America-Israel के हमलों के बीच Iran में फंसे भारतीय! 9 हजार लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, कैसे निकालेगी मोदी सरकार?
ईरान में जारी युद्ध और लगातार हो रहे हमलों के बीच हजारों भारतीयों की सुरक्षा चिंता का बड़ा कारण बन गई है. तेहरान और कुम जैसे शहरों में हालात तनावपूर्ण हैं, जहां करीब 9 हजार भारतीय छात्र और नागरिक मौजूद बताए जा रहे हैं. अब सवाल यह है कि बढ़ते खतरे के बीच भारत सरकार उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए क्या कदम उठाएगी.
Indians In Iran: ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जंग जारी है. ये जंग उन भारतीयों के लिए बड़ा संकट बन गया है जो खाड़ी के देशों या फिर ईरान में फंसे हुए हैं. 9 हजार से ज्यादा भारतीय ऐसे हैं जो ईरान में इस जंग की वजह से फंस गए हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सरकार अपने नागरिकों को इन्हें सुरक्षित निकालने की योजना बना रही है.
लगभग 9,000 भारतीय नागरिक, ज्यादातर छात्र, ईरान में फंसे हुए हैं. इनमें से अधिकतर जम्मू-कश्मीर के हैं, जबकि कुछ उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से हैं. ये नागरिक मुख्य रूप से दो ईरानी शहरों में हैं, तेहरान, जो पिछले कुछ दिनों से भारी हमलों की चपेट में है, और कुम, जो राजधानी से लगभग 150 किलोमीटर दूर है.
ईरान से भारतीयों को कैसे निकालेगी सरकार?
ईरानी हवाई क्षेत्र फिलहाल बंद है, क्योंकि 28 फरवरी से बड़े पैमाने पर अमेरिकी और इज़राइली हवाई हमले शुरू हो चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सूत्र ने बताया जिन्हें निकाला जाना है, उन्हें पहले पड़ोसी देशों अर्मेनिया और तुर्कमेनिस्तान के जरिए ले जाया जा सकता है, वहां से उन्हें भारत भेजा जा सकता है."
तुर्कमेनिस्तान ने ईरान से अपनी सीमा पर कई अतिरिक्त चेकपोस्ट खोले हैं, ताकि विदेशी नागरिक देश छोड़ सकें. अमेरिकी सचिव युद्ध पीट हेजसेथ ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में अमेरिका के ईरान पर हमलों में तेजी से इज़ाफा हो सकता है.
भारतीय दूतावास ने क्या कहा?
मंगलवार को भारतीय दूतावास ने घोषणा की कि उसने भारतीय छात्रों को तेहरान से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है. शहर में अब केवल कुछ छात्र ही बचे हैं. हालांकि, कुम पहुंचने के बाद कुछ छात्रों ने पास में धमाकों की आवाज सुनी. चिंता बढ़ने पर उन्होंने विदेश मंत्रालय से तुरंत कदम उठाने की अपील की, ताकि उन्हें निकासी के लिए सबसे सुरक्षित जमीन मार्ग से बाहर निकाला जा सके.
दूतावास ने यह भी कहा कि "तेहरान शहर में खतरे की स्थिति के कारण, दूतावास ने अधिकांश छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है. छात्रों के लिए परिवहन, भोजन और आवास की व्यवस्था की गई है. केवल कुछ छात्र ही हैं, जिन्होंने दूतावास की पेशकश को अस्वीकार किया और तेहरान में ही रहना चुना."
छात्रों के अलावा ईरान में कौन फंसा है?
विदेश मंत्रालय ने भी अपने नागरिकों से ईरान में अत्यधिक सावधानी बरतने और संभव हो तो घर या सुरक्षित स्थान पर ही रहने का अनुरोध किया है. छात्रों के अलावा ईरान में कुछ भारतीय मल्लाह और शिया मुस्लिम भी हैं, जो धार्मिक शिक्षा और तीर्थयात्रा के लिए वहां जाते हैं.
भारतीय दूतावास ने कहा पनपते हुए हालातों को देखते हुए, ईरान में सभी भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने, अनावश्यक यात्रा से बचने और अधिक से अधिक घर या सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी जाती है. भारतीय नागरिक समाचार पर नजर रखें, स्थिति को समझें और दूतावास की आगे की जानकारी का इंतजार करें.
पिछले युद्ध में सरकार ने क्या किया था?
पिछले साल जून में 12 दिनों के ईरान-इज़राइल युद्ध के दौरान, सरकार ने ऑपरेशन सिंधु शुरू किया था. इस अभियान में 3,597 भारतीय नागरिक — छात्रों, कामगारों, पेशेवरों, तीर्थयात्रियों और मल्लाहों- को ईरान से भारत वापस लाया गया था.