ट्रंप को प्राइवेट कॉल के बाद मौत की बमबारी! क्या सऊदी क्राउन प्रिंस सलमान ने लिखी खामेनेई की 'द एंडिंग स्टोरी' ?
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के पीछे सऊदी अरब का हाथ बताया जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप को प्राइवेट कॉल किए थे, और ईरान पर हमले की बात कही थी.
Israel-Iran War News: इजराइल और ईरान ने ज्वाइंट ऑपरेशन में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को मार गिराया. उनके घर पर बम बरसाए गए, जिसमें उनके परिवार के लोगों की भी मौत हो गई. ऐसा माना जा रहा है कि इस हमले को कराने में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का बड़ा हाथ था. उन्होंने ही दोनों देशों (इजराइल और अमेरिका) को उकसाकर ये हमले कराए.
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले महीने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कई निजी फोन कॉल किए. इस दौरान उन्होंने ईरान पर हमले के लिए दबाव डाला था.
बता दें, सऊदी और ईरान का लंबे वक्त से 36 का आंकड़ा रहा है. यही वजह मानी जा रही है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरान पर हमला कराया. खास बात यह रही कि कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने बयान दिया था कि ईरान न्यूक्लियर पर बातचीत करना चाहता है. इसके बावजूद भी हमला होना काफी हैरान करने वाला माना गया.
ईरान और सऊदी में क्या है विवाद?
- सऊदी और ईरान के बीच रिश्ते हाल ही में बेहतर होने शुरू हुए थे, लेकिन ये हमेशा से खराब रहे हैं. इसका पहला कारण आइजियोलोजी माना जाता है. ईरान शिया मुस्लिम मुल्क है और सऊदी अरब पूरी तरह से सुन्नी मुल्क. ऐसे में दोनों में अकसर वैचारिक मतभेद देखने को मिलते हैं.
- दूसरा इसका बड़ा कारण हूती भी माने जाते हैं, जो यमन में एक्टिव हैं और देश के ज्यादातर हिस्से पर काबिज़ हैं और बाकी पर सऊदी अरब का शासन है. सऊदी अरब सिक्योरिटी फोर्स और हूति के बीच अकसर गोलाबारी होती है. हूतियों को ईरान का पूरी तरह से सपोर्ट हासिल है और इस्लामिक रिपब्लिक लड़ाकों को हथियार मुहैया कराने का काम करता है. यही वजह है सऊदी अरब और ईरान के बीच 36 का आंकड़ा है.
- ईरान और सऊदी अरब के रिश्तों में उस वक्त भी खटास आ गई थी जब 2016 में सऊदी अरब ने एक शिया धर्मगुरु निम्र अल-निम्र को फांसी दी थी. इसके बाद तेहरान में सऊदी दूतावास पर हमला हुआ था. इस घटना के बाद सऊदी अरब ने ईरान से राजनयिक संबंध तोड़ दिए थे.
- दोनों सुन्नी और शिया मुल्क के बीच तेल उत्पाद को लेकर भी मतभेद हैं. दोनों देश दुनिया के बड़े तेल उत्पादक हैं. ओपेक (OPEC) के अंदर भी दोनों के बीच उत्पादन और कीमतों को लेकर मतभेद देखने को मिले हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन सभी वजहों से सऊदी परेशा था और वह नहीं चाहता था कि मिडिल ईस्ट में ईरान का वर्चस्व बढ़े.
क्या रिश्तों में आए थे सुधार?
मार्च 2023 में चीन की मध्यस्थता से दोनों देशों ने संबंध बहाल करने का समझौता किया था. इसके तहत दूतावास दोबारा खोलने और रिश्ते सामान्य करने पर सहमति बनी थी. लेकिन, अब हमले के बाद फिर से रिश्ते बिगड़ गए हैं.
जनवरी में क्राउन प्रिंस ने कहा था कि वे अपने देश के हवाई क्षेत्र या जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देंगे. उन्होंने कहा था कि सऊदी अरब ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा और वॉशिंगटन तथा तेहरान से बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने की अपील की थी.




