दिल्ली की सन्नाटे भरी रात, तुर्कमान गेट में अफवाहों ने कैसे भड़काई हिंसा? जानें रात 1 बजे से सुबह तक क्या-क्या हुआ
Turkman Gate Violence: दिल्ली की उस रात में ठंड हल्की-हल्की गलियों में उतर रही थी. तुर्कमान गेट की तंग गलियां, जो दिन में शोर से भरी रहती हैं, रात में कुछ पल के लिए शांत थीं. दुकानों के शटर गिरे हुए थे, मस्जिद के पास लगी स्ट्रीट लाइट पीली रोशनी बिखेर रही थी. किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में यह सन्नाटा डर, अफवाह और हिंसा में बदल जाएगा.
Turkman Gate Violence: दिल्ली की उस रात में ठंड हल्की-हल्की गलियों में उतर रही थी. तुर्कमान गेट की तंग गलियां, जो दिन में शोर से भरी रहती हैं, रात में कुछ पल के लिए शांत थीं. दुकानों के शटर गिरे हुए थे, मस्जिद के पास लगी स्ट्रीट लाइट पीली रोशनी बिखेर रही थी. किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में यह सन्नाटा डर, अफवाह और हिंसा में बदल जाएगा.
करीब 1 बजे: मशीनों की आवाज और बढ़ता सन्नाटा
रात लगभग 1 बजे, नगर निगम दिल्ली की टीम हाईकोर्ट के आदेश के तहत अवैध निर्माण हटाने पहुंची. यह कार्रवाई फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास बने अतिक्रमण दुकानों, बारात घर और एक डिस्पेंसरी तक सीमित थी. पहले से तैनात पुलिस बल चुपचाप मोर्चा संभाले खड़ा था. अफसरों की निगाहें हर गली, हर मोड़ पर थीं.
पहले मोबाइल उठे, फिर शब्द निकले
कार्रवाई शुरू हुए कुछ ही वक्त बीता था कि कुछ लोगों ने मोबाइल फोन निकाल लिए. कैमरे ऑन हुए, रिकॉर्डिंग शुरू हुई. लेकिन रिकॉर्डिंग में सच कम और भावनाओं को भड़काने वाले शब्द ज्यादा थे. एक वीडियो में आवाज गूंजती है “भाई, मस्जिद को तोड़ रहे हैं ये लोग… मुसलमानों जाग जाओ, अब भी वक्त है.” यह शब्द रात की हवा में तैरते हुए सीधे सोशल मीडिया तक पहुंच गए.
सोशल मीडिया: अफवाहों की तेज रफ्तार
वीडियो व्हाट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फैलने लगे. हर शेयर के साथ कहानी और डर बढ़ता गया. दावा किया गया कि बुलडोजर मस्जिद गिराने आए हैं. लोगों से कहा गया कि दुकानें बंद करो, घरों से निकलो, मौके पर पहुंचो. कुछ वीडियो में रास्तों तक की जानकारी दी गई, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग वहां जमा हो सकें.
भावनाएं भड़कीं, सच पीछे छूट गया
जिन लोगों ने वीडियो देखा, उन्होंने पूरा सच जानने की कोशिश नहीं की. रात के अंधेरे में डर जल्दी भरोसा बन जाता है. मस्जिद को नुकसान पहुंचने की आशंका ने गुस्से को जन्म दिया. कुछ ही देर में गलियों में आवाजें तेज़ हो गईं, भीड़ बढ़ने लगी और माहौल भारी होता चला गया.
भीड़ का उग्र होना: पत्थर और चीखें
अचानक हालात बिगड़ गए. भीड़ में मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थर उठाए और पुलिस की ओर फेंकने शुरू कर दिए. पत्थरों की आवाज, पुलिस के आदेश और लोगों की चीखें सब कुछ एक साथ गूंजने लगा. इस पथराव में 4 से 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए. यह हिंसा अचानक नहीं लग रही थी; ऐसा लगा मानो किसी ने माहौल को जानबूझकर यहां तक पहुंचाया हो.
पुलिस की कोशिश: हालात संभालने की जंग
दिल्ली पुलिस ने हालात को काबू में करने के लिए न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया. अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाया गया. गलियों के मुहाने बंद किए गए, भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश हुई. पूरी रात पुलिस के लिए एक-एक मिनट चुनौती बन गया.
झूठ का खुलना: वीडियो बनाम हकीकत
जांच में साफ हुआ कि जिन वीडियो में मस्जिद गिराने का दावा किया जा रहा था, वे भ्रामक थे. मस्जिद को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया गया था. कार्रवाई सिर्फ अवैध अतिक्रमण पर हो रही थी. लेकिन अफवाहों ने जो आग लगाई थी, वह देर तक सुलगती रही.
एक नाम, कई सवाल
पुलिस जांच में एक वीडियो बनाने और वायरल करने वाले की पहचान खालिद मलिक के रूप में हुई. सवाल उठे क्या वह अकेला था? या उसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क था? पुलिस अब हर डिजिटल सबूत, हर पोस्ट और हर अकाउंट को खंगाल रही है.
तकनीक बनी गवाह
बॉडी कैम, इलाके के सीसीटीवी और सोशल मीडिया ट्रैकिंग से पत्थरबाजों की पहचान की गई. शुरुआती तौर पर 10 लोगों को हिरासत में लिया गया. एफआईआर दर्ज हो चुकी है और पूछताछ जारी है. पुलिस साफ कह चुकी है कि अफवाह फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.
सुबह की रोशनी: डर के बाद की शांति
सुबह होते-होते इलाके में तनावपूर्ण शांति लौट आई. भारी पुलिस बल तैनात रहा. एमसीडी ने लोगों से अपील की कि वे अपना अवैध सामान खुद हटा लें. कई लोग चुपचाप अपने-अपने अतिक्रमण समेटते दिखे. रात की अफवाहें खत्म हो चुकी थीं, लेकिन उनका असर लोगों के चेहरों पर साफ दिख रहा था.
अंत में एक सवाल
तुर्कमान गेट की वह रात यह सवाल छोड़ गई. क्या एक झूठा वीडियो, कुछ भड़काऊ शब्द और सोशल मीडिया की रफ्तार किसी भी शहर की शांति को चंद घंटों में तोड़ सकती है? और अगर हां, तो अगली रात कौन-सी होगी?





