सुसाइड नहीं, हत्या! पटना NEET छात्रा केस का आरोपी कौन? FSL रिपोर्ट में हत्यारे की उम्र का चला पता
पटना NEET छात्रा रेप और मर्डर केस में FSL रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी है. छात्रा के अंडरगारमेंट पर मिला स्पर्म 18 से 21 साल के किसी युवक का बताया गया है. इस खुलासे के बाद हॉस्टल मालिक से हटकर जांच अब नए संदिग्धों पर केंद्रित हो गई है.;
पटना NEET छात्रा मौत मामले में अब तक की सबसे बड़ी कड़ी सामने आई है. फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट ने पूरे केस की दिशा बदल दी है. छात्रा के अंडरगारमेंट्स पर मिले स्पर्म को लेकर खुलासा हुआ है कि वह 18 से 21 साल के किसी युवक का है. यह तथ्य सामने आते ही पहले से तय माने जा रहे संदिग्धों पर सवाल खड़े हो गए हैं और जांच एक नए रास्ते पर मुड़ गई है.
FSL के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक स्पर्म सैंपल की जैविक प्रोफाइलिंग से उम्र का दायरा तय हुआ है. लेकिन सवाल यह है कि वह युवक कौन है- छात्रा का दोस्त, परिचित, रिश्तेदार या हॉस्टल से जुड़ा कोई व्यक्ति? पुलिस मान रही है कि यह उम्र-संकेत महज़ आंकड़ा नहीं, बल्कि कातिल तक पहुंचने का रोडमैप हो सकता है. इसी आधार पर अब SIT ने 18–21 आयु वर्ग के संदिग्धों की तलाश तेज कर दी है.
शक के घेरे से बाहर आता हॉस्टल एंगल
अब तक जांच की सुई शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन की ओर घूम रही थी. मगर FSL रिपोर्ट के बाद यह एंगल कमजोर पड़ता दिख रहा है, क्योंकि उम्र-सीमा मेल नहीं खाती. इसका मतलब यह नहीं कि हॉस्टल एंगल खत्म हो गया है, बल्कि यह कि जांच अब एकल संदिग्ध से आगे बढ़कर नेटवर्क-आधारित हो गई है जहां हॉस्टल, कोचिंग, परिचितों और हालिया संपर्कों की पड़ताल साथ-साथ चल रही है.
18 से 21 साल का लड़का कौन?
पटना नीट स्टूडेंट मौत मामले में सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि आखिर वह 18 से 21 साल का लड़का कौन है, जिसका स्पर्म छात्रा के अंडरगारमेंट्स पर मिला है. FSL की रिपोर्ट के मुताबिक यह सैंपल किसी युवा पुरुष का है, जिससे साफ होता है कि मौत से पहले छात्रा के साथ यौन संपर्क हुआ था. पुलिस सूत्र मान रहे हैं कि वह युवक कोई बाहरी नहीं, बल्कि छात्रा का करीबी, परिचित या हॉस्टल से जुड़ा व्यक्ति हो सकता है, क्योंकि इतने सीमित दायरे में ही उसका आना-जाना संभव था. अब SIT उसी उम्र वर्ग के युवकों के डीएनए सैंपल जुटाकर मिलान कर रही है, ताकि यह तय हो सके कि वह युवक सिर्फ संपर्क में था या फिर उसी ने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया.
सुसाइड थ्योरी से अपराध तक: केस का यू-टर्न
शुरुआत में पुलिस ने इसे सुसाइड, ओवरडोज और बीमारी का हवाला दिया था. परिवार ने इसे सिरे से खारिज करते हुए रेप और मर्डर का आरोप लगाया. जनदबाव बढ़ा, प्रदर्शन हुए और आखिरकार पोस्टमार्टम ने तस्वीर साफ की. यह केस बताता है कि कैसे एक गलत शुरुआती आकलन जांच को भटका सकता है और सबूतों की अहमियत कितनी निर्णायक होती है.
पोस्टमॉर्टम ने खोली हिंसा की परतें
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गर्दन और प्राइवेट पार्ट्स पर चोटों के निशान मिले, जिसने यौन हिंसा की पुष्टि कर दी. इसके बाद कपड़ों की फॉरेंसिक जांच हुई और स्पर्म साक्ष्य बरामद हुए. यही साक्ष्य अब जांच की धुरी बन चुका है. विशेषज्ञों के मुताबिक डीएनए मैच होते ही आरोपी तक पहुंचने में समय नहीं लगेगा.
SIT की तेज़ी, डीएनए मिलान पर फोकस
SIT ने कई संदिग्धों के डीएनए सैंपल जुटाए हैं, जिनमें हॉस्टल से जुड़े लोग भी शामिल हैं. इन सैंपल्स का स्पर्म प्रोफाइल से मिलान किया जा रहा है. साथ ही छात्रा के कॉल रिकॉर्ड, सोशल सर्कल, हालिया मुलाकातों और डिजिटल फुटप्रिंट्स की गहन पड़ताल हो रही है. पुलिस मानती है कि करीबी व्यक्ति की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता.
लापरवाही पर कार्रवाई, सिस्टम पर सवाल
केस में शुरुआती लापरवाही को लेकर दो पुलिस अधिकारियों चित्रगुप्त नगर थाने की SHO और कदमकुआं के दारोगा को सस्पेंड किया गया है. परिवार का आरोप है कि हॉस्टल तीन दिन तक सील नहीं हुआ, जिससे सबूत मिटे. यह कार्रवाई संकेत देती है कि जांच अब सिर्फ अपराधी नहीं, बल्कि प्रक्रियागत चूक पर भी नजर रख रही है.
न्याय की उम्मीद, जवाब का इंतज़ार
जहानाबाद की रहने वाली 18 वर्षीय छात्रा की मौत ने बिहार से बाहर तक आक्रोश पैदा किया है. डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को सजा मिलेगी. अब सबकी निगाहें डीएनए रिपोर्ट पर टिकी हैं क्योंकि वही बताएगी कि 18–21 साल का वह युवक कौन है, और क्या वही इस जघन्य अपराध का जिम्मेदार है.