JNU में विवादित नारेबाजी पर प्रशासन सख्त, छात्रों पर कार्रवाई की तैयारी; क्या फिर निकलने वाले हैं उमर खालिद-शरजील इमाम जैसे छात्र?

JNU Protest: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में हुए हालिया विरोध प्रदर्शन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. सोमवार शाम को छात्रों द्वारा लगाए गए नारों से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने इसे लेकर गंभीर संज्ञान लेने की बात कही है. प्रशासन का कहना है कि यह मामला केवल असहमति का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की आचार संहिता से जुड़ा हुआ है.;

( Image Source:  X/ @depressedsoul_0 @Muslim_ITCell @Vijay_Gautamm )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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JNU Protest: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में हुए हालिया विरोध प्रदर्शन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. सोमवार शाम को छात्रों द्वारा लगाए गए नारों से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने इसे लेकर गंभीर संज्ञान लेने की बात कही है. प्रशासन का कहना है कि यह मामला केवल असहमति का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की आचार संहिता और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है.

जेएनयू प्रशासन की ओर से मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि जेएनयूएसयू से जुड़े कुछ छात्रों द्वारा लगाए गए नारे अत्यंत आपत्तिजनक, उत्तेजक और भड़काऊ थे. विश्वविद्यालय ने इसे गंभीर अनुशासनात्मक उल्लंघन मानते हुए तत्काल कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

प्रशासन ने लिया गंभीर संज्ञान

विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने बयान में कहा कि सक्षम प्राधिकारी ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है. साथ ही विश्वविद्यालय की सुरक्षा शाखा को निर्देश दिए गए हैं कि वह इस मामले में चल रही जांच के दौरान पुलिस के साथ पूरा सहयोग करे. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस तरह की गतिविधियां परिसर की शांति और व्यवस्था के लिए खतरा बन सकती हैं.

नारेबाजी को बताया आचार संहिता का उल्लंघन

जेएनयू प्रशासन ने जोर देकर कहा कि इस तरह की नारेबाजी लोकतांत्रिक असहमति की श्रेणी में नहीं आती. बयान के अनुसार, यह गतिविधियां जेएनयू की आचार संहिता का उल्लंघन करती हैं और इससे न केवल परिसर में सद्भाव बिगड़ता है, बल्कि विश्वविद्यालय और राष्ट्र दोनों के सुरक्षा और संरक्षा वातावरण पर भी गलत असर पड़ सकता है.

भविष्य के लिए चेतावनी

जेएनयू प्रशासन ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे ऐसी गतिविधियों से दूर रहें और परिसर में शांति व सद्भाव बनाए रखने में सहयोग करें. साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में अगर इस तरह की कोई भी घटना होती है तो विश्वविद्यालय नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

सुरक्षा रिपोर्ट में साजिश का दावा

जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा प्रॉक्टर को सौंपी गई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया है कि परिसर में लगाए गए आपत्तिजनक नारे जानबूझकर और सोची-समझी साजिश के तहत किए गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, यह नारेबाजी उस समय शुरू हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जेएनयू के पूर्व छात्रों उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं.

गुरिल्ला ढाबा में हुई सभा

रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना कैंपस के गुरिल्ला ढाबा क्षेत्र में आयोजित एक सभा के दौरान हुई, जहां करीब 30 से 35 छात्र मौजूद थे. इस दौरान अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आज़मी, महबूब इलाही, कनिष्क, पाकीज़ा खान और शुभम सहित कई छात्रों की पहचान की गई है. सुरक्षा रिपोर्ट में बताया गया है कि कार्यक्रम की शुरुआत शांतिपूर्ण ढंग से हुई थी, लेकिन अदालत के फैसले के बाद सभा का माहौल और स्वरूप पूरी तरह बदल गया. इसके बाद ही आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लगाए जाने लगे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई.

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