम है, जो इजरायल की संप्रभुता और सुरक्षा दोनों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है. इजरायल और लेबनान की सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच यह संगठन फिर सुर्खियों में है. ईरान के समर्थन से मजबूत हुआ हिजबुल्लाह केवल एक मिलिशिया संगठन नहीं, बल्कि लेबनान में राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव रखने वाली ताकत भी है. लेबनान सरकार के इसके नेता मंत्री भी बनते रहते हैं. इसके पास एडवांस हथियार, ट्रेंड लड़ाके और मजबूत नेटवर्क है, जो इसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में अहम खिलाड़ी बनाता है.
हिजबुल्लाह किस बला का नाम है?
हिजबुल्लाह एक शिया इस्लामी संगठन है, जिसकी स्थापना 1980 के दशक में लेबनान में हुई थी. इसका मकसद इजरायल के प्रभाव का विरोध करना और लेबनान में शिया समुदाय की ताकत बढ़ाना था. यह संगठन एक साथ कई भूमिकाएं निभाता है. जैसे मिलिट्री ग्रुप, राजनीतिक पार्टी और सामाजिक सेवा प्रदाता. लेबनान की संसद और सरकार में भी इसका प्रभाव है. इसकी विचारधारा ईरान की इस्लामिक क्रांति से प्रेरित है. समय के साथ यह संगठन एक छोटे गुरिल्ला समूह से बदलकर एक शक्तिशाली सैन्य बल बन गया है.
ईरान से इसका क्या है कनेक्शन?
ईरान और हिजबुल्लाह का रिश्ता बेहद गहरा और रणनीतिक है. ईरान हिजबुल्लाह को वित्तीय मदद, हथियार और सैन्य प्रशिक्षण देता रहा है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इसके गठन और विस्तार में अहम भूमिका निभाई. हिजबुल्लाह को ईरान अपने क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाने के एक अहम साधन के रूप में देखता है. इसके जरिए ईरान इजरायल पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाता है. यही वजह है कि हिजबुल्लाह को अक्सर “ईरान का प्रॉक्सी” कहा जाता है.
हिजबुल्लाह के पास किस तरह के घातक हथियार?
हिजबुल्लाह के पास हजारों की संख्या में रॉकेट और मिसाइलें हैं, जिनमें शॉर्ट-रेंज से लेकर मीडियम-रेंज तक के हथियार शामिल हैं. ये मिसाइलें इजरायल के बड़े शहरों तक पहुंच सकती हैं. इसके अलावा एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और समुद्री मिसाइलें भी इसके जखीरे में हैं.
हिजबुल्लाह के हथियारों का जखीरा काफी विविध और आधुनिक माना जाता है. सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार इसके पास पारंपरिक गुरिल्ला हथियारों से लेकर उन्नत मिसाइल सिस्टम तक मौजूद हैं. प्रमुख हथियारों के नाम इस प्रकार हैं. इनमें
रॉकेट और मिसाइलें - कत्युशा रॉकेट, फजर-3, फजर-5, ज़ेलजाल, फतेह-110, एम-600 सीरियाई, स्कड मिसाइल, टी-टैंक मिसाइल, कॉर्नेट, मेटिस-एम, मिलान, ड्रोन, अबाबील, मोहाजेर, एयर डिफेंस सिस्टम - SA-7 Strela, SA-17 संभावित, एंटी-शिप मिसाइल, C-802, छोटे हथियार - AK-47 राइफल, स्नाइपर राइफल, मशीन गन, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड, IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) व अन्य.
खास बात यह है कि हिजबुल्लाह की ताकत सिर्फ हथियारों में ही नहीं, बल्कि इनके इस्तेमाल की रणनीति, सुरंग नेटवर्क और छिपे हुए लॉन्च सिस्टम में भी है, जो इसे इजरायल के लिए एक बड़ा खतरा बनाता है.
इजरायल टेंशन में क्यों?
इजरायल के लिए यह इसलिए सिरदर्द है क्योंकि यह “दो मोर्चों” का खतरा पैदा करता है - दक्षिण में गाजा और उत्तर में लेबनान. अगर बड़ा युद्ध होता है, तो हिजबुल्लाह एक साथ भारी रॉकेट हमले कर सकता है, जिससे इजरायल की रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ सकता है.
इजरायल क्यों बना रहा है निशाना
इजरायल हिजबुल्लाह को अपने अस्तित्व के लिए सीधा खतरा मानता है. सीमा पार से होने वाले रॉकेट हमले, घुसपैठ की कोशिशें और ईरान के साथ इसके रिश्ते इजरायल की चिंता बढ़ाते हैं. इजरायल की रणनीति है कि हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को कमजोर किया जाए, खासकर उसके मिसाइल ठिकानों और कमांड ढांचे को. इसी वजह से इजरायल समय-समय पर लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले करता है.
इजरायल-हिजबुल्लाह के फेर में लेबनान की गर्दन क्यों फंसी?
लेबनान इस पूरे टकराव में सबसे मुश्किल स्थिति में है. एक तरफ उसके भीतर हिजबुल्लाह जैसी ताकतवर मिलिशिया है, जो देश की राजनीति और सुरक्षा पर असर डालती है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल उसे सीधे खतरे के रूप में देखता है.
ईरान के समर्थन के कारण हिजबुल्लाह की गतिविधियां केवल लेबनान तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा बन जाती हैं. इसका नतीजा यह होता है कि इजरायल जब भी हिजबुल्लाह को निशाना बनाता है, उसका असर पूरे लेबनान पर पड़ता है- चाहे वह सैन्य हो या आर्थिक. कमजोर सरकार, आर्थिक संकट और आंतरिक राजनीतिक विभाजन के कारण लेबनान इस संघर्ष से खुद को अलग नहीं कर पाता, जिससे उसकी स्थिति और जटिल हो जाती है.