रूस से जंग में यूक्रेन का साथ देने वाला US अब क्यों हुआ बेबस? ट्रंप ने जेलेंस्की के सामने क्यों फैलाए हाथ, कहा - 'Iran के ड्रोन से बचा लो'

रूस-यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्ध की रणनीति बदल दी है, जहां सस्ते लेकिन घातक ड्रोन सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं. इसी चुनौती से निपटने के लिए अमेरिका अब यूक्रेन के अनुभव और तकनीक की ओर देख रहा है.

( Image Source:  Sora AI )
Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 6 March 2026 2:44 PM IST

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका ने यूक्रेन को हथियार, खुफिया जानकारी और अरबों डॉलर की मदद देकर खुद को उसका सबसे बड़ा समर्थक बताया रूस को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. अब उसी अमेरिका को एक नई सैन्य चुनौती ने असहज कर दिया है. ईरान के सस्ते लेकिन घातक ड्रोन युद्ध के मैदान में तेजी से ताकतवर हथियार बनकर उभरे हैं. इन ड्रोन हमलों से निपटने का सबसे ज्यादा अनुभव यूक्रेन को है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में लगातार इनका सामना किया है. यही वजह है कि अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से सहयोग बढ़ाने और एंटी-ड्रोन रणनीति साझा करने की अपील की है. यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहली बार यह संकेत मिला है कि आधुनिक युद्ध में कभी मदद देने वाला देश भी किसी दूसरे से रणनीतिक सीख लेने को मजबूर हो सकता है.

क्या बदला कि अमेरिका को यूक्रेन से मदद मांगनी पड़ी?

रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को हथियार, फंड और खुफिया मदद देकर उसका सबसे बड़ा समर्थक बनने का दावा किया था, लेकिन समय के साथ युद्ध का स्वरूप बदल गया है. ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सस्ती लेकिन घातक तकनीक इस संघर्ष का मुख्य हथियार बन चुकी है. इसी कारण अब वही अमेरिका, जिसने अरबों डॉलर की मदद दी, यूक्रेन के अनुभव और तकनीक की तरफ देखने लगा है. खासकर ईरानी ड्रोन के खिलाफ लड़ाई में यूक्रेन ने जो तकनीक और रणनीति विकसित की है, वह अमेरिका के लिए भी उपयोगी बनती जा रही है.

डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की से क्या कहा?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया बातचीत में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से कहा कि ईरान के ड्रोन से निपटने के लिए अमेरिका को यूक्रेन के अनुभव और तकनीक की जरूरत है. ट्रंप ने संकेत दिया कि यूक्रेन ने कम लागत वाले एंटी-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और मोबाइल एयर डिफेंस में काफी सफलता हासिल की है. यही वजह है कि उन्होंने यूक्रेन से सहयोग बढ़ाने और तकनीकी साझेदारी की इच्छा जताई.

ईरानी ड्रोन क्यों बन गए हैं अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए चुनौती?

ईरान द्वारा विकसित शाहेद-136 जैसे कामिकाजे ड्रोन युद्ध के मैदान में बेहद खतरनाक साबित हुए हैं. ये ड्रोन सस्ते होते हैं, लंबी दूरी तय कर सकते हैं और बड़ी संख्या में एक साथ छोड़े जा सकते हैं. रूस ने इन्हें यूक्रेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया. यही ड्रोन तकनीक अब मध्य-पूर्व और दूसरे क्षेत्रों में भी फैल रही है. अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए चिंता यह है कि अगर यह तकनीक व्यापक हो गई तो पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम पर भारी दबाव पड़ सकता है.

यूक्रेन ने ड्रोन युद्ध में क्या नई रणनीतियां विकसित कीं?

लगातार हमलों का सामना करते हुए यूक्रेन ने कई नई रणनीतियां विकसित कीं. इसमें सस्ते एंटी-ड्रोन गन, रेडियो-फ्रीक्वेंसी जैमिंग, मोबाइल एयर डिफेंस यूनिट और ड्रोन-वर्सेस-ड्रोन टेक्नोलॉजी शामिल हैं. यूक्रेन ने स्थानीय कंपनियों और स्टार्टअप्स की मदद से तेजी से नई तकनीक तैयार की. यही कारण है कि कई मामलों में यूक्रेन का अनुभव अब पश्चिमी देशों से भी आगे माना जा रहा है.

इन देशों को क्यों पड़ी यूक्रेन की जरूरत?

सिर्फ अमेरिका ही नहीं, ईरान इजरायल युद्ध से प्रभावित यूएई, कतर, अमीरात, बहरीन व अन्ज देशों ने भी जेलेंस्की इस मामले में सहयोग की अपील की है. जेंलेंस्की ने माना कि ईरान इजरायल युद्ध में ये जोखिम हैं. इसलिए, उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रीय हित को आगे बढ़ाने के लिए संकट का फायदा उठाने के मकसद से सभी के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हो गए हैं. उन्होंने खाड़ी के पार - संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में - अपने समकक्षों से बात की है और ईरानी हमले से उनके सैन्य ठिकानों और नागरिक बुनियादी ढांचे की रक्षा में मदद करने के लिए "ठोस कदम" भरोसा दिया है.

क्या अमेरिका की पारंपरिक सैन्य ताकत इस नई चुनौती के सामने कमजोर पड़ रही है?

अमेरिका के पास दुनिया की सबसे उन्नत सैन्य तकनीक है, लेकिन पारंपरिक सिस्टम अक्सर महंगे और जटिल होते हैं. उदाहरण के लिए किसी मिसाइल को मार गिराने के लिए कई लाख डॉलर की इंटरसेप्टर मिसाइल का इस्तेमाल करना पड़ सकता है, जबकि हमलावर ड्रोन की कीमत कुछ हजार डॉलर ही होती है. इस असंतुलन ने नई चुनौती पैदा की है. इसलिए अमेरिका अब सस्ते और तेज समाधान की तलाश में है, जिसमें यूक्रेन का अनुभव मददगार हो सकता है.

क्या इससे अमेरिका-यूक्रेन संबंधों का नया चरण शुरू होगा?

इंटरनेशनल एक्सपर्ट का मानना है कि यह स्थिति अमेरिका-यूक्रेन रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जा सकती है. पहले जहां अमेरिका मुख्य रूप से मदद देने वाले की भूमिका में था, वहीं अब तकनीकी सहयोग और अनुभव साझा करने का दौर शुरू हो सकता है. इससे रक्षा उद्योग, ड्रोन टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग देखने को मिल सकता है.

इस घटनाक्रम का वैश्विक रणनीति पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर अमेरिका वास्तव में यूक्रेन से एंटी-ड्रोन तकनीक और रणनीति सीखता है, तो यह वैश्विक सैन्य संतुलन में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा. इससे यह भी स्पष्ट होता है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ बड़ी सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि नवाचार, सस्ती तकनीक और तेजी से अनुकूलन भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं.

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