Bangladesh Election 2026 : 'रिश्ते बराबरी पर’, PM बने तारीक रहमान तो भारत को क्या मिलेगा, क्या बदलेगा?
Bangladesh Election 2026 : बांग्लादेश में 300 सीटों वाली जातीय संसद के चुनाव सत्ता का भविष्य तय करेंगे. अगर तारीक रहमान की पार्टी को बढ़त मिलती है, तो भारत-बांग्लादेश रिश्तों की दिशा में बदलाव संभव है.
Bangladesh Election 2026 : ढाका की सियासत में संभावित बदलाव ने नई दिल्ली के रणनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. बांग्लादेश में अगर सत्ता का संतुलन बदलता है और Bangladesh Nationalist Party को बढ़त मिलती है, तो भारत-बांग्लादेश संबंधों का समीकरण नए सिरे से तय हो सकता है. बीते डेढ़ दशक में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व नजदीकी देखी गई. चाहे वह कनेक्टिविटी कॉरिडोर हो, सुरक्षा सहयोग हो या 18 अरब डॉलर से ज्यादा का द्विपक्षीय व्यापार, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व बदलते ही प्राथमिकताएं भी बदल सकती हैं.
भारत के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ढाका में कौन बैठेगा, बल्कि यह भी है कि नई सरकार की विदेश नीति किस ओर झुकेगी. दिल्ली की ओर या बीजिंग की ओर? सीमा पार सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिरता, तीस्ता जल समझौता और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन, नई सरकार की नीतिगत फैसलों से सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं. दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन की इस संभावित नई कहानी में, बांग्लादेश का नेतृत्व परिवर्तन सिर्फ एक चुनावी घटना नहीं, बल्कि भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति की असली परीक्षा भी बन सकता है.
भारत को लेकर रहमान ने क्या कहा था?
बांग्लादेश में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी भू राजनीतिक चुनौतियों में से एक भारत के साथ रिश्ते फिर से पटरी पर लाना होगा. शेख हसीना के राज में, भारत बांग्लादेश का सबसे करीबी साथी था, लेकिन उनकी सरकार गिरने के बाद रिश्ते बहुत खराब हो गए और हाल के महीनों में बाहर से दुश्मनी वाले हो गए हैं. चुनाव प्रचार के दौरान रहमान ने माना कि भारत के साथ मुद्दे हैं और कहा कि वह सिर्फ 'आपसी सम्मान, आपसी समझ वाला रिश्ता' चाहते हैं.
बेहतर रिश्ते सिर्फ हम पर नहीं, उन पर भी निर्भर
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत और बांग्लादेश दोस्ती फिर से बना सकते हैं, जबकि दिल्ली हसीना और उनकी पार्टी के सैकड़ों सदस्यों को सुरक्षित पनाह दे रही है, रहमान ने कहा, "यह सिर्फ हम पर नहीं, उन पर भी निर्भर करता है." बीएनपी के नेतृत्व वाली नई सरकार के लिए सबसे शुरुआती परीक्षाओं में से एक भारत के साथ इस रिश्ते को संभालना होगा, जो हसीना के राज में बांग्लादेश के सबसे करीब था, लेकिन हाल के महीनों में खराब हो गया है.
तारीक रहमान के PM बनने के भारत के लिए मायने?
बांग्लादेश में आम चुनाव होने के बाद अगर Tarique Rahman की पार्टी सत्ता में आती है, तो भारत के लिए इसे अच्छा संकेत माना जा सकता है. हालांकि, बीएनपी का पिछले रिकॉर्ड भारत के लिहाज से अच्छा नहीं रहा है, लेकिन इस बार चुनाव प्रचार के दौरान बीएनपी प्रमुख तारीक रहमान ने भारत के साथ बिगड़े संबंधों को सुधारने के संकेत दिए हैं. भारत सरकार भी इस दिशा में पहले से ही सक्रिय है.
