एक दिन में ही सैकड़ों मिलियन डॉलर स्वाहा! आगे और कितना बोझ? America को Iran के साथ कितनी महंगी पड़ने वाली है ये जंग?

ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव अमेरिका के लिए हर दिन अरबों डॉलर का बोझ बनता जा रहा है. सिर्फ पहले 24 घंटे में ही सैकड़ों मिलियन डॉलर खर्च होने के अनुमान सामने आए हैं. अगर यह जंग हफ्तों तक चली, तो सवाल उठता है—क्या अमेरिका इस भारी आर्थिक कीमत को लंबे समय तक झेल पाएगा?

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Edited By :  समी सिद्दीकी
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US-Iran-Israel War: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा टकराव शनिवार को एक नए चरण में पहुंच गया. 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर जोरदार हमले किए. इन हमलों में सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई मारे गए. इस ऑपरेशन को अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी कहा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह अभियान चार से पांच हफ्तों तक चल सकता है, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका मध्य पूर्व में एक और युद्ध को लंबे समय तक जारी रख सकता है और इसकी कुल कीमत क्या होगी.

क्या है ऑपरेशन एपिक फ्यूरी?

28 फरवरी को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर आठ मिनट का एक वीडियो पोस्ट कर पुष्टि की कि अमेरिका ने ईरान के अंदर एक “बड़ा सैन्य अभियान” चलाया है. बाद में पेंटागन ने बताया कि इस मिशन का नाम “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” रखा गया है. ट्रंप ने कहा कि इस अभियान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके. उन्होंने कहा, “हम उनके मिसाइलों को नष्ट कर देंगे और उनकी मिसाइल इंडस्ट्री को पूरी तरह खत्म कर देंगे.”

ईरान के कितने ठिकानों को किया गया टारगेट

अमेरिकी सेना के मुताबिक, शनिवार से शुरू हुए इस अभियान में ईरान के 1,250 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया गया है. अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अलग बयान में कहा कि 11 ईरानी जहाजों को भी निशाना बनाकर नष्ट किया गया. रिपोर्टों के मुताबिक, इस अभियान में हवाई हमले, समुद्र से दागी गई क्रूज मिसाइलें और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों पर किए हमले शामिल थे.

अमेरिका के लिए कितना महंगा पड़ेगा ये ऑपरेशन?

चल रहे किसी सैन्य अभियान की कुल लागत का अनुमान लगाना मुश्किल होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह युद्ध अमेरिका को कुल मिलाकर कितना महंगा पड़ेगा. अल जज़ीरा ने एक न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया कि, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले 24 घंटों में अमेरिका ने लगभग 779 मिलियन डॉलर खर्च किए हो सकते हैं.

हमले से पहले की सैन्य तैयारियों, जैसे विमानों की तैनाती, एक दर्जन से ज्यादा नौसैनिक जहाजों की तैनाती और क्षेत्रीय संसाधनों को सक्रिय करने पर करीब 630 मिलियन डॉलर अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है.

सेंटर फॉर न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के मुताबिक, यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड जैसे एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को ऑपरेट करने में प्रतिदिन लगभग 6.5 मिलियन डॉलर का खर्च आता है. इसके अलावा उपकरणों के नुकसान की लागत भी जुड़ी हुई है. कम से कम तीन अमेरिकी लड़ाकू विमान कुवैत में मार गिराए गए, जिसे अमेरिकी अधिकारियों ने “फ्रेंडली फायर” की घटना बताया है.

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