बांग्लादेश को लड़ाकू विमान बेचने की तैयारी में पाकिस्तान, भारत की कैसे बढ़ेगी मुश्किलें?

पाकिस्तान बांग्लादेश को लड़ाकू विमान बेचने की तैयारी में है. अगर यह डील होती है तो दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन बदल सकता है. जानिए, इससे भारत की सुरक्षा चुनौतियां कैसे बढ़ सकती हैं और क्षेत्रीय राजनीति पर इसका क्या असर पड़ेगा. क्या पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में भारत को घेरने की तैयारी में है.;

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Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 8 Jan 2026 2:07 PM IST

दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति में एक नया मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं. पाकिस्तान बांग्लादेश को लड़ाकू विमान बेचने की तैयारी में जुटा बताया जा रहा है. अगर यह रक्षा सौदा अमल में आता है, तो इसका असर सिर्फ इस्लामाबाद और ढाका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की सुरक्षा रणनीति और क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर भी सीधा प्रभाव पड़ सकता है. चीन-पाकिस्तान रक्षा सहयोग के बैकग्राउंड में देखी जा रही इस संभावित डील को रणनीतिक नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है.

क्या है पूरा मामला?

पाकिस्तान लंबे समय से अपने स्वदेशी और चीनी सहयोग से विकसित लड़ाकू विमानों के निर्यात की कोशिश कर रहा है. अब बांग्लादेश को संभावित ग्राहक के तौर पर देखा जा रहा है, जो अपने एयरफोर्स फ्लीट के आधुनिकीकरण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.

पाकिस्तान का नया गेम

दरअसल, पाकिस्तान ने भारत पर दबाव बनाने का नया गेम खेला है. पाकिस्तानी वायु सेना के अध्यक्ष जहीर अहमद बाबर सिद्धू ने बुधवार को एक बयान देकर भारतीय खेमे में हलचल पैदा करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के समकक्ष हसन महमूद खान ने JF-17 थंडर फाइटर जेट बेचने के मसले पर बातचीत जारी है. ऐसा कर पाकिस्तान न केवल हथियारों की आपूर्ति को लेकर अपनी महत्वाकांक्षा बढ़ा रहा है, बल्कि  बांग्लादेश के साथ संबंधों को मजबूत कर रहा है. अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान बांग्लादेश मिलकर भारत के आने वाले वर्षों में मुश्किलें पैदा कर सकते हैं.

पाकिस्तान के एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू मंगलवार के बयान में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश को सुपर मुश्शाक ट्रेनर विमानों की तेज डिलीवरी के साथ पूरी ट्रेनिंग और लॉन्ग-टर्म सपोर्ट इकोसिस्टम का आश्वासन दिया है.

क्षेत्रीय सुरक्षा को मिलेगी चुनौती

पाकिस्तान के इस फैसले से उसके बांग्लादेश के साथ सैन्य संबंध मजबूत होंगे. दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन बदलेगा. दोनों भारतीय दबदबे के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बन सकते हैं, जिससे नई दिल्ली की क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूती को चुनौती मिलेगी और उसे अपनी पूर्वी सीमा पर रक्षा पर ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा.

जहीर अहमद बाबर के बयान से साफ है कि अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद दक्षिण एशियाई देशों के बीच संबंध मजबूत हुए हैं, जिसके कारण तत्कालीन प्रधान मंत्री शेख हसीना को भारत भागना पड़ा, जिससे ढाका के नई दिल्ली के साथ संबंध टूट गए.

हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद इस्लामाबाद और ढाका ने 1971 के युद्ध के बाद पहली बार सीधा व्यापार फिर से शुरू किया है, जिससे बांग्लादेश को आजादी मिली थी. जबकि उनके सैन्य अधिकारियों ने कई बैठकें की हैं.

भारत के लिए चुनौती कैसे?

JF-17 थंडर, जो पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक मल्टी-रोल फाइटर मिलने से बांग्लादेश वायु सेना की AESA रडार, लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले की क्षमता में बढ़ोतरी होगी. बांग्लादेश की हवाई रक्षा मजबूती मिलेगी. भारत के साथ हवाई ताकत का अंतर कम होगा.

क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलेगा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह सौदा ऐतिहासिक तनावों से आगे बढ़कर गहरे रक्षा सहयोग का संकेत देता है. ढाका और इस्लामाबाद के बीच एक मजबूत रणनीतिक तालमेल बनाता है. पाकिस्तान द्वारा समर्थित एक अधिक सक्षम बांग्लादेश वायु सेना, पूर्वी उपमहाद्वीप में सैन्य संतुलन को बदल सकती है, जिससे भारत को इस अक्सर अनदेखी की जाने वाली सीमा पर अधिक संसाधन लगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.

भू-राजनीतिक मायने

यह सौदा बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद हुआ है, जो संभावित रूप से भारत से दूर क्षेत्रीय गठबंधनों के पुनर्गठन का संकेत देता है, जिससे नई दिल्ली के लिए नई रणनीतिक जटिलताएं पैदा होती हैं.

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