सरकारी बंगले से सोफा-एसी ले गए तेज प्रताप! 26 स्ट्रैंड रोड बंगले ने गरमा दी बिहार की राजनीति; मंत्री ने क्या-क्या लगाए आरोप?

पटना के 26 स्ट्रैंड रोड स्थित सरकारी बंगले को लेकर बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव के बंगला खाली करने के बाद नए आवंटी मंत्री लखेंद्र पासवान ने फर्नीचर, एसी, पंखा और बिजली के सामान गायब होने के गंभीर आरोप लगाए हैं.;

( Image Source:  X/TejYadav14 )
Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On :

पटना के 26 स्ट्रैंड रोड स्थित सरकारी आवास के खाली होते ही बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. जिस बंगले को कुछ दिन पहले तक सत्ता और रसूख का प्रतीक माना जा रहा था, वही अब आरोपों और सवालों का केंद्र बन गया है. पूर्व मंत्री Tej Pratap Yadav के निकलते ही नए आवंटी और राज्य सरकार के मंत्री Lakhendra Paswan ने इसे “खंडहर” बताते हुए गंभीर आरोप जड़ दिए. मामला अब सिर्फ मकान की हालत का नहीं, बल्कि सत्ता की संस्कृति और जवाबदेही का बन गया है.

लखेंद्र पासवान जब पहली बार इस सरकारी आवास में पहुंचे, तो उनका कहना है कि वे सन्न रह गए. उनके मुताबिक, बंगला रहने लायक हालत में नहीं था. कुर्सी, टेबल, सोफा, बेड, एसी तक गायब थे. इतना ही नहीं, बल्ब, पंखे और यहां तक कि बिजली के तार तक उखड़े हुए बताए गए. मंत्री का दावा है कि छत क्षतिग्रस्त है और गेट के लैच भी टूटे मिले, जिससे यह बंगला किसी वीरान इमारत जैसा लग रहा था.

सरकारी संपत्ति कहां गई?

मंत्री लखेंद्र पासवान ने सवाल उठाया कि जनप्रतिनिधियों को जो फर्नीचर और सुविधाएं मिलती हैं, वे व्यक्तिगत नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति होती हैं. ऐसे में आवास खाली करते समय उन्हें वहीं छोड़ा जाना चाहिए था. उनका कहना है कि अगर इन सुविधाओं की कभी आधिकारिक मांग की गई थी, तो अब वे सामान आखिर कहां चले गए? यही सवाल इस विवाद को निजी आरोप से निकालकर सार्वजनिक जवाबदेही की बहस में बदल रहा है.

भवन निर्माण विभाग तक पहुंचा मामला

लखेंद्र पासवान ने पूरे मामले की जानकारी भवन निर्माण विभाग को दे दी है और औपचारिक जांच की मांग की है. अधिकारियों से कहा गया है कि वे यह पता लगाएं कि बंगले की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है. साथ ही, बंगले में रंग-रोगन का काम भी शुरू हो गया है, जिसमें हरे रंग की जगह अब भगवा रंग दिखने लगा है—जिसे कई लोग राजनीतिक संकेत के तौर पर देख रहे हैं.

क्यों खाली करना पड़ा बंगला?

दरअसल, तेज प्रताप यादव को यह बंगला तब खाली करना पड़ा, जब वे महुआ विधानसभा चुनाव हार गए और उनकी विधायकी समाप्त हो गई. इसके बाद सरकार की ओर से उन्हें 26 स्ट्रैंड रोड स्थित आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था. मकर संक्रांति पर इसी बंगले में हुए दही-चूड़ा भोज ने पहले ही राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी, और अब आरोपों ने उस चर्चा को और हवा दे दी है.

तेज प्रताप बनाम सत्ता का नया नैरेटिव

आरजेडी खेमे में इस पूरे प्रकरण को सियासी हमला माना जा रहा है. पार्टी समर्थकों का कहना है कि बंगले की जर्जर हालत प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा हो सकती है, न कि किसी की निजी मंशा. वहीं, सत्ता पक्ष इसे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग से जोड़कर देख रहा है. यह टकराव अब कानून से ज्यादा नैरेटिव की लड़ाई बनता दिख रहा है.

पहले भी लग चुके हैं ऐसे आरोप

यह पहली बार नहीं है जब बिहार या देश की राजनीति में सरकारी आवास से सामान गायब होने के आरोप लगे हों. साल 2024 में Tejashwi Yadav पर भी ऐसे ही आरोप लगे थे, जिन्हें आरजेडी ने खारिज कर दिया था और जेडीयू ने उन्हें क्लीन चिट दी थी. इससे पहले यूपी में Akhilesh Yadav पर भी इसी तरह के आरोप लगे थे. ऐसे मामलों में सियासत अक्सर तथ्यों से आगे निकल जाती है.

बंगले से आगे बढ़ी लड़ाई

अब 26 स्ट्रैंड रोड का यह बंगला सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं रहा. यह सत्ता, विपक्ष, नैतिकता और जवाबदेही की बहस का प्रतीक बन चुका है. जांच क्या नतीजा लाएगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस प्रकरण ने बिहार की राजनीति में एक नया सियासी टकराव खड़ा कर दिया है—जहां सवाल सिर्फ यह नहीं कि “सामान कहां गया”, बल्कि यह भी कि सत्ता बदलने पर जिम्मेदारी किसकी होती है.

Similar News