NEET छात्रा रेप केस में बड़ा खुलासा, CID की जांच ने हिला डाला; जानें अब तक क्या-क्या सामने आया
NEET छात्रा रेप केस में बड़ा खुलासा हुआ है. जिसने बिहार के हॉस्टलों में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है.;
NEET student rape
(Image Source: AI: Sora )NEET की एक छात्रा से जुड़े रेप और संदिग्ध मौत मामले में अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली जांच सामने आई है. CID, FSL और SIT की संयुक्त पड़ताल के बाद यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि बिहार के हॉस्टलों में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है.
जांच एजेंसियां अब ये पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या छात्रा को हॉस्टल के भीतर ही नशे की गोलियां खिलाई गई थीं. इसके साथ ही 17 घंटे का गायब CCTV फुटेज, संदिग्ध गतिविधियां और युवाओं की भूमिका ने इस केस को और भी रहस्यमय बना दिया है.
17 घंटे का CCTV फुटेज कहां गायब?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल 17 घंटे के CCTV फुटेज को लेकर है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह फुटेज कई अहम राज खोल सकता है. जांच का फोकस 5 जनवरी रात 9:30 बजे से 6 जनवरी दोपहर 2 बजे तक के समय पर है, जिसे सबसे ज्यादा संदिग्ध माना जा रहा है.
CID ने SIT को दिए 59 अहम प्वाइंट्स
पटना पुलिस और SIT की शुरुआती जांच पर सवाल उठाते हुए CID ने 59 प्वाइंट्स की विशेष गाइडलाइन जारी की है. पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार, इन बिंदुओं में हॉस्टल, परिवार, जहानाबाद के दोस्त, डिजिटल साक्ष्य और व्यवहारिक विश्लेषण जैसे कई अहम पहलू शामिल हैं. CID की टीम ने SIT के साथ हॉस्टल का निरीक्षण किया, जिसके बाद जांच को कई नई दिशाओं में मोड़ा गया.
FSL रिपोर्ट से बड़ा खुलासा
FSL रिपोर्ट में मिले जैविक साक्ष्यों के आधार पर बताया जा रहा है कि स्पर्म सैंपल की उम्र 18 से 21 वर्ष के युवक की हो सकती है. इसी आधार पर अब 4 से 5 सबसे कम उम्र के लड़के जांच के दायरे में आ गए हैं. CID अब इन्हीं युवकों की भूमिका को 59 प्वाइंट्स के आधार पर खंगाल रही है.
क्या हॉस्टल में दी गईं नशीली दवाएं?
CID की गाइडलाइन इस आशंका पर भी केंद्रित है कि छात्रा को एंटी-डिप्रेसेंट या सेडेटिव दवाएं दी गई थीं. कमरे से तीन खाली दवा स्ट्रिप मिलने, लेकिन पुलिस को केवल एक स्ट्रिप सौंपे जाने से संदेह और गहरा गया है. इसके अलावा, नाबालिग छात्रा के पास इतनी अधिक मात्रा में दवाएं होना, वार्डन द्वारा दवाएं परिजनों को सौंप देना और पुलिस को तत्काल सूचना न देना ये सभी बिंदु गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
प्रशासनिक चूक पर सवाल
हॉस्टल के कमरे के बाहर CCTV कैमरे का न होना, दरवाजा तोड़ने से पहले किसी प्रशासनिक अधिकारी की मौजूदगी न होना और हॉस्टल मालिक की गिरफ्तारी के बावजूद अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर भी CID का विशेष फोकस है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इससे पहले भी हॉस्टल में इस तरह की कोई घटना हुई थी.
26 दिसंबर को पूरा परिवार क्यों आया?
CID के 59 बिंदुओं में एक अहम सवाल यह भी है कि 26 दिसंबर को पूरा परिवार अचानक हॉस्टल क्यों पहुंचा और छात्रा को घर क्यों ले जाया गया। आमतौर पर छात्राएं अकेले आती-जाती हैं, लेकिन इस मामले में माता-पिता और भाई का एक साथ आना जांच का विषय बना हुआ है. घर जाते समय CCTV फुटेज में छात्रा और परिजनों के व्यवहार का विश्लेषण किया जा रहा है.
मोबाइल हिस्ट्री और FIR में देरी
जांच एजेंसियां छात्रा के घर पर 9 दिन रुकने, उसकी मानसिक स्थिति, मोबाइल सर्च हिस्ट्री, कॉल डिटेल्स और FIR दर्ज कराने में हुई देरी, इन सभी पहलुओं को आपस में जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ी समझने की कोशिश कर रही हैं.