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किसने बनवाई थी फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद, हिंसा फैलाने वाला खालिद मलिक कौन? पत्थरबाज़ी और भड़काऊ वीडियो- Updates

तुर्कमान गेट इलाके में फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास एमसीडी की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए. पत्थरबाज़ी और नारेबाज़ी के बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. इसी बीच भड़काऊ वीडियो सामने आए, जिनमें दिख रहे शख्स की पहचान खालिद मलिक के रूप में हुई है. पुलिस जांच कर रही है कि वीडियो के जरिए हिंसा भड़काई गई या नहीं. इतिहासकारों के मुताबिक फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद का निर्माण सूफ़ी संत शाह फ़ैज़-ए-इलाही ने कराया था.

किसने बनवाई थी फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद, हिंसा फैलाने वाला खालिद मलिक कौन?  पत्थरबाज़ी और भड़काऊ वीडियो- Updates
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सागर द्विवेदी
Edited By: सागर द्विवेदी

Updated on: 7 Jan 2026 5:31 PM IST

पुरानी दिल्ली की गलियों में इतिहास हर दीवार पर लिखा है, लेकिन तुर्कमान गेट की तंग सड़कों पर बीती आधी रात इतिहास, प्रशासन और भावनाओं की जबरदस्त टक्कर देखने को मिली. एमसीडी के बुलडोज़र, पुलिस का भारी बल, आंसू गैस के गोले और पत्थरबाज़ी. सबकुछ कुछ ही घंटों में इस इलाके को सुर्खियों के केंद्र में ले आया. विवाद के केंद्र में है फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद, जिसे लेकर अब सवाल सिर्फ अतिक्रमण का नहीं, बल्कि इतिहास, जमीन और साजिश तक पहुंच चुके हैं.

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक भड़काऊ वीडियो ने आग में घी डालने का काम किया. वीडियो में “मुसलमानों जाग जाओ” जैसे नारे लगाते शख्स की पहचान खालिद मलिक के रूप में हुई है. दिल्ली पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यह वीडियो किसी अकेले व्यक्ति की हरकत है या फिर इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था.

क्या है पूरा मामला? आधी रात क्यों चली MCD की कार्रवाई

7 जनवरी की तड़के, दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में एमसीडी ने अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया. करीब 32 बुलडोज़र लगाए गए और फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद से सटी जमीन पर बने कथित अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई. जैसे ही बुलडोज़र आगे बढ़े, स्थानीय लोगों का विरोध तेज हो गया. देखते ही देखते माहौल बिगड़ा, पत्थरबाज़ी शुरू हुई, पुलिस को आंसू गैस छोड़नी पड़ी और पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया. पुलिस ने पांच लोगों को हिरासत में लिया, जबकि प्रशासन का दावा है कि करीब 85 प्रतिशत अतिक्रमण हटा दिया गया है. एमसीडी का कहना है कि यह कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश पर की गई, जबकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें पहले से पर्याप्त सूचना नहीं दी गई.

कौन है खालिद मलिक? भड़काऊ वीडियो से कैसे बढ़ा तनाव

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में लोगों को भड़काने वाला शख्स खालिद मलिक है. वीडियो में वह कथित तौर पर धार्मिक भावनाएं भड़काते हुए भीड़ जुटाने की अपील करता दिख रहा है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि ऐसे वीडियो का मकसद अफवाह फैलाना और कानून-व्यवस्था बिगाड़ना है. अब यह जांच की जा रही है कि क्या खालिद मलिक अकेला था या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था. पुलिस अन्य वायरल वीडियो की भी जांच कर रही है.

कितनी पुरानी है फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद? 80 साल या 250 साल?

यहीं से कहानी और उलझ जाती है. कुछ इतिहासकारों के मुताबिक, फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद लगभग 250 साल पुरानी है और इसका निर्माण 18वीं शताब्दी में हुआ था. कहा जाता है कि इसे महान सूफ़ी संत हज़रत शाह फ़ैज़-ए-इलाही ने बनवाया था. यह वह दौर था जब मुगल शासन अपने अंतिम चरण में था. संभवतः अहमद शाह बहादुर या शाह आलम द्वितीय का समय. हालांकि, प्रशासनिक रिकॉर्ड कुछ और कहानी कहते हैं.

1942 की जमीन, कब्रिस्तान और फिर मस्जिद

दिल्ली नगर निगम के मेयर राजा इक़बाल सिंह के मुताबिक, 1942 में 900 स्क्वायर मीटर जमीन कब्रिस्तान के नाम पर आवंटित की गई थी. इसी दस्तावेज़ के आधार पर मस्जिद की इंतज़ामिया कमेटी ने इस जमीन पर हक जताया. आरोप है कि धीरे-धीरे यहां मस्जिद का निर्माण हुआ और फिर आसपास की जमीन को भी घेर लिया गया. 1999 के आसपास पक्का निर्माण शुरू हुआ- पहले कमरे, फिर दो मंज़िला बैंक्वेट हॉल, उसके बाद डायग्नोस्टिक सेंटर और लाइब्रेरी.

एक एकड़ जमीन पर अवैध निर्माण का दावा

निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रामलीला मैदान की करीब 4047.55 स्क्वायर यार्ड, यानी लगभग एक एकड़ जमीन पर अवैध निर्माण हो चुका था. निगम का दावा है कि बीते 20 सालों में मस्जिद की इंतज़ामिया कमेटी ने जमीन का लगातार व्यावसायिक इस्तेमाल किया. इस मामले में कमेटी के सदस्य मतलूब से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं उठा. वहीं, मस्जिद के क़ाज़ी साहब ने कहा कि 'फ़िलहाल हम इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं देना चाहते.'

फ़ैज़-ए-इलाही का मतलब और सूफ़ी परंपरा

फ़ैज़-ए-इलाही अरबी शब्द है- फ़ैज़ यानी कृपा या महिमा, इलाही यानी अल्लाह या ईश्वर. स्थानीय बुज़ुर्गों के मुताबिक, शाह फ़ैज़-ए-इलाही एक सूफ़ी संत थे. उनकी कब्र भी कभी पास में थी, इसलिए कुछ लोग इसे दरगाह फ़ैज़-ए-इलाही भी कहते हैं. मान्यता है कि यहां कभी सूफ़ी परंपरा का बड़ा केंद्र था, जहां धर्म से ऊपर इंसानियत को तरजीह दी जाती थी.

अब आगे क्या? सवाल सिर्फ मस्जिद का नहीं

तुर्कमान गेट का यह विवाद अब सिर्फ अतिक्रमण तक सीमित नहीं रहा. यह मामला अब इतिहास बनाम रिकॉर्ड, आस्था बनाम कानून और सोशल मीडिया बनाम कानून-व्यवस्था की लड़ाई बन चुका है. एक तरफ प्रशासन हाई कोर्ट के आदेश का हवाला दे रहा है, दूसरी तरफ स्थानीय लोग इसे धार्मिक स्थल पर कार्रवाई बता रहे हैं. और बीच में भड़काऊ वीडियो, अफवाहें और सियासत, जो आग को और भड़का रही हैं.

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