Begin typing your search...

अब 50 नहीं 500% टैरिफ लगाएंगे ट्रंप! रूसी तेल खरीद पर अमेरिका का बड़ा वार, भारत कैसे झेलेगा ट्रेड प्रेशर?

रूस से तेल खरीद को लेकर भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. अमेरिका में राष्ट्रपति Donald Trump के समर्थन से एक द्विदलीय बिल को मंजूरी मिली है, जिसके तहत रूस से तेल या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस प्रस्ताव का सीधा असर भारत, चीन और ब्राजील पर पड़ सकता है. अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि सस्ता रूसी तेल यूक्रेन युद्ध को फंड करता है. पहले ही टैरिफ तनाव झेल रहे भारत के लिए यह बिल व्यापारिक और कूटनीतिक चुनौती बन सकता है.

अब 50 नहीं 500% टैरिफ लगाएंगे ट्रंप! रूसी तेल खरीद पर अमेरिका का बड़ा वार, भारत कैसे झेलेगा ट्रेड प्रेशर?
X
( Image Source:  sora ai )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Published on: 8 Jan 2026 11:01 AM

भारत के लिए वैश्विक व्यापार मोर्चे पर नई चुनौती उभरती दिख रही है. अमेरिका में राष्ट्रपति Donald Trump के समर्थन से एक द्विदलीय बिल आगे बढ़ा है, जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कड़े आर्थिक दंड की इजाजत देता है. इस प्रस्ताव के तहत भारत और चीन जैसे देशों पर टैरिफ 500 प्रतिशत तक बढ़ाए जा सकते हैं. संकेत हैं कि यह फैसला अगले ही हफ्ते अमल में आ सकता है, जिससे बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है.

रिपब्लिकन सीनेटर Lindsey Graham ने बताया कि राष्ट्रपति ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है. डेमोक्रेटिक सीनेटर Richard Blumenthal के साथ पेश इस बिल का मकसद उन देशों को “सजा” देना है जो जानबूझकर रूसी तेल और यूरेनियम खरीदते हैं. सीनेट में इसे जल्द वोटिंग के लिए लाया जा सकता है, जिससे अमेरिकी नीति का रुख और सख्त हो सकता है.

यूक्रेन युद्ध और ‘तेल की राजनीति’

समर्थकों का तर्क है कि सस्ता रूसी तेल खरीदना, सीधे तौर पर यूक्रेन युद्ध को फंड करना है. सीनेटर ग्राहम ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को “असाधारण दबाव बनाने की ताकत” देगा, ताकि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करें. उनका दावा है कि यह कदम Vladimir Putin की युद्ध मशीनरी को कमजोर करेगा.

वोट टला, लेकिन संकेत साफ

हालांकि सीनेट और हाउस नेतृत्व ने फिलहाल वोटिंग टाल दी है, लेकिन ट्रंप के हालिया बयानों से स्पष्ट है कि वे भारत से आयात होने वाले सामान पर सीधे टैरिफ लगाने के पक्ष में हैं. अमेरिका, भारत के रूसी तेल आयात को निशाने पर रखकर व्यापक व्यापारिक दबाव बनाना चाहता है. यह रणनीति ऊर्जा के साथ-साथ निवेश और निर्यात पर भी असर डाल सकती है.

पहले भी बढ़ चुका है टैरिफ तनाव

पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ और रूसी तेल खरीद पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया था. इससे कुछ उत्पादों पर कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया. इस फैसले ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के रिश्तों में खटास पैदा की और व्यापार वार्ताएं ठहराव में चली गईं.

चीन-अमेरिका टकराव की मिसाल

अमेरिका-चीन संबंधों में भी टैरिफ युद्ध की कड़वी मिसाल मौजूद है. वॉशिंगटन ने चीनी वस्तुओं पर 145 प्रतिशत शुल्क लगाया, जिसके जवाब में बीजिंग ने अमेरिकी उत्पादों पर 125 प्रतिशत टैरिफ ठोक दिया. इस पृष्ठभूमि में भारत को डर है कि वही सख्ती अब उसके खिलाफ भी अपनाई जा सकती है.

पीएम मोदी पर ट्रंप की टिप्पणी

हाल ही में एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi जानते थे कि वे खुश नहीं हैं. उन्होंने तारीफ के साथ चेतावनी भी दी कि टैरिफ “बहुत जल्दी” बढ़ाए जा सकते हैं. यह बयान बताता है कि कूटनीति के साथ-साथ दबाव की नीति भी साथ चल रही है.

अटकी बातचीत, भारत का सख्त रुख

भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद सुलझाने की बातचीत फिलहाल ठप है. अमेरिका कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करवाना चाहता है, जबकि नई दिल्ली अपने किसानों और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा पर अडिग है. ऐसे में रूसी तेल को लेकर प्रस्तावित अमेरिकी बिल, भारत के लिए कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर नई परीक्षा बनकर सामने आ रहा है.

डोनाल्ड ट्रंपIndia News
अगला लेख