नेपाल में 'Gen Z' का दबदबा! मैथिली बोलने वाले बालेन शाह, Nepal की राजनीति के कैसे बन गए 'बादशाह'?
नेपाल की राजनीति में उभर रहे नए चेहरे बालेन शाह प्रधानमंत्री पद की रेस में आगे हैं. जानिए रैपर से काठमांडू मेयर और अब पीएम दावेदार बनने तक की पूरी कहानी.
नेपाल की राजनीति में इन दिनों एक नया चेहरा सबसे ज्यादा चर्चा में है- Balendra Shah, जिन्हें लोग बालेन शाह के नाम से जानते हैं. पूर्व रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह अब देश के प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे है. हाल ही में हुए नेपाल के आम चुनावों की मतगणना के रुझान बता रहे हैं कि उनकी पार्टी Rastriya Swatantra Party (RSP) संसद की बड़ी ताकत बनकर उभर रही है.
दिलचस्प बात यह है कि बालेन शाह ने अपनी प्रधानमंत्री पद की चुनावी मुहिम की शुरुआत काठमांडू या पहाड़ी इलाकों से नहीं, बल्कि Janakpur से की. यह वही शहर है जिसे Goddess Sita यानी माता जानकी की जन्मभूमि माना जाता है. यहां अपने पहले बड़े भाषण में उन्होंने मैथिली भाषा में जनता को संबोधित करते हुए कहा कि Sarvapratham, Mata Janaki ke pranaam,. इस एक वाक्य ने ही उन्हें तराई और मिथिला क्षेत्र के लोगों से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया.
क्या नेपाल की राजनीति में उभर रहा है नया चेहरा?
नेपाल में शुक्रवार को हुए आम चुनावों की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की पार्टी RSP 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा की 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाती नजर आ रही है. खास बात यह है कि बालेन शाह खुद KP Sharma Oli के खिलाफ झापा-5 सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. ओली नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) के बड़े नेता हैं. इसके बावजूद रुझानों में शाह को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है. अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो नेपाल की राजनीति में दशकों से कायम पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है.
बालेन शाह की जीत क्यों मानी जा रही है ऐतिहासिक?
नेपाल की राजनीति लंबे समय से पहाड़ी मूल के ब्राह्मण और क्षत्रिय नेताओं के प्रभाव में रही है. ऐसे में अगर बालेन शाह प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह सत्ता के समीकरण में बड़ा बदलाव माना जाएगा. बालेन शाह को मधेशी समुदाय से जुड़ा माना जाता है. मधेशी लोग नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में रहते हैं, जो भारत की सीमा से सटा हुआ इलाका है. इस क्षेत्र में मैथिली, भोजपुरी, अवधी और हिंदी जैसी भाषाएं बोली जाती हैं, जिनका सांस्कृतिक रिश्ता भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश से भी जुड़ता है.
मधेशी पहचान इतनी अहम क्यों है?
नेपाल की आबादी का करीब एक तिहाई हिस्सा मधेशी समुदाय से जुड़ा माना जाता है. लंबे समय तक यह समुदाय राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व की कमी को लेकर आंदोलन करता रहा है. मधेशी आंदोलन (Madhesi Andolan) जैसे बड़े आंदोलनों ने नेपाल की राजनीति को कई बार झकझोरा है. ऐसे में अगर मधेशी पृष्ठभूमि का कोई नेता प्रधानमंत्री बनता है, तो इसे नेपाल के सामाजिक और राजनीतिक संतुलन के लिए एक बड़ा मोड़ माना जाएगा.
रैपर से मेयर और अब प्रधानमंत्री पद तक कैसे पहुंचे बालेन शाह?
राजनीति में आने से पहले बालेन शाह एक लोकप्रिय रैपर थे. वे 'Balen' नाम से म्यूजिक बनाते थे और अपने गीतों में सामाजिक समस्याओं, भ्रष्टाचार और सिस्टम की खामियों को उजागर करते थे. साल 2022 में उन्होंने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में Kathmandu के मेयर का चुनाव लड़ा और बड़े राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को हराकर सबको चौंका दिया. इस जीत ने उन्हें युवाओं के बीच एक एंटी-एस्टैब्लिशमेंट नेता के रूप में स्थापित कर दिया.
मेयर रहते हुए क्या किया बालेन शाह ने?
- काठमांडू के मेयर के रूप में बालेन शाह ने कई प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया.
- उनकी प्राथमिकताओं में शामिल थे-
- शहर में कचरा प्रबंधन की समस्या को सुलझाना
- अवैध अतिक्रमण हटाना
- ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना
- सार्वजनिक जगहों और धरोहर स्थलों का संरक्षण
- नए पार्क और सार्वजनिक स्थान विकसित करना. हालांकि, अवैध निर्माण तोड़ने और नदी किनारे बसे लोगों को हटाने जैसे फैसलों को लेकर उन्हें आलोचना का भी सामना करना पड़ा.
युवाओं और Gen Z में क्यों लोकप्रिय हैं बालेन शाह?
बालेन शाह की राजनीति का सबसे बड़ा आधार नेपाल के युवा और Gen Z माने जा रहे हैं.
उन्होंने अपनी चुनावी मुहिम में युवाओं को रोजगार, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और पारदर्शी शासन जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी.
जनवरी में मेयर पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने RSP के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और खुद को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया.
मैथिली में भाषण देकर क्या मैसेज दिया?
जनकपुर में मैथिली में दिया गया उनका भाषण सिर्फ भाषाई प्रयोग नहीं था, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी था. मैथिली भाषा नेपाल और भारत के मिथिला क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बोली जाती है. ऐसे में इस भाषा में भाषण देकर बालेन शाह ने यह संकेत दिया कि वे मधेश क्षेत्र और उसकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना चाहते हैं.
क्या बालेन शाह बदल देंगे नेपाल की राजनीति?
अगर बालेन शाह प्रधानमंत्री बनते हैं, तो नेपाल की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
एक्सपर्ट का कहना है कि उनकी सरकार का फोकस इन मुद्दों पर हो सकता है-
- भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई
- पारदर्शी शासन
- युवाओं को ज्यादा अवसर
- संघीय व्यवस्था को मजबूत करना
- नेपाल में हाल ही में हुए युवा प्रदर्शनों ने भी यह संकेत दिया है कि देश की नई पीढ़ी पारंपरिक राजनीति से अलग बदलाव चाहती है.