NEET छात्रा केस में किसकी कहानी सही? पुलिस थ्योरी फेल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आया यौन हिंसा का भयावह सच
पटना में NEET की छात्रा के साथ दरिंदगी और मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई है. मेडिकल रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि छात्रा ने लंबे समय तक हमले का विरोध किया और उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं. जननांग में ताजा चोटें और टिशू ट्रॉमा जबरन यौन शोषण की पुष्टि करते हैं. इन तथ्यों ने पुलिस की शुरुआती थ्योरी को कठघरे में खड़ा कर दिया है, जबकि मौत के कारण पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है.
पटना में NEET की छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरी कहानी की दिशा बदल गई है. शुरुआती दावों और कयासों के उलट, मेडिकल जांच ने स्पष्ट किया है कि छात्रा ने हमले के दौरान लंबे समय तक संघर्ष किया. रिपोर्ट यह संकेत देती है कि यह कोई अचानक या क्षणिक घटना नहीं थी, बल्कि घंटों चला एक भयावह संघर्ष था. इसी खुलासे के बाद पुलिस की शुरुआती थ्योरी पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
पोस्टमार्टम करने वाले मेडिकल बोर्ड के अनुसार छात्रा के शरीर पर मौजूद चोटें मौत से पहले की हैं. गर्दन, कंधे और छाती के आसपास नाखूनों से बने गहरे घाव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि वह खुद को बचाने की कोशिश कर रही थी. डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के निशान तब मिलते हैं, जब पीड़िता को जबरन दबाया या पकड़ा जाता है. यह साफ करता है कि छात्रा ने आखिरी सांस तक विरोध किया.
छाती और पीठ पर चोटें
रिपोर्ट में छाती और पीठ के हिस्से पर फैली हुई खरोंच और नीले निशान दर्ज किए गए हैं. ये चोटें एक जगह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शरीर के कई हिस्सों में फैली हुई हैं. मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे निशान बताते हैं कि पीड़िता को लंबे समय तक जमीन या किसी कठोर सतह पर दबाकर रखा गया. इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि संघर्ष कुछ मिनटों का नहीं, बल्कि काफी देर तक चला.
जननांग की जांच में गंभीर तथ्य सामने आए
पोस्टमार्टम का सबसे अहम हिस्सा जननांग की जांच से जुड़ा है. रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा गया है कि वहां ताजा चोटें और टिशू ट्रॉमा पाया गया है. मेडिकल बोर्ड की राय है कि ये चोटें सहमति से बने किसी भी संबंध से मेल नहीं खातीं. डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि इस तरह की अंदरूनी और बाहरी चोटें जबरन किए गए यौन शोषण का संकेत देती हैं.
एक से ज्यादा हमलावर की आशंका क्यों?
शरीर पर फैली चोटों और संघर्ष की अवधि को देखते हुए मेडिकल बोर्ड ने यह भी कहा है कि हमलावर एक से अधिक हो सकते हैं. लंबे समय तक दबाव बनाए रखना और अलग-अलग हिस्सों में चोटें मिलना इस ओर इशारा करता है कि पीड़िता को काबू में करने के लिए ज्यादा ताकत का इस्तेमाल हुआ. हालांकि, इस बिंदु पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा.
पुलिस से कैसे अलग है पोस्टमार्टम रिपोर्ट?
- कोई स्पष्ट बाहरी हिंसा नहीं: पुलिस ने शुरुआत में कहा था कि छात्रा बेहोश मिली और शरीर पर कोई खास संघर्ष के संकेत नहीं थे. मामले को मानसिक तनाव या अचानक बिगड़ी हालत से जोड़ने की कोशिश की गई. लेकिन पोस्टमार्टम कहता है कि शरीर पर दर्जनों ताजा चोटें मिलीं- गर्दन, कंधे, छाती और पीठ पर नाखूनों के गहरे घाव और नीले निशान. ये सभी चोटें मौत से पहले की हैं, जो लंबे संघर्ष की साफ पुष्टि करती हैं.
- यौन शोषण के पुख्ता सबूत नहीं: पुलिस ने शुरुआती बयान में रेप की पुष्टि से इनकार किया था. लेकिन पोस्टमार्टम में पता चला कि जननांग (Private Parts) में ताजा चोटें, टिशू ट्रॉमा और ब्लीडिंग पाई गई. मेडिकल ओपिनियन में साफ लिखा गया है कि ये चोटें forceful penetration यानी जबरदस्ती किए गए यौन शोषण के अनुरूप हैं.
- घटना अचानक हुआ: पुलिस के मुताबिक मामला अचानक बिगड़ी स्थिति का हो सकता है. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, शरीर पर फैली चोटें बताती हैं कि संघर्ष कुछ मिनटों का नहीं, बल्कि डेढ़ से दो घंटे तक चला. यह किसी अचानक घटना की थ्योरी को खारिज करता है.
- छात्रा बेहोश थी: यह संकेत दिया गया कि छात्रा विरोध की स्थिति में नहीं थी. लेकिन पोस्टमार्टम कहता है कि नाखूनों के घाव, खरोंच और दबाव के निशान बताते हैं कि छात्रा होश में थी और लगातार खुद को बचाने की कोशिश कर रही थी.
- एक ही व्यक्ति शामिल हो सकता है: इस एंगल पर पुलिस स्पष्ट नहीं थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, चोटों की प्रकृति और लंबे संघर्ष को देखते हुए एक से अधिक हमलावरों की आशंका से इनकार नहीं किया गया है.
मौत के कारण पर अभी भी सस्पेंस
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन शोषण की पुष्टि तो की गई है, लेकिन मौत के सटीक कारण को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है. डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित रखकर आगे की जांच के लिए भेज दिया है. रिपोर्ट एम्स को रेफर की गई है, ताकि विशेषज्ञ स्तर पर मौत की वजह स्पष्ट हो सके. यह जांच आने वाले दिनों में केस की दिशा तय करेगी.
सवाल जो जवाब मांगते हैं
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि शुरुआती जांच में इन तथ्यों को नजरअंदाज क्यों किया गया. क्या सबूतों के बावजूद मामले को हल्का दिखाने की कोशिश हुई? परिवार और समाज अब सिर्फ न्याय की मांग नहीं कर रहे, बल्कि यह भी पूछ रहे हैं कि इस केस में सच को सामने लाने में इतनी देर क्यों हुई. अब निगाहें आगे की जांच और जवाबदेही तय होने पर टिकी हैं.





