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दिल्ली की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त: “कारण और समाधान तय करने में जल्दबाज़ी नहीं, अंदाज़ों से नहीं चलेगी नीति”

दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण के कारण और समाधान तय करने में जल्दबाज़ी नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने बस-ट्रक और किसानों को दोषी ठहराने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए वैज्ञानिक और संतुलित नीति की ज़रूरत बताई.

दिल्ली की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त: “कारण और समाधान तय करने में जल्दबाज़ी नहीं, अंदाज़ों से नहीं चलेगी नीति”
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( Image Source:  ANI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Updated on: 6 Jan 2026 3:37 PM IST

दिल्ली-NCR में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख़्त टिप्पणी की है. मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग और नीति निर्धारण के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदूषण के कारणों और उनके समाधान को लेकर बिना ठोस वैज्ञानिक आधार के निष्कर्ष निकालना खतरनाक हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्रदूषण के लिए बसों और ट्रकों को दोषी ठहराना सबसे आसान तरीका है, लेकिन यह भी सोचना होगा कि अगर सार्वजनिक परिवहन ही रोक दिया गया तो आम आदमी आवागमन कैसे करेगा. कोर्ट ने संकेत दिया कि नीति बनाते समय सामाजिक और व्यावहारिक प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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केवल वैज्ञानिक अध्‍ययन और डेटा के आधार पर उठाए जाएं कदम

अदालत ने किसानों पर पराली जलाने के मुद्दे पर भी अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि अक्सर पूरे प्रदूषण का ठीकरा किसानों के सिर फोड़ दिया जाता है, जबकि अन्य स्रोतों - जैसे उद्योग, निर्माण कार्य, सड़क की धूल और शहरी गतिविधियों - का समग्र और निष्पक्ष आकलन नहीं किया जाता. शीर्ष अदालत ने जोर देकर कहा कि वायु प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर अनुमानों या राजनीतिक सहूलियत के आधार पर नहीं, बल्कि डेटा, वैज्ञानिक अध्ययन और समग्र विश्लेषण के आधार पर ही कदम उठाए जाने चाहिए.

कोविड के दौरान पराली जलने के बावजूद नहीं था प्रदूषण

कोर्ट ने कोविड-19 महामारी के दौर का हवाला देते हुए बेहद अहम सवाल उठाया. पीठ ने कहा कि उस समय पराली जलाने की घटनाएं चरम पर थीं, लेकिन इसके बावजूद दिल्ली में नीला और साफ आसमान देखने को मिला था. यह तथ्य खुद इस बात की ओर इशारा करता है कि वायु प्रदूषण के स्रोत काफी जटिल हैं और केवल एक-दो कारणों तक सीमित नहीं किए जा सकते.

पहले वास्तिविक कारण तय किए जाएं

सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सबसे पहले यह तय किया जाए कि वास्तविक कारण क्या हैं, उसके बाद ही समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं. अदालत ने निर्देश दिया कि प्रदूषण के कारणों को पब्लिक डोमेन में रखा जाए, ताकि जनता भी समझ सके कि समस्या कहां है और सरकार उसे कैसे सुलझाने की योजना बना रही है.

मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सुनवाई के दौरान कहा, “क्या आप कारणों की पहचान कर पाए हैं? यही सबसे बड़ा सवाल है… इन दिनों बहुत सारा मटीरियल पब्लिक डोमेन में आ रहा है. विशेषज्ञ लेख लिख रहे हैं, लोग अपनी राय दे रहे हैं, हमें ईमेल भेज रहे हैं. कहा जा रहा है कि भारी वाहन बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, तो पहला सवाल यही है कि हम इससे कैसे निपटेंगे. NCR में हाउसिंग और निर्माण गतिविधियों को लेकर भी बहुत बुरी खबरें हैं - निर्माण लगातार जारी है.”

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