शेख हसीना को हटाने वाले छात्रों का फ्लॉप शो! सड़क की ताकत वोट में नहीं बदली, BNP की आंधी में उड़ गई NCP?

Bangladesh Election Result 2026 में छात्र नेताओं की पार्टी NCP को उम्मीद के उलट सिर्फ 6 सीटें मिलीं. BNP को भारी बढ़त के बीच सत्ता विरोधी लहर भी NCP के काम नहीं आई.;

By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 13 Feb 2026 2:54 PM IST

बांग्लादेश की राजनीति में जुलाई–अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन ने सत्ता की बुनियाद हिला दी थी. शेख हसीना को न केवल पीएम पद छोड़ना पड़ा, बल्कि देश छोड़ने पर भी मजबूर हुईं. उस आंदोलन की अगुवाई करने वाले छात्र नेता जब चुनावी मैदान में उतरकर ‘नई राजनीति’ का दावा किया, तो उम्मीद थी कि सत्ता विरोधी लहर उन्हें बड़ा फायदा देगी. लेकिन ये क्या, बांग्लादेश चुनाव 2026 के नतीजों ने तस्वीर उलट दी. सड़क की ताकत के दम पर चुनावी मैदान में उतरी नेशनल सिटीजन पार्टी का पूरा प्रदर्शन फ्लॉप शो साबित हुई. NCP 300 में से सिर्फ 6 सीट ही जीत पाई.

नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP), जिसे छात्र नेताओं ने बनाया था, 300 में से 299 सीटों पर हुए चुनाव में सिर्फ 6 सीटों तक सिमट गई. इसके उलट, Bangladesh Nationalist Party (BNP) 200 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाती दिख रही है और Tarique Rahman के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ नजर आ रहा है.

कितनी हुई वोटिंग, क्या कहती है तस्वीर?

चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत करीब 48% रहने का अनुमान है. यानी आधे से ज्यादा मतदाता मतदान से दूर रहे. विश्लेषकों का मानना है कि Sheikh Hasina की पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक का बड़ा हिस्सा वोटिंग से दूर रहा, जिससे चुनावी समीकरण एकतरफा हो गए. कम मतदान यह भी संकेत देता है कि देश का बड़ा वर्ग अब भी असंतुष्ट है.

छात्र नेताओं की पार्टी NCP क्यों नहीं चली? 5 बड़ी वजह

1. संगठन की कमजोरी

छात्र आंदोलन की ऊर्जा को बूथ स्तर के संगठन में बदलना आसान नहीं था. BNP जैसी पुरानी पार्टी के कैडर नेटवर्क के सामने NCP कमजोर दिखी.

2. गठबंधन की उलझन

NCP ने Jamaat e Islami Bangladesh के साथ गठबंधन किया. इससे उदारवादी समर्थक नाराज हुए. महिला नेताओं के इस्तीफे और अंदरूनी खींचतान ने पार्टी की साख को नुकसान पहुंचाया.

3. अति-आत्मविश्वास

छात्र आंदोलन की सफलता को चुनावी जीत मान लेना बड़ी रणनीतिक भूल साबित हुई. कई सीटों पर प्रचार कमजोर रहा और स्थानीय समीकरणों को समझने में चूक हुई.

4. तीसरे विकल्प की दुविधा

बांग्लादेश चुनाव आखिरकार BNP बनाम अन्य दलों की लड़ाई में सिमट गया. ऐसे में मतदाताओं ने शेख हसीना की पार्टी के चुनावी मैदान न होने पर ‘स्थिर विकल्प’ को प्राथमिकता दी.

5. भरोसा कायम नहीं रखा पाए पार्टी के नेता

नाहिद इस्लाम ने ढाका-11 से मामूली अंतर से जीत दर्ज की. अख्तर हुसैन – रंगपुर-4 सीट से जीत करीब तय है. कुछ अन्य सीटों पर करीबी मुकाबले हुए, लेकिन पार्टी कुल मिलाकर 3–6 सीटों के दायरे में ही सिमटती नजर आ रही है. फिलहाल, छह सीटों पर बढ़त है. कुल मिलाकर पार्टी संसद में प्रतीकात्मक उपस्थिति तक ही सीमित रह गई।

क्या बदल गया बांग्लादेश की राजनीति?

