कौन हैं वाइस चांसलर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित जिनके इस्‍तीफे की मांग पर JNU बना अखाड़ा?

दिल्ली के JNU में हालिया विवाद और छात्र संगठनों की झड़प के बाद वाइस चांसलर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित चर्चा के केंद्र में हैं. वह जेएनयू की पहली महिला वाइस चांसलर हैं, जो रूस में जन्मी और भारत में पली-बढ़ी हैं.

( Image Source:  ANI )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 23 Feb 2026 1:29 PM IST

दिल्ली स्थित जेएनयू एक बार फिर सुर्खियों में है. 22 फरवरी की देर रात वामपंथी छात्र संगठनों और एबीवीपी से जुड़े छात्रों के बीच तीखी झड़प हुई. इस हिंसक टकराव में कई छात्र घायल हुए, जिसके बाद कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो गया. घटना के बाद कुछ छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाते हुए वाइस चांसलर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है.

हालिया हिंसक घटना के बाद छात्र संगठनों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन स्थिति संभालने में नाकाम रहा. कुछ छात्रों ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाए हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं आखिर कौन हैं शांतिश्री धुलिपुडी पंडित.

कौन हैं वाइस चांसलर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित?

प्रोफेसर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित का जन्म 15 जुलाई 1962 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग (तत्कालीन लेनिनग्राद) में हुआ था. इसके बाद वह चेन्नई आ गईं और अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. फिर चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एम.फिल और पीएचडी की डिग्री ली. 

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किन पदों पर कर चुकी हैं काम?

शांतिश्री धुलिपुडी पंडित का टीचिंग करियर 1988 में गोवा विश्वविद्यालय से शुरू हुआ. बाद में वे पुणे विश्वविद्यालय से जुड़ीं. जेएनयू की वाइस चांसलर बनने से पहले वे महाराष्ट्र के सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर भी रह चुकी हैं. एडमिनिस्ट्रेटिव और अकादमिक दोनों लेवल पर उनका एक्सपीरियंस काफी लंबा और वर्सेटाइल रहा है.

किन इंस्टीट्यूट से रहा कनेक्शन

प्रोफेसर पंडित कई प्रतिष्ठित संस्थानों से भी जुड़ी रही हैं. इनमें हैदराबाद का अमेरिकन स्टडीज रिसर्च इंस्टीट्यूट, इंडियन एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन स्टडीज, ऑल इंडिया पॉलिटिकल साइंस एसोसिएशन और भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसे नाम शामिल हैं. उनकी पहचान केवल एक शिक्षाविद के रूप में ही नहीं, बल्कि नीति और इंटरनेशनल रिलेशन की एक्सपर्ट के रूप में भी रही है.

लिख चुकी हैं ये किताबें

शांतिश्री धुलिपुडी पंडित कई भाषाएं जानती हैं. उन्हें हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, मराठी और संस्कृत सहित कई भारतीय भाषाओं का ज्ञान है. उन्होंने पार्लियामेंट एंड फॉरेन पॉलिसी इन इंडिया (1990) और रिस्ट्रक्चरिंग एनवायरमेंटल गवर्नेंस इन एशिया: एथिक्स एंड पॉलिसी (2003) जैसी किताबें लिखी हैं. अपने अकादमिक योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं.

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