ऐसे में तारीक रहमान चुनाव जीतते हैं तो दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद-रोधी सहयोग और पूर्वोत्तर भारत से जुड़े मुद्दों पर नीति में बदलाव हो सकता है. चीन फैक्टर का असर भी भारत पर कमा हो सकता है. बांग्लादेश की विदेश नीति में चीन के साथ संतुलन भारत के लिए अहम रहेगा.
भारत से रिश्तों में सुधार रहमान की रणनीति का सेंटर प्वाइंट कैसे?
Tarique Rahman ने अतीत में संकेत दिया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो India के साथ रिश्तों को “आपसी सम्मान और समानता” के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा. सवाल यह है कि व्यवहारिक स्तर पर यह सुधार कैसे दिख सकता है? रहमान के अब तक बयानों से साफ है कि उनकी राजनीति के केंद्र में ढाका और नई दिल्ली के रिश्तों को संतुलित करने की है. इसका मतलब द्विपक्षीय समझौतों की समीक्षा, व्यापार में बांग्लादेश के हितों पर ज्यादा जोर, संवेदनशील सुरक्षा मुद्दों पर पारदर्शिता हो सकता है.
इसके अलावा सीमा पर गैर-शुल्क बाधाओं में कमी, सीमा हाट और ट्रांजिट सुविधाओं का विस्तार, टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर में संयुक्त निवेश करने पर भी वो जोर दे सकत हैं. सीमा प्रबंधन, उग्रवाद और अवैध गतिविधियों पर सहयोग जारी रखना भारत के लिए अहम है. रिश्ते सुधारने का अर्थ सुरक्षा सहयोग को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे संस्थागत रूप देना हो सकता है.
क्या बदलेगा और क्या नहीं?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश की भौगोलिक और आर्थिक वास्तविकताएं भारत से रिश्ते बनाए रखने की मजबूरी भी हैं और अवसर भी. इसलिए सुधार का मतलब पूरी तरह नई दिशा नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं का संतुलन हो सकता है. रिश्ते सुधारने की घोषणा से ज्यादा अहम होगा. नीतिगत फैसले, समझौतों पर हस्ताक्षर और जमीनी अमल. यही तय करेगा कि बयानबाजी से आगे बढ़कर दोनों देशों के संबंध किस दिशा में जाते हैं.
व्यापार और कनेक्टिविटी
भारत-बांग्लादेश व्यापार करीब डेढ़ साल पहले तक 18 अरब डॉलर से ज्यादे का था. नई सरकार के रुख से इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांजिट समझौतों पर असर पड़ सकता है.
नदी जल बंटवारा
तीस्ता जल समझौता जैसे लंबित मुद्दों पर नई राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होगी. भारत सरकार ने इस दिशा में अपना कदम फूंक फूंककर रखने की कोशिश करेगी.
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
बांग्लादेश भारत का पड़ोसी ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की रणनीतिक कड़ी है. नई सरकार का रुख चाहे वह सहयोगी हो या अधिक स्वतंत्र विदेश नीति अपनाए, नई दिल्ली की पूर्वी नीति को प्रभावित करेगा.
बांग्लादेश में चुनाव और कितनी सीटें?
बांग्लादेश में राष्ट्रीय स्तर पर जातीय संसद (Jatiya Sangsad) के लिए 12 फरवरी 2026 को 300 सीटों पर मतदान कराए गए थे. इन सीटों पर बीएनपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है. कुल 300 संसदीय सीटों पर संपन्न हुए चुनाव किसी भी पार्टी को सामान्य बहुमत से सरकार बनाने के लिए 151 सीटें चाहिए. अभी तक के रुझानों में बीएनपी 211 सीटों पर चुनाव जीत चुकी है. इसके अलावा 50 आरक्षित सीटें महिलाओं के लिए नामित की जाती हैं, जो आनुपातिक आधार पर मिलती हैं.





