डिमोलिशन के समय तुर्कमान गेट पर क्या कर रहे थे सपा सांसद? अब पुलिस करेगी पूछताछ; जानें मोहीबुल्लाह नदवी के बारे में
तुर्कमान गेट में अतिक्रमण हटाने की आधी रात की कार्रवाई के दौरान सपा सांसद की मौजूदगी ने राजनीतिक बहस छेड़ दी. जहां प्रशासन इसे हाईकोर्ट के आदेश का पालन बता रहा है, वहीं विपक्ष कार्रवाई के समय और माहौल को लेकर सवाल उठा रहा है. पत्थरबाजी, पुलिस की सख्ती और सांसद के बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को कानून-व्यवस्था से आगे सियासी टकराव में बदल दिया है.
दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई महज एक प्रशासनिक कदम नहीं रही, बल्कि यह तेजी से सियासी बहस का केंद्र बन गई. आधी रात को शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान हालात उस वक्त बिगड़ गए, जब भीड़ ने पुलिस और निगम की टीम पर पत्थरबाजी शुरू कर दी. आंसू गैस, हिरासत और एफआईआर के बीच यह सवाल उठने लगा कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद वहां क्या कर रहे थे.
इस पूरे विवाद में जिस नेता का नाम उभरा, वह हैं सपा सांसद मोहीबुल्लाह नदवी. पुलिस सूत्रों और सामने आए वीडियो फुटेज के मुताबिक, पत्थरबाजी के दौरान उनकी मौजूदगी मौके पर देखी गई. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने साफ किया कि सांसद से पूछताछ की जाएगी ताकि यह समझा जा सके कि उनकी भूमिका केवल “स्थिति शांत कराने” तक सीमित थी या कुछ और.
मैं हालात बिगड़ने से रोकने गया था: सपा सांसद
मोहीबुल्लाह नदवी ने खुद सामने आकर कहा कि उन्हें हाईकोर्ट के उस आदेश की पूरी जानकारी नहीं थी, जिसके तहत अतिक्रमण हटाया जा रहा था. उनके मुताबिक, जैसे ही उन्हें सूचना मिली कि मस्जिद को चारों ओर से घेर लिया गया है, वह इलाके में पहुंचे. उनका दावा है कि उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और घर लौटने की अपील की, जिसका वीडियो भी मौजूद है.
कौन हैं मोहीबुल्लाह नदवी?
मोहीबुल्लाह नदवी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं. उनकी पहचान एक ऐसे नेता की है, जो मुस्लिम समाज के साथ-साथ शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रूप से बोलते रहे हैं. राजनीति में आने से पहले ही वह धार्मिक और शैक्षणिक हलकों में सक्रिय रहे हैं.
मोहीबुल्लाह नदवी का ताल्लुक इस्लामी शिक्षा से जुड़े नदवा संस्थान की पृष्ठभूमि से माना जाता है. यही वजह है कि उन्हें अक्सर धार्मिक मामलों पर बोलने वाला नेता माना जाता है. सपा के भीतर भी उनकी छवि एक ऐसे सांसद की है, जो ज़मीनी स्तर पर समुदाय से जुड़ा रहता है और संवेदनशील मुद्दों पर मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करता है.
राजनीतिक तौर पर वह लंबे समय से समाजवादी पार्टी के भरोसेमंद मुस्लिम चेहरों में शामिल रहे हैं. संसद में उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकार, शिक्षा, मदरसा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए हैं. पार्टी नेतृत्व के करीबी माने जाने के कारण कई बार उन्हें विवादित या संवेदनशील घटनाओं में “मौजूद” देखा गया है.
सांसद की मौजूदगी के मायने क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है. तुर्कमान गेट जैसे संवेदनशील इलाके में किसी सांसद की मौजूदगी अपने आप में संदेश देती है. सवाल यह भी है कि क्या नेताओं की मौके पर मौजूदगी भीड़ को शांत करती है या फिर अनजाने में हालात और भड़का देती है.
डिमोलिशन के समय पर सवाल
इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल कार्रवाई के समय को लेकर भी उठा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तोड़फोड़ सुबह 8 बजे होनी थी, लेकिन इसे रात 1:30 बजे शुरू कर दिया गया. यही वह बिंदु है, जहां से स्थानीय लोगों में बेचैनी और गुस्सा बढ़ा. विपक्ष का कहना है कि आधी रात की कार्रवाई ने माहौल को अनावश्यक रूप से तनावपूर्ण बना दिया.
पत्थरबाजी और पुलिस का एक्शन
डिमोलिशन के दौरान करीब 25–30 उपद्रवियों ने पुलिस और एमसीडी कर्मचारियों पर पत्थर फेंके, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए. हालात काबू में लाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा. पुलिस ने सीसीटीवी और बॉडी कैमरों के आधार पर पांच लोगों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया और कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की.
कोर्ट का आदेश सर्वोपरि: प्रशासन
दिल्ली नगर निगम और पुलिस दोनों ने साफ किया है कि यह पूरी कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के तहत की गई थी. अधिकारियों के मुताबिक, मस्जिद के मुख्य ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया गया, बल्कि उसके आसपास बने अवैध निर्माण हटाए गए. प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, चाहे वे किसी के भी इशारे पर क्यों न हों.
सियासत बनाम सिस्टम: आगे क्या?
अब इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या जनप्रतिनिधियों की भूमिका ऐसे संवेदनशील अभियानों में मध्यस्थ की होनी चाहिए या दूरी बनाए रखना ही बेहतर है? पुलिस जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि सपा सांसद की मौजूदगी महज संयोग थी या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश. फिलहाल, तुर्कमान गेट की घटना दिल्ली की राजनीति में कानून, आस्था और सियासत के टकराव का नया उदाहरण बन चुकी है.