बांग्लादेश में 18 महीने पहले हुए छात्र आंदोलन की नैतिक जीत चुनावी सफलता में नहीं बदली. इसका जवाब यह है कि वहां की पारंपरिक राजनीतिक ढांचे की पकड़ अब भी मजबूत है. कम मतदान ने लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर सवाल खड़े किए हैं.

बांग्लादेश चुनाव परिणाम से साफ हो गया है कि सड़क पर क्रांति और बैलेट बॉक्स की जीत अलग-अलग लड़ाइयां हैं. छात्र नेताओं ने सत्ता की इमारत हिलाई जरूर, लेकिन उसे अपने नाम करने में कामयाब नहीं हो सके. अब नजर इस पर होगी कि नई सरकार देश को राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय संतुलन की ओर में कैसे ले जाती है.

NCP के बुरा हाल होने का क्या है मतलब?

बांग्लादेश छात्र नेताओं की पार्टी NCP ने जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन किया था. इस मसले को लेकर पार्टी में झगड़ा शुरू हो गया. ज्यादातर महिला नेताओं ने पार्टी छोड़ दी.छात्र नेताओं के बीच खुद को बड़े नेता के तौर पर प्रोजेक्ट करने की होड़ लग गई. इससे भी एनसीपी को भारी नुकसान हुआ. इसके अलावा जमात ए इस्लामी के साथ गठबंधन करने से महिलाओं का वोट नहीं मिला. कट्टरपंथी विचारधारा को समर्थन देने का आरोप लगा. जबकि उनसे उदारवादी होने की उम्मीद थी. छात्र आंदोलन सेक्युलर और समावेशी बदलाव के लिए था. छात्र नेता डॉ. तसनीम जारा और महफूज आलम ने पार्टी छोड़ दी. इसके अलावा, छात्र नेताओं ने हिंसक प्रदर्शन का सहारा लेकर सरकार तो गिरा दी, लेकिन बूथ स्तर से लेकर ऊपर तक एक संगठन खड़ा करने में नाकाम रहे

National Citizen Party (NCP) का प्रोफाइल

बांग्लादेश की राजनीति में उभरी नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) जुलाई–अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन की पैदाइश मानी जाती है. यह वही आंदोलन था, जिसने तत्कालीन सत्ता के खिलाफ बड़ा जनआक्रोश खड़ा किया. आंदोलन से निकले युवा नेताओं ने नई राजनीति और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन के नारे के साथ पार्टी बनाई.

पार्टी को शुरुआती नैतिक समर्थन अंतरिम व्यवस्था के दौर में मिला, जहां Muhammad Yunus की भूमिका चर्चा में रही. हालांकि, औपचारिक तौर पर NCP खुद को स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करती रही.

कितनी सीटों पर लड़ी चुनाव?

छात्र आंदोलन से उपजी नेशनल सिटीजन पार्टी, बांग्लादेश की 300 में से 299 संसदीय सीटों पर मतदान हुआ. NCP ने गठबंधन के तहत लगभग 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे. पार्टी ने Jamaat-e-Islami Bangladesh के साथ समझौता किया, जिसने चुनावी रणनीति को प्रभावित किया.

नेशनल सिटीजन पार्टी ने सत्ता परिवर्तन के आंदोलन से उम्मीदों की उड़ान जरूर भरी, लेकिन चुनावी राजनीति की हकीकत ने उसे जमीन दिखा दी. चुनाव परिणाम से साफ है कि बांग्लादेश के लोगों में बदलाव की चाहत तो है, लेकिन मतदाता स्थिर और संगठित विकल्प को प्राथमिकता देते हैं. अब NCP के सामने चुनौती है, क्या वह खुद को एक दीर्घकालिक राजनीतिक ताकत में बदल पाएगी या छात्र आंदोलन तक ही सीमित रह जाएगी?

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