शंकराचार्य विवाद के बीच सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- कालनेमि धर्म की आड़ में सनातन को कर रहे कमजोर
बीते दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी पर हमला करते हुए कहा था कि 'वे कोई योगी नहीं, वो मंदिर तोड़ने वाला आदमी है.' वहीं अब सीएम योगी का ताजा बयान सामने आया है. जिसमें सीएम योगी इशारों ही इशारों में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर तंज कसते हुए दिखाई दिए.;
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(Image Source: X/ @ANI )प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के काफिले को रोका गया था. जिसके बाद पुलिस और अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के बीच हाथापाई हो गई थी. इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए. इसके बाद मेला प्रशासन की तरफ से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजा गया.
वहीं बीते दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी पर हमला करते हुए कहा था कि 'वे कोई योगी नहीं, वो मंदिर तोड़ने वाला आदमी है.' वहीं अब सीएम योगी का ताजा बयान सामने आया है. जिसमें सीएम योगी इशारों ही इशारों में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर तंज कसते हुए दिखाई दिए.
क्यों बोले सीएम योगी?
हरियाणा में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने संबोधित करते हुए कहा कि 'ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे, हमें उनसे सावधान रहना होगा.' योगी का ये बयान ऐसे समय में आया है जब शंकराचार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है.
क्या है कालनेमि?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान में प्रयुक्त ‘कालनेमि’ शब्द ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं को नया आयाम दे दिया है. यह शब्द केवल एक उपमा नहीं, बल्कि भारतीय पौराणिक परंपरा से जुड़ा ऐसा प्रतीक है, जिसका अर्थ छल, कपट और दिखावटी धर्म से जुड़ा हुआ है. रामायण के अनुसार, कालनेमि एक शक्तिशाली मायावी असुर था, जिसे रावण ने हनुमान को भ्रमित करने के लिए भेजा था. जब हनुमान संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय की ओर जा रहे थे, तब कालनेमि ने साधु का वेश धारण कर उनके मार्ग में तपस्या का नाटक किया.
माघ मेला 2026 से शुरू हुआ विवाद
प्रयागराज माघ मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर उठा विवाद अब महज प्रशासनिक कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है. मौनी अमावस्या के पावन स्नान से रोके जाने, कथित पुलिसिया मारपीट और आधी रात में नोटिस चस्पा किए जाने की घटनाओं ने इसे धर्म, सत्ता और संवैधानिक संस्थाओं के टकराव का बड़ा मुद्दा बना दिया है.
एक ओर मेला प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर विपक्षी दल इसे सनातन परंपरा में हस्तक्षेप और सत्ता के अहंकार से जोड़कर देख रहे हैं. इस पूरे प्रकरण ने देशभर में धार्मिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक अधिकार और न्यायिक दखल को लेकर तीखी बहस छेड़ दी है.