लुधियाना में 14 साल तक छिपा रहा दिल्ली में पत्नी की हत्या करने वाला योगिंदर, क्राइम ब्रांच ने दबोचा; पैरोल से हुआ था फरार
लुधियाना में एक दशक से अधिक समय तक एक शांत और मीठा बोलने वाले बढ़ई के रूप में जीवन बिताने वाले जोगिंदर सिंह की असली पहचान सोमवार को उजागर हुई. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने उनके घर छापा मारा और पाया कि जोगिंदर असल में योगिंदर सिंह थे. योगिंदर ने 1992 में दिल्ली में अपनी पत्नी की हत्या की थी और 8 साल बाद पैरोल तोड़कर फरार हो गया था.;
लुधियाना में एक दशक से अधिक समय तक एक शांत और मीठा बोलने वाले बढ़ई के रूप में जीवन बिताने वाले जोगिंदर सिंह की असली पहचान सोमवार को उजागर हुई. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने उनके घर छापा मारा और पाया कि जोगिंदर असल में योगिंदर सिंह है. योगिंदर ने 1992 में दिल्ली में अपनी पत्नी की हत्या की थी और 8 साल बाद पैरोल तोड़कर फरार हो गया था.
इस गिरफ्तारी ने लुधियाना के स्थानीय निवासियों को भी चौंका दिया. जोगिंदर के पड़ोसी उन्हें हमेशा ही आधार कार्ड वाला जिम्मेदार नागरिक और स्थानीय भाषा बोलने वाले व्यक्ति के रूप में जानते थे. लेकिन 15 मार्च 1992 की उस सुबह की हत्या ने दिल्ली पुलिस के लिए सालों तक एक खुला केस बनाए रखा.
साल 1992 की हत्या और फरार योगिंदर
15 मार्च 1992 की सुबह दिल्ली के पिल्लांगी गांव में एक किराए के मकान में महिला का शव मिला था. गला घोंटकर हत्या की गई थी. मकान मालिक के भाई ने योगिंदर को पकड़ लिया था, जो उस समय उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का रहने वाला था और दिल्ली में फर्नीचर की दुकान में काम करता था. साल 1997 में अदालत ने योगिंदर को हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई. जून 2000 में उन्हें 4 सप्ताह की पैरोल दी गई, जिसके बाद वह भाग गए और लंबे समय तक फरार रहे.
छिपी जिंदगी और नई पहचान
योगिंदर लगातार अलग-अलग राज्यों में रहते रहे. साल 2012 में उन्होंने पंजाब में बसने का फैसला किया और अपनी पहचान बदलकर जोगिंदर सिंह बन गए. पिता का नाम जयप्रकाश से बदलकर जयपाल कर लिया और धाराप्रवाह पंजाबी बोलने का अभ्यास किया. उन्होंने नए आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र बनवाए और 14 सालों तक बढ़ई के रूप में गुमनाम जीवन व्यतीत किया. उन्हें विश्वास था कि योगिंदर सिंह अब इस दुनिया के लिए मर चुका है.
पुलिस की सक्रियता और गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस ने सूचना के आधार पर उत्तर प्रदेश और पंजाब में 500 से अधिक लोगों की पहचान की पुष्टि शुरू की. दिसंबर 2025 में लुधियाना में 10 दिन की गुप्त निगरानी के बाद योगिंदर का पता चला. डीसीपी संजीव कुमार यादव ने कहा "5 जनवरी को पुलिस ने कार्रवाई करने का फैसला किया.
जब योगिंदर को पुलिस की मौजूदगी का एहसास हुआ, तो वह मोटरसाइकिल पर भागने की कोशिश करने लगा. पीछा करने के बाद, आखिरकार उसे पकड़ लिया गया और जमीन पर गिरा दिया गया." योगिंदर सिंह को अब आजीवन कारावास की सजा पूरी करने के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया गया है.