Strait of Hormuz से गुजर रहे तेल टैंकर पर हमला, 15 भारतीय समेत 20 लोग थे सवार; क्या दुनिया में पैदा होगा तेल संकट?

ओमान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हमले के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. ईरान की चेतावनी के बाद जहाजों की आवाजाही रुकने लगी है, जिससे तेल की कीमतों में भारी उछाल और दुनिया भर में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है.

होर्मुज में तेल टैंकर पर हमला 

(Image Source:  @NewsAlgebraIND/@BRICSinfo )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 1 March 2026 6:10 PM IST

Iran Israel War, Oil Tanker Attack in Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ओमान के पास दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक हार्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर पर हमला हुआ. इस हमले में 4 चालक दल के सदस्य घायल हो गए. जहाज पर मौजूद सभी लोगों को तुरंत बाहर निकालना पड़ा. इसी बीच ओमान के डुक्म पोर्ट पर भी ड्रोन से हमला होने की खबर सामने आई है, जिससे पूरे क्षेत्र में डर और अनिश्चितता बढ़ गई है.

ओमान के समुद्री सुरक्षा केंद्र के मुताबिक, पलाऊ झंडे वाला तेल टैंकर 'Skylight' मुसंदम प्रांत के खसाब पोर्ट से करीब 5 नॉटिकल मील दूर निशाना बनाया गया. जहाज पर कुल 20 लोग थे. इनमें 15 भारतीय और 5 ईरानी नागरिक शामिल थे. सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन  4 लोग घायल बताए जा रहे हैं जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. 

होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर खतरा क्यों बढ़ा?

  • तेल टैंकर पर यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान की सेना Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने चेतावनी दी थी कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए बंद है. हालांकि, ईरान ने आधिकारिक तौर पर पूरी नाकेबंदी का ऐलान नहीं किया, लेकिन कई जहाजों को रेडियो पर चेतावनी दी गई कि इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं है.
  • ब्रिटिश नौसेना ने कहा कि ये आदेश कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं, लेकिन जहाजों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. यूरोपीय नौसैनिक मिशन के अधिकारियों ने भी माना कि समुद्री यातायात तेजी से प्रभावित हो रहा है.
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. कतर का LNG (गैस) निर्यात भी बड़े पैमाने पर इसी मार्ग से होता है. इसलिए इसे दुनिया का सबसे अहम 'ऑयल चोक पॉइंट' माना जाता है.
  • तनाव बढ़ने के बाद कई तेल कंपनियों और शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से अपने जहाज रोक दिए हैं. कुछ जहाज यूएई के फुजैराह के पास खड़े दिखाई दिए, जबकि कई टैंकर वापस लौट गए. जर्मनी की Hapag-Lloyd और फ्रांस की CMA CGM जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों ने भी यहां से गुजरना रोक दिया है.
  • मरीन बीमा कंपनियों ने भी इस क्षेत्र के लिए बीमा कवर बंद कर दिया है, जिससे जहाज चलाना बेहद जोखिम भरा हो गया है.
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के तीन जहाजों को भी ईरान ने होर्मुज़ में प्रवेश से रोक दिया. कुछ जहाज यूएई और पाकिस्तान के बंदरगाहों पर रोक दिए गए.

कैसे शुरू हुआ संकट?

यह पूरा संकट अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसमें ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया था. इसके बाद पूरे क्षेत्र में मिसाइल हमले और सैन्य तनाव बढ़ गया.  

क्या 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचेगी तेल की कीमत?

तेल बाजार में भी इसका असर दिखने लगा है. आशंका है कि कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा तो दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है.

Similar News