आधी रात बुलडोजर, फिर पथराव! तुर्कमान गेट हिंसा में पुलिस को साजिश की बू, वीडियो खंगाल रही SIT; FIR में क्या-क्या?

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने के दौरान भड़की हिंसा ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पथराव, नारेबाजी और पुलिस से झड़प के बाद Delhi Police ने मामले को संभावित साजिश मानते हुए SIT का गठन किया है. FIR, कोर्ट पेशी, सियासी एंगल और Delhi High Court के आदेशों तक, यह मामला अब कई स्तरों पर जांच के घेरे में है.;

( Image Source:  ANI )
Edited By :  नवनीत कुमार
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दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में आधी रात अवैध अतिक्रमण हटाने के दौरान हालात अचानक बेकाबू हो गए. पथराव, नारेबाजी और पुलिस से झड़प की घटनाओं ने पूरे ऑपरेशन को संवेदनशील बना दिया. कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा. इसके बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ाते हुए Delhi Police ने इसे सिर्फ कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि संभावित साजिश के रूप में देखना शुरू किया.

हिंसा के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की. अलग-अलग यूनिट्स को अलग टास्क दिए गए हैं.एक टीम आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी पर, दूसरी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और भड़काऊ पोस्ट की फोरेंसिक जांच पर काम कर रही है. अब तक करीब 50 संदिग्धों की पहचान हो चुकी है. पुलिस का फोकस यह समझने पर है कि भीड़ स्वतः जुटी या किसी ने उकसाया.

आज होगी कोर्ट में पेशी

पत्थरबाजी मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को देर रात कोर्ट में पेश किया गया. न्यायालय ने उन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. पुलिस अब इन आरोपियों की कस्टडी रिमांड मांगकर पूछताछ करना चाहती है, ताकि घटना की प्लानिंग, फंडिंग और नेटवर्क का पता लगाया जा सके. जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि हिंसा के समय निर्देश कहां से आए.

एफआईआर में क्या-क्या दर्ज है?

तुर्कमान गेट हिंसा को लेकर दर्ज एफआईआर के मुताबिक, यह पूरा मामला कोर्ट के आदेश पर चल रही अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई से जुड़ा है. शिकायत चांदनी महल थाने के कॉन्स्टेबल की ओर से दी गई, जिसमें बताया गया कि फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध कब्जा हटाने के दौरान रात करीब 12:40 बजे 30–35 लोगों की भीड़ अचानक नारेबाजी करते हुए बैरिकेडिंग की ओर बढ़ी. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा लागू होने की घोषणा की गई, लेकिन भीड़ नहीं मानी. इसके बाद बैरिकेड तोड़े गए, पुलिस पर पथराव किया गया, जिसमें SHO समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए. एफआईआर में यह भी दर्ज है कि एक उपद्रवी ने कॉन्स्टेबल से लाउड हेलर छीनकर उसे तोड़ दिया, जिसे पुलिस साजिश और सुनियोजित हमले का अहम संकेत मान रही है.

सुरक्षा व्यवस्था और ऑपरेशन की स्केल

कार्रवाई के लिए बड़े पैमाने पर संसाधन तैनात किए गए थे. कई बुलडोजर और JCB, दर्जनों डंपर और सैकड़ों नगर निगम कर्मी मौके पर मौजूद रहे. सुरक्षा के लिहाज से हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी, कई जिलों के वरिष्ठ अधिकारी और ड्रोन निगरानी तैनात थी. मस्जिद की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर इलाके को सील किया गया.

सपा नेता की मौजूदगी पर उठे सवाल

जांच के दौरान रामपुर के सपा सांसद की मौके पर मौजूदगी का वीडियो सामने आया है. पुलिस वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है और यह जानने की कोशिश हो रही है कि वहां उनकी भूमिका क्या थी. जरूरत पड़ने पर पूछताछ की जा सकती है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि उकसावे के सबूत मिले, तो कार्रवाई और सख्त होगी.

हाईकोर्ट ने दिए थे आदेश

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद हुई. इस मुद्दे पर Delhi High Court ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि संयुक्त सर्वे के आधार पर चिन्हित अवैध निर्माण हटाए जाएं और प्रभावित पक्षों को सुनवाई का मौका मिले. सुनवाई और दस्तावेजी जांच के बाद नगर निगम ने आदेश पारित किया, जिसके तहत सीमित भूमि के अलावा अतिरिक्त क्षेत्र पर स्वामित्व का दावा अस्वीकार किया गया.

मेयर ने क्या कहा?

एमसीडी मेयर Raja Iqbal ने पूरे मामले पर साफ कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अचानक या मनमाने ढंग से नहीं की गई. उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के तहत सभी संबंधित पक्षों को पहले नोटिस दिया गया, व्यक्तिगत सुनवाई का मौका मिला और पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही एक्शन लिया गया. मेयर के मुताबिक, रात में कार्रवाई इसलिए की गई ताकि आम जनता की आवाजाही न हो और हालात नियंत्रण में रहें. उन्होंने धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक ढांचे को कोई क्षति नहीं पहुंचाई गई और कुछ लोग जानबूझकर इस प्रशासनिक कार्रवाई को धार्मिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं.

धार्मिक स्थल को लेकर किया क्लियर

धार्मिक एंगल पर उठ रहे सवालों को प्रशासन ने सिरे से खारिज किया है. अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक स्थल को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया और न ही पहुंचने दिया जाएगा. कार्रवाई का उद्देश्य केवल अवैध अतिक्रमण हटाना था, न कि किसी आस्था को ठेस पहुंचाना. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या जानबूझकर धार्मिक रंग देकर माहौल भड़काया गया.

गिरफ्तारियां, डिजिटल सबूत और जवाबदेही

दिल्ली पुलिस के अनुसार जांच अभी शुरुआती चरण में है. सोशल मीडिया से जुटाए गए डिजिटल सबूत, कॉल डिटेल्स और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर और गिरफ्तारियां संभव हैं. साजिश, उकसावे और हिंसा में भूमिका तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन का साफ संदेश है कि कानून के तहत हुई कार्रवाई में बाधा डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

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