प्यार का वादा टूटा: पहाड़ पर अकेली छोड़ दी गर्लफ्रेंड, जमा देने वाली ठंड ने ली जान, कोर्ट ने बॉयफ्रेंड को सुनाई ये सजा
ऑस्ट्रिया में एक युवक को अपनी गर्लफ्रेंड को हाइक पर अकेला छोड़ने के कारण गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया गया. महिला की ठंड से मौत हो गई, कोर्ट ने इसे लापरवाही माना.
पहाड़ की चोटी, एक भरोसा और एक ऐसा फैसला जिसने सब कुछ खत्म कर दिया. बर्फ से ढकी ऊंचाइयों पर उसने सोचा होगा, “वो लौटेगा”, लेकिन इंतजार करते-करते उसकी सांसें ही थम गईं. गर्लफ्रेंड को पहाड़ की चोटी पर अकेला छोड़कर नीचे उतरना बॉयफ्रेंड के लिए शायद एक फैसला था, लेकिन उसी फैसले ने एक जिंदगी छीन ली.
ऑस्ट्रिया में हुए इस दिल दहला देने वाले मामले में अदालत ने साफ कहा, "यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही है. भरोसे के टूटने और जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने की कीमत आखिरकार एक जान चली गई."
क्या है पूरा मामला?
ऑस्ट्रिया में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक को अपनी गर्लफ्रेंड को पहाड़ की चोटी पर अकेला छोड़ने के कारण गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया गया. अदालत ने माना कि उसकी लापरवाही के चलते महिला की जान गई. दरअसल, इन्सब्रुक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के ऑफिस के मुताबिक 36 साल के थॉमस प्लामबर्गर 19 जनवरी को अपनी गर्लफ्रेंड कर्स्टिन गर्टनर 33 के साथ ग्रॉसग्लॉकनर की चोटी पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी कर्स्टिन को हाइपोथर्मिया की परेशानी हुई. साथ ही उसने थकावट की शिकायत थी की.
कहां और कैसे हुई घटना?
यह घटना ऑस्ट्रिया के सबसे ऊंचे पर्वत ग्रॉसग्लॉकनर की है. इस पहाड़ की चोटी पर महिला अचानक थकान और कमजोरी महसूस करने लगी, जिसके बाद वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गई.
आरोपी ने क्या किया था?
आरोपी थॉमस प्लाम्बर ने दावा किया कि उसने मदद लाने के लिए नीचे उतरने का फैसला किया. हालांकि, कोर्ट ने पाया कि उसने पर्याप्त सहायता सुनिश्चित नहीं की और गर्लफ्रेंड को खतरनाक हालात में अकेला छोड़ दिया.
महिला की मौत कैसे हुई?
अगली सुबह महिला कर्स्टिन गर्टनर का शव पहाड़ की चोटी से कुछ मीटर नीचे मिला. शुरुआती जांच में ठंड और हाइपोथर्मिया को मौत की वजह माना गया.
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
इंसब्रुक कोर्ट ने आरोपी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए 5 महीने की सस्पेंडेड जेल और जुर्माने की सजा सुनाई. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने अपनी सुरक्षा के लिए अपने पार्टनर पर भरोसा किया था, जिसे उसने तोड़ा.
क्या यह मामला ‘पर्सनल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ का उदाहरण है?
इस केस को माउंटेनियरिंग में “ड्यूटी ऑफ केयर” यानी जिम्मेदारी के बड़े उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है. कोर्ट ने साफ किया कि अगर आप किसी के साथ जोखिम भरे सफर पर हैं, तो उसकी सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी भी बनती है.
इस केस से क्या सीख मिलती है?
यह मामला दिखाता है कि एडवेंचर स्पोर्ट्स में एक छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. सही निर्णय, समय पर मदद और साथ न छोड़ना—यही किसी भी हाइक या ट्रेक की सबसे बड़ी सुरक्षा है.