भारत में अचानक महंगा हुआ LPG सिलेंडर! 11 महीने बाद कमर्शियल और घरेलू दोनों की कीमतों में उछाल, क्या ईरान वॉर है वजह?
भारत में मिडिल ईस्ट के तनाव का असर घरेलू रसोई तक पहुंच गया है. 7 मार्च से घरेलू LPG सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ गए हैं, जबकि कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपये महंगा हो गया है. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई सहित कई बड़े शहरों में नए दाम लागू हो गए हैं, जिससे आम आदमी और कारोबार दोनों पर असर पड़ेगा.
Iran War, LPG Price Hike: घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर के दाम शनिवार, 7 मार्च से बढ़ा दिए गए हैं. सूत्रों के अनुसार 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत पूरे देश में 60 रुपये बढ़ गई है. वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में भी 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. इस बढ़ोतरी का असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारी प्रतिष्ठानों पर भी पड़ेगा.
माना जा रहा है कि ये फैसला ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण लिया गया है. जानकारों का कहना है कि इस युद्ध का असर पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों पर भी पड़ने वाला है. हालांकि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने ऐसी खबरों को खारिज किया है और कहा है कि भारत के पास तेल का अच्छा खासा स्टॉक है.
किस शहर में कितने का हुआ सिलेंडर?
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है. मुंबई में इसकी कीमत 852.50 रुपये से बढ़कर 912.50 रुपये हो गई है. कोलकाता में इसकी कीमत 879 रुपये से बढ़कर 939 रुपये हो गई है, जबकि चेन्नई में यह 868.50 रुपये से बढ़कर 928.50 रुपये हो गई है. नई दरें शनिवार से तुरंत लागू हो गई हैं.
कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें क्या हैं?
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में भी बढ़ोतरी की गई है. दिल्ली में 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1768.50 रुपये से बढ़कर 1883 रुपये हो गई है. मुंबई में इसकी कीमत 1720.50 रुपये से बढ़कर 1835 रुपये हो गई है. इसी तरह कोलकाता में कीमत 1875.50 रुपये से बढ़कर 1990 रुपये और चेन्नई में 1929 रुपये से बढ़कर 2043.50 रुपये हो गई है.
कब से नहीं बदली थीं एलपीजी की कीमतें?
इससे पहले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अप्रैल 2025 से नहीं बदली गई थी. उस समय दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 853 रुपये थी. अब नई बढ़ोतरी के बाद घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ एलपीजी पर निर्भर व्यावसायिक संस्थानों पर भी असर पड़ेगा.
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब देश में ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन की उपलब्धता को लेकर चर्चा चल रही है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले कहा था कि देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और लोगों को आपूर्ति को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है.
क्या बोले थे केंद्रीय मंत्री?
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों को सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है.
क्या बढ़ेंगी पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें?
इस बीच इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने सोशल मीडिया पर फैल रही पेट्रोल और डीजल की कमी से जुड़ी खबरों को भी गलत बताया है. कंपनी ने कहा कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक है और सप्लाई तथा वितरण व्यवस्था सामान्य रूप से चल रही है.
कंपनी ने कहा कि भारतीय ऑयल देशभर में बिना रुकावट ईंधन की सप्लाई बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. लोगों से अपील की गई है कि वे घबराकर पेट्रोल पंपों पर भीड़ न लगाएं और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर भरोसा करें.
क्या सरकार संकट के लिए है तैयार?
सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को बताया था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते सप्लाई में संभावित रुकावट की चिंताओं के बावजूद भारत कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की उपलब्धता के मामले में काफी मजबूत स्थिति में है. सूत्रों के अनुसार भारत के पास फिलहाल अलग-अलग स्रोतों से उतनी ऊर्जा उपलब्ध है, जितनी मात्रा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा देश के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार भी मौजूद है, जिससे घरेलू मांग पूरी की जा सकती है.
2022 से भारत रूस से भी कच्चा तेल आयात कर रहा है. उस समय भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी केवल 0.2 प्रतिशत थी, लेकिन बाद के वर्षों में यह तेजी से बढ़ी है. सरकारी सूत्रों के अनुसार फरवरी में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल के आयात का करीब 20 प्रतिशत रूस से खरीदा, जो लगभग 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन के बराबर है.




