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किन शर्तों पर भारत के साथ व्यापार करेगा अमेरिका? 20 साल पहले चीन के साथ मिल चुका है ये सबक

रायसीना डायलॉग में अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाउ ने ‘America First’ नीति पर बड़ा बयान दिया. जानिए भारत-अमेरिका व्यापार और टैरिफ समझौते पर क्या कहा.

America First Policy
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America First Policy

( Image Source:  ANI )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Published on: 6 March 2026 5:58 PM

दुनिया की बदलती भू-राजनीति और वैश्विक व्यापार के माहौल में ‘America First’ नीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह रणनीति इस बात पर जोर देती है कि अमेरिका अपने घरेलू और इंटरनेशनल फैसलों में सबसे पहले अपने आर्थिक हितों को प्रायोरटी देगा. करीब एक 10 साल पहले इस नीति को संदेह के साथ देखा जाता था, लेकिन अब यह वैश्विक व्यापार और कूटनीति की बड़ी बहस का हिस्सा बन चुकी है.

नई दिल्ली में हुए रायसीना डायलॉग के दौरान अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाउ ने इसी नीति का जिक्र करते हुए साफ संकेत दिया कि अमेरिका अब अपने व्यापारिक समझौतों में पहले की तरह ढील नहीं देगा. उनका कहना था कि अब अमेरिका किसी भी साझेदारी में अपने हितों से समझौता करने के मूड में नहीं है, चाहे वह भारत जैसा अहम सहयोगी ही क्यों न हो?

क्या है ‘America First’ नीति और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?

‘America First’ नीति का सीधा मतलब है कि अमेरिका अपनी आर्थिक और रणनीतिक प्रायोरटी को सबसे ऊपर रखेगा. इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका दुनिया से अलग हो जाएगा, बल्कि हर समझौते में वह अपने फायदे को पहले देखेगा. क्रिस्टोफर लैंडाउ ने कहा कि चीन के साथ पुराने व्यापारिक अनुभवों से अमेरिका ने काफी सबक सीखे हैं. उनके मुताबिक अब अमेरिका किसी भी देश को वही मौका नहीं देगा, जैसा करीब 20 साल पहले चीन को दिया गया था.

उन्होंने कहा कि, 'भारत को यह समझना चाहिए,' उन्होंने कहा कि हम 20 साल पहले चीन के साथ की गई अपनी गलतियों को दोहराने वाले नहीं हैं. उस समय हमने सोचा था कि ‘हम आपको इन बाजारों को विकसित करने देंगे’ और फिर देखते ही देखते आप कई व्यावसायिक क्षेत्रों में हमसे आगे निकल गए. अब हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जो भी कदम हम उठाएं, वह हमारे लोगों के लिए निष्पक्ष और हितकारी हो."

भारत-अमेरिका टैरिफ समझौते पर क्या बोले लैंडाउ?

लैंडाउ ने फरवरी 2026 में हुए भारत-अमेरिका अंतरिम टैरिफ फ्रेमवर्क का भी जिक्र किया. इस समझौते के तहत अमेरिका ने पहले लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था, लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी जोड़ी गई थीं. उन्होंने कहा कि यह फैसला भी ‘America First’ नीति को ध्यान में रखकर लिया गया था, ताकि अमेरिका के उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रह सकें.

क्या ‘America First’ का मतलब अमेरिका का अलग-थलग होना है?

लैंडाउ ने यह भी साफ किया कि ‘America First’ का मतलब ‘America Alone’ नहीं है. अमेरिका दुनिया के साथ सहयोग को भी जरूरी मानता है, खासकर तब जब वैश्विक चुनौतियों से निपटना हो. उन्होंने कहा, "'America First' का मतलब साफ तौर पर 'America alone' नहीं है. क्योंकि अपने उद्देश्यों को हासिल करने का एक तरीका यह भी है कि दूसरे देशों के साथ सहयोग किया जाए."

उन्होंने आगे कहा, "जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को फिर से महान बनाना चाहते हैं, उसी तरह वे उम्मीद करते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री या दुनिया के अन्य नेता भी अपने-अपने देशों को महान बनाना चाहेंगे."

क्या अमेरिका भारत को बड़े रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है?

लैंडाउ के बयान से यह भी संकेत मिला कि अमेरिका आने वाले समय में भारत को एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में देख रहा है. उनका मानना है कि 21वीं सदी में भारत की भूमिका और प्रभाव तेजी से बढ़ेगा. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग पारस्परिक लाभ के आधार पर होगा, न कि केवल एकतरफा उदारता के आधार पर.

क्या वैश्विक राजनीति में ‘पारस्परिक राष्ट्रवाद’ का दौर शुरू हो रहा है?

एक्सपर्ट का कहना है कि ट्रंप की ‘America First’ नीति एक तरह के पारस्परिक राष्ट्रवाद (Reciprocal Nationalism) की ओर इशारा करती है. इसका मतलब है कि हर देश अपने हितों को प्राथमिकता देगा और उसी आधार पर दूसरे देशों के साथ सहयोग करेगा. हालांकि चुनौती तब सामने आती है जब जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और आर्थिक असमानता जैसे वैश्विक मुद्दों से निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना पड़ता है. ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राष्ट्रीय हित और वैश्विक सहयोग के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है.

डोनाल्ड ट्रंप
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