कीबोर्ड पर काम करने वाले सावधान! AI खाने वाला है आपकी नौकरी, HyperWrite के सीईओ ने बताया करियर बचाने का तरीका

कंप्यूटर पर बैठकर होने वाले काम अब पहले जितने सुरक्षित नहीं माने जा रहे. AI तेजी से रिपोर्ट लिखने, डेटा समझने और फैसले लेने जैसे टास्क संभाल रहा है.;

( Image Source:  Sora AI )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 13 Feb 2026 5:09 PM IST

कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर टाइप करना, रिपोर्ट बनाना और डेटा संभालना, अब तक ये सफेदपोश नौकरियों की पहचान रहा है. लेकिन AI की तेज़ तरक्की ने इस आरामदायक लगने वाली दुनिया में हलचल मचा दी है. टेक इंडस्ट्री के कई दिग्गज मानते हैं कि जो काम डिजिटल, दोहराव वाले और नियम आधारित हैं, उनमें मशीनें तेजी से इंसानों की जगह लेने लगी हैं.

HyperWrite के सीईओ Matt Shumer ने आर्टिकल शेयर कर साफ कहा है कि खतरा दूर का नहीं, शुरू हो चुका है. उनके मुताबिक अगर आपका काम पढ़ने, लिखने, एनालिसिस करने और कीबोर्ड से फैसले लेने पर टिका है, तो आपको तुरंत AI सीखना और उसे अपने काम में शामिल करना होगा. 

मशीनें कर रही इंसानों से बेहतर काम

अपने आर्टिकल में शूमर बताते हैं कि हम उस मोड़ पर खड़े हैं जहां लोग खतरे को छोटा समझ रहे हैं. जैसे कई लोगों ने महामारी से पहले आने वाले झटके को हल्के में लिया था, वैसे ही अभी AI की ताकत को कम आंका जा रहा है. उनका कहना है कि डिजिटल नियमों में बंधे और बार-बार दोहराए जाने वाले काम मशीनें तेजी से सीख रही हैं और कई जगह इंसानों से बेहतर कर रही हैं.

स्क्रीन पर होने वाले काम पर पड़ेगा ज्यादा असर

शूमर के मुताबिक जिन नौकरियों का ज्यादातर हिस्सा पढ़ने-लिखने, डेटा देखने, फैसला लेने या टाइपिंग से जुड़ा है. वहां असर  सबसे पहले और जल्दी दिखेगा. कानूनी ड्राफ्ट बनाना, निवेश रिपोर्ट तैयार करना, कंटेंट लिखना, कोड तैयार करना, मेडिकल डेटा समझना या कस्टमर की मुश्किल सुलझाना-इन सबमें AI पहले ही एंट्री ले चुका है. उनका साफ कहना है कि अगर आपका काम मॉनिटर पर होता है, तो बदलाव दरवाजे पर खड़ा है.

शूमर ने किया पर्सनल एक्सपीरियंस शेयर 

शूमर ने अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया कि पहले जिन कामों के लिए इंजीनियरों की टीम लगती थी, अब वे सिर्फ इंस्ट्रक्शन देते हैं और सिस्टम तैयार नतीजा दे देता है. उनके शब्दों में, आउटपुट ड्राफ्ट नहीं बल्कि लगभग फाइनल प्रोडक्ट जैसा होता है.

क्या है सॉल्यूशन?

सीईओ ने लोगों को AI से दूर भागने की बजाय उसे अपनाना चाहिए. पेड टूल्स आज कहीं ज्यादा ताकतवर हैं. सिर्फ सवाल पूछने तक सीमित न रहें, असली प्रोजेक्ट उसमें डालें. उनकी राय है कि अगर कोई व्यक्ति रोज एक घंटा नए सिस्टम आजमाए, मुश्किल समस्याएं दे और लगातार सीखे, तो कुछ महीनों में उसे आने वाले बदलाव की गहराई समझ आने लगेगी.

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