Tarique Rahman : बांग्लादेश के होने वाले PM को कितना जानते हैं आप? पर्सनैलिटी, पॉलिटिक्स और पावर गेम सब एक नजर में

बांग्लादेश चुनाव में BNP की बढ़त ने तारीक रहमान को पीएम पद की रेस में सबसे आगे ला खड़ा किया है. उनका पीएम बनना तय माना जा रहा है. अब वह खुद की पर्सनैलिटी, राजनीतिक विरासत और विवाद को लेकर फिर से सुर्खियों में हैं.;

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By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 13 Feb 2026 1:09 PM IST

बांग्लादेश की सियासत एक बार फिर उबाल पर है. सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह है तारीक रहमान. अगर वे प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह सिर्फ सत्ता बदलाव नहीं बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा में बड़ा मोड़ माना जाएगा. बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी की जीत के बाद से लोग यह जानना चाहते हैं कि कौन है तारीक रहमान?  क्या है उनकी पर्सनैलिटी, पॉलिटिक्स और पावर गेम की पूरी कहानी?

कौन हैं तारीक रहमान?

  • तारीक रहमान बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं. रहमान ब्रिटेन में 17 साल के देश निकाला के बाद क्रिसमस पर ही बांग्लादेश लौटे थे. वह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख भी हैं.
  • शुक्रवार को बांग्लादेश चुनाव परिणाम आने के 60 साल बाद तारिक रहमान का वहां का अगला पीएम बनना तय माना जा रहा है. अभी तक के अनऑफिशियल नतीजों से साफ है कि उनकी पार्टी यानी BNP 181 सीटों पर लीड कर रही है. यानी उनके गठबंधन को बहुमत मिल गया है.
  • रहमान का जमीनी स्तर पर एक बेस है जो उनके पिता, पूर्व मिलिट्री लीडर जनरल जियाउर रहमान से जुड़ा है, जिनकी विरासत ने 1981 में उनकी हत्या से पहले BNP को बनाया था.
  • तारीक रहमान अपनी मां, खालिदा जिया के नक्शेकदम पर चलेंगे, जो दिसंबर में अपनी मौत तक बांग्लादेश की पहली महिला PM और BNP पार्टी की चेयरमैन थीं.
  • तारीक रहमान को बांग्लादेश की राजनीति में वंशानुगत उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है. वे BNP के कार्यकारी चेयरमैन हैं और लंबे समय से पार्टी के रणनीतिक फैसलों में केंद्रीय भूमिका निभाते रहे हैं.

राजनीतिक सफर: संघर्ष और विवाद

तारीक रहमान का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. साल 2001–2006 के दौरान BNP सरकार में वे प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे. भ्रष्टाचार और सत्ता दुरुपयोग के आरोपों के चलते उन्हें कानूनी मामलों का सामना करना पड़ा. वे कई वर्षों से लंदन में रहकर पार्टी संचालन कर रहे हैं. उनके समर्थक उन्हें राजनीतिक उत्पीड़न का शिकार मानते हैं. बकि विरोधी उन्हें विवादों से घिरा नेता मानते हैं.

बांग्लादेश के डार्क प्रिंस

तारीक रहमान को अक्सर 'डार्क प्रिंस' कहा जाता है. 2001 से 2006 तक BNP और जमात-ए-इस्लामी की मिली-जुली सरकार के दौरान जब खालिदा जिया प्रधानमंत्री थीं, वे असल में बॉस थे. उस समय, रहमान हवा भवन से काम करते थे, जो एक दो मंजिला इमारत थी, जिसमें एक विंड टनल था, जिसे 'शैडो PMO' कहा जाता था.

2006 और 2008 के बीच का समय हिंसक नागरिक अशांति से भरा था, जिसमें BNP और अवामी लीग नवंबर 2006 के बीच होने वाले चुनाव को लेकर झगड़ रहे थे. इस अफरा-तफरी के कारण एक मिलिट्री 'केयरटेकर' सरकार बनी, जिसने कथित तौर पर बुनियादी आजादी पर रोक लगाई और जिया या हसीना के बिना एक राजनीतिक विकल्प बनाने की भी कोशिश की. फिर 2008 का चुनाव हुआ, जिसमें अवामी लीग जीती.

बीएनपी प्रमुख तारीक रहमान को मई 2007 में केयरटेकर सरकार ने गिरफ्तार किया था और अलग-अलग आरोपों में 17 महीने तक हिरासत में रखा था. उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई मामलों में गैरहाजिरी में दोषी ठहराया गया था. इसके अलावा हसीना की हत्या की कथित साजिश से जुड़े एक मामले में भी थे. अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह में हसीना को हटाए जाने के बाद इन फैसलों को पलट दिया गया. हिरासत में कथित तौर पर टॉर्चर किए जाने के बाद वह इलाज के लिए लंदन चले गए.

पर्सनैलिटी: आक्रामक या रणनीतिक?

तारीक रहमान को आक्रामक वक्ता और रणनीतिक योजनाकार माना जाता है. युवाओं और पारंपरिक BNP समर्थकों में उनकी मजबूत पकड़ है. वे खुद को राष्ट्रवादी एजेंडे के प्रतिनिधि के रूप में पेश करते हैं. भारत-बांग्लादेश संबंधों को 'आपसी सम्मान और समानता' पर आधारित करने की बात कर चुके हैं.

पावर गेम: किसके खिलाफ और किसके साथ?

बांग्लादेश की राजनीति में मुख्य मुकाबला BNP और Bangladesh Awami League के बीच रहा है, जिसका नेतृत्व लंबे समय तक शेख हसीना ने किया. रहमान का पीएम बनने पर बांग्लादेश में सियासी ध्रुवीकरण और तेज हो सकता है. प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव के साथ  विदेश नीति, खासकर भारत और चीन के बीच संतुलन, नई दिशा ले सकता है.

तारीक रहमान सिर्फ एक राजनीतिक नाम नहीं, बल्कि बांग्लादेश की बदलती सियासत का प्रतीक बन चुके हैं. उनकी पर्सनैलिटी में आक्रामकता और रणनीति का मिश्रण है, पॉलिटिक्स में विरासत और विवाद दोनों हैं, और पावर गेम में उनका लक्ष्य स्पष्ट सत्ता में वापसी है. अब सवाल यह है कि क्या बांग्लादेश की जनता उन्हें स्थिर नेतृत्व के रूप में स्वीकार करेगी या सियासी समीकरण फिर कोई नया मोड़ लेगा?

